
kali mandi koniya barhi
कटनी. बरही तहसील मुख्यालय से 7 किलोमीटर दूर चारों ओर पानी से घिरे पहाड़ पर विराजमान मां काली का दर्शन करने के लिए नवरात्र के अवसर पर दूर-दराज से श्रद्धालु बड़ी संख्या में पहुंच रहे हैं। नवरात्र के पावन पर्व पर कोनिया धाम में भक्ति और उत्साह का माहौल चरम पर है। भक्तजन मां काली के दर्शन कर मनोकामना पूर्ति की कामना कर रहे हैं। कोनिया काली धाम जिले के विजयराघवगढ़ विधानसभा क्षेत्र का प्रसिद्ध धार्मिक स्थल है, जो श्रद्धालुओं के लिए गहरी आस्था का केंद्र बना हुआ है। स्थानीय ग्रामीणों और सरपंच तीरथ पटेल व श्रद्धालु इंदु मिश्रा ने बताया कि मां काली की मूर्ति की स्थापना करीब 200 वर्ष पूर्व हुई थी।
कहा जाता है कि भक्तजन काली मां की मूर्ति उमरिया जिले के भरेवा से कुटेश्वर ले जा रहे थे। रास्ते में नदी के पास उन्होंने मूर्ति को रखकर विश्राम किया। जब पुन: मूर्ति को उठाकर आगे बढऩे का प्रयास किया गया तो मूर्ति हिली नहीं। भक्तों ने कई प्रयास किए, किंतु मूर्ति वहीं स्थिर रही। यह खबर आसपास के गांवों में फैल गई और बड़ी संख्या में लोग वहां जुट गए। भक्तों की सहमति और आस्था से उसी स्थान पर मां काली की स्थापना कर दी गई। तभी से यह स्थान कोनिया काली धाम के रूप में प्रसिद्ध हो गया और भक्तों की श्रद्धा का प्रमुख केंद्र बन गया।
स्थानीय श्रद्धालु इंदु मिश्रा ने बताया कि यहां पर मान्यता को लेकर लोग आते हैं। बड़ी आस्था है। कोनिया निवासी रामकुमार आदिवासी, जिनकी उम्र लगभग 50 वर्ष हो गई थी, संतानहीन थे। उन्होंने मां काली से संतान प्राप्ति की प्रार्थना की और कुछ समय बाद उन्हें संतान प्राप्त हुई। यह चमत्कारिक घटना पूरे क्षेत्र में चर्चा का विषय बन गई। इसके बाद भक्तों के सहयोग से मंदिर का निर्माण कराया गया। समय के साथ कोनिया धाम में श्रद्धालुओं की आस्था और विश्वास गहराते गए। आज यह स्थान मां काली की असीम कृपा के प्रतीक के रूप में जाना जाता है।
नवरात्र के अवसर पर कोनिया धाम में विशेष पूजा-अर्चना और धार्मिक अनुष्ठान आयोजित किए जाते हैं। आस-पास के गांवों और दूरस्थ क्षेत्रों से श्रद्धालु यहां पहुंचकर मां काली के दर्शन करते हैं। भक्तों का मानना है कि यहां मां काली के दर्शन करने से उनकी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। इस आस्था और विश्वास के कारण नवरात्र में कोनिया धाम का माहौल भक्तिरस में डूबा रहता है। स्थानीय लोग बताते हैं कि कोनिया काली धाम न केवल धार्मिक आस्था का केंद्र है, बल्कि यह क्षेत्र की सांस्कृतिक और ऐतिहासिक धरोहर भी है। नवरात्र के दौरान यहां आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या हजारों में पहुंच जाती है। भक्तों की मान्यता है कि मां काली के चरणों में माथा टेकने से कष्ट दूर होते हैं और सुख-समृद्धि प्राप्त होती है।
Published on:
28 Sept 2025 08:25 pm
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