
It is responsible for many incidents including favorite life partner
जबलपुर। जन्मकुंडली का नौवां घर सर्वाधिक शुभ घरों में गिना जाता है। इस घर का अपना विशेष महत्व है। हर व्यक्ति की कुंडली में राजयोग और दरिद्र योग मिल जायेंगे। हर योग की कुछ समय अवधि रहती है। दो तीन साल से लेकर पांच छह साल तक ही ये योग प्रभावशाली रहते हैं। कुछ लोगों को आगे बढऩे के अवसर नहीं मिल पाते हैं। बदकिस्मती जो जीवन बदल दे इसी घर की देन होती है। खुशकिस्मती जो अगली पीढिय़ों के लिए भी रास्ता साफ़ कर दे नवम भाव का प्रबल होना दर्शाती है। मनपसंद जीवनसाथी पाने की आस में पूरा जीवन गुजर जाता है उसके साथ जिसे कभी पसंद किया ही नहीं। जिन्दगी के साथ समझौता कर लेना या यह मान लेना कि यही नसीब था इन घटनाओं के लिए नवम भाव ही उत्तरदायी है।
नवम भाव और राज योग
नवम भाव किस्मत का है। यहाँ बैठे ग्रह आपके भाग्य को बहुत हद तक प्रभावित करते हैं। यदि यहाँ कोई भी ग्रह न हो तो भी यहाँ स्थित राशी के स्वामी को देखा जाता है। नवम भाव भाग्य का और दशम भाव कर्म का है। जब इन दोनों स्थानों के ग्रह आपस में किसी भी प्रकार का सम्बन्ध रखते हैं तब राजयोग की उत्पत्ति होती है। राजयोग में साधारण स्थिति में व्यक्ति सरकारी नौकरी प्राप्त करता है। नवम और दशम भाव का आपस में जितना गहरा सम्बन्ध होगा उतना ही अधिक बड़ा राज व्यक्ति भोगेगा। मंत्री, राजनेता, अध्यक्ष आदि राजनीतिक व्यक्तियों की कुंडली में यह योग होना स्वाभाविक ही है।
नवम भाव और दुर्भाग्य
यदि नवम भाव का स्वामी ग्रह सूर्य के साथ 10 डिग्री के बीच में हो तो निस्संदेह व्यक्ति भाग्यहीन होता है। यदि नवमेश नीच राशी में हो तो व्यक्ति चाहे करोड़पति क्यों न हो एक न एक दिन उसे सडक़ पर आना पड़ ही जाता है। यदि नवमेश 12वें भाव में हो तो व्यक्ति का भाग्य अपने देश में नहीं चमकता। विदेश में जाकर वहां कष्ट उठाकर जीना पड़ता है। उसकी यही मेहनत उसके भाग्य का निर्माण करती है। नवम भाव का स्वामी बलवान हो या निर्बल, उसकी दशा अन्तर्दशा में व्यक्ति को अवसर खूब मिलते हैं। यदि नवमेश अच्छी स्थिति में होगा तो व्यक्ति अवसर का लाभ उठा पायेगा।
पाप ग्रह इस स्थान में बैठकर भाग्य की हानि करते हैं और शुभ ग्रह मुसीबतों से बचाते हैं। इस स्थान पर बुध, शुक्र, चन्द्र और गुरु का होना व्यक्ति के उज्ज्वल भविष्य को दर्शाता है। मंगल, शनि, राहू और केतु इस स्थान में बैठकर व्यक्ति को दुर्भाग्य के अवसर प्रदान करते हैं। सूर्य का यहाँ होना निस्संदेह एक बहुत बड़ा राजयोग है। सूर्य स्वयं ग्रहों का राजा है और जब राजा ही भाग्य स्थान में बैठ जाए तो राजयोग स्पष्ट हो जाता है। कोई भी ग्रह चाहे वह पाप ग्रह मंगल, शनि ही क्यों न हों, इस स्थान में यदि अपनी राशी में हो तो व्यक्ति बहुत भाग्यशाली हो जाता है।
दुर्भाग्य को नष्ट करने के उपाय
चाहे आपको ज्योतिष का ज्ञान हो या न हो, अपने भाग्य की स्थिति का ज्ञान तो हर व्यक्ति को होता है। अब यदि दुर्भाग्य पीछा न छोड़ रहा हो तो क्या ऐसा करें कि दुर्भाग्य सौभाग्य में बदल जाए। यह संभव है क्योंकि नवम भाव का स्वामी मारक नहीं होता इसलिए उसका रत्न अधिकतर फायदा ही देता है। नवम भाव के उपाय हमेशा काम करते हैं। यदि नवमेश का गहराई से अध्ययन करके उसके बलाबल का पता लगाया जाये तो आसान से उपायों से सौभाग्य को आमंत्रित किया जा सकता है।
नवम भाव धर्म का भाव है। धर्म कर्म में व्यक्ति की रूचि तभी होगी जब यह स्थान शुभ ग्रहों से विभूषित होगा। यदि यहां पाप ग्रहों का साया हो तो व्यक्ति नास्तिक होता है। बुद्धिजीवी होने के फायदे हों न हों परन्तु धर्म कर्म के प्रभाव को समझना बुद्धिजीवियों के वश की बात नहीं। इसीलिए वे प्रकृति के इस वरदान से वंचित रह जाते हैं।
Published on:
18 Jun 2019 07:05 pm
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