
जनता खीझे ना इसलिए बंद सीवर लाइन का काम, वर्क ऑर्डर जारी नहीं होने से घंटाघर सडक़ बेकाम
कटनी. शहर सहित जिले की चारों विधानसभाओं में चुनावी समर सबाब पर है। राजनीतिक पार्टियां एक-दूसरे पर निशाना साधते हुए व अपनी खूबियां गिनाते हुए वोटरों को रिझाने में लगे हैं। इनके भाषणों और दावों से मतदाता कितना सधता है इसका परिणाम तो 3 दिसंबर को इवीएम से बाहर आएगा, लेकिन इन सबके बीच शहर व जिले की जनता मूलभूत समस्याओं के अभाव में ना सिर्फ ***** रही है बल्कि परेशान भी हो रही है। आपको जानकर हैरानी होगी कि चुनाव के चलते लोग खीझें ना इसलिए सीवर लाइन का काम ही बंद करा दिया गया है। कई दिनों से ठेका कंपनी जयंती सुपर ने काम बंद कर दिया है। शहर में 134 किलोमीटर सीवर लाइन के अधूरा काम पूरा करने के लिए लिए काम शुरू किया गया, लेकिन एक पखवाड़े पहले तक लगभग 20 किलामीटर का काम करने के बाद बंद कर दिया गया है। ड्रेनेज सिस्टम को ठीक करने की योजना 2017 से चल रही है, जबकि इसे 18 माह में पूरा हो जाना था। जगह-जगह खुदी सडक़ के कारण गड्ढे व धूल के गुबार से लोग परेशान हैं।
शहर के लिए नासूर बनी यह सडक़...
घंटाघर से लेकर जगन्नाथ चौक तक की सडक़ शहर वासियों के लिए नासूर बन गई है। 30 सितंबर से सडक़ निर्माण का किया गया वादा भी धरा का धरा रहा गए। सीवर लाइन डालकर मार्ग को अधूरा छोड़ दिया गया है। यहां पर अबतक डामरीकरण का काम शुरू नहीं हो पाया। नगर निगम के अधिकारी बताते हैं कि वर्क ऑर्डर जारी न हो पाने के कारण काम में लेट-लतीफी हो रहा है। जिस सडक़ के लिए घेरा, चक्काजाम, प्रदर्शन हुए और जनप्रतिनिधियों की पहली प्राथमिकता रही वह सडक़ आज भी बदहाल है। मुख्य मार्ग होने के चलते दिनभर शहरवासी व कारोबारी परेशान होते हैं। चांडक चौक से घंटाघर सडक़ भी बड़ी चुनावी मुद्दा है।
समस्याएं छोटी, फिर भी अनदेखी
शहर में सुरखी टैंक आजतक संवर नहीं पाया, नई बस्ती से लेकर पन्ना नाका तक सडक़ नहीं बनी, लमतरा से लेकर कटनी नदी तक मॉडल रोड के पखच्चे उड़े हैं, जो तीन साल बाद भी नहीं बन पाई। अंतर्राज्जीय बस स्टैंड सपना बनकर रह गया है। जिला जेल के समीप बनने वाला मिनी बस स्टैंड नहीं तैयार हुआ, माधवनगर स्थित अमीरगंज तालाब का सौंदर्यीकरण नहीं हो पाया। इमलिया खदान से पानी लाने की योजना अधूरी पड़ी है। शहर की सबसे बड़ी समस्या पेयजल है। पर्याप्त पानी नहीं मिल रहा। 2017 में नर्मदा जल आ जाना था, लेकिन अबतक नहीं आ पाया। जिम्मेदारों की बिफलता का दंश शहर की जनता भुगत रही है।
जिलों की ये समस्याएं हैं बड़े मुद्दे
ऐसा नहीं है कि शहर में भी समस्याएं हैं, ग्रामीण क्षेत्रों में भी बड़े वादे हुए जो पूरे नहीं हुए, जिसका दंश जिले की जनता भुगत रही है। कैमोर और विजयराघवगढ़ में आजतक बाइपास नहीं बन पाया। यहां के उद्योगों को स्थानीय युवाओं को रोजगार नहीं मिला। डोकरिया, बुजबुजा आदि गांव में किसानों की जमीन उद्योग के लिए अधिग्रहित हुई, लेकिन आजतक उद्योग नहीं लगा, जिससे युवा बेरोजगार घूम रहा है। ढीमरखेड़ा क्षेत्र में भी उद्योगों की घोषणा कोरी साबित हुई। बड़वारा में भी कई प्लांट बंद पड़े हैं। स्थानीय युवा रोजगार से वंचित हैं। बहोरीबंद में पेयजल समस्या अभी भी गंभीर है। किसानों के लिए पर्याप्त बिजली ना मिलना, सिंचाई के साधना ना होना बड़े मुद्दे हैं।
नहीं रुक पाया पलायन
जिले में उद्योग, व्यापार, व्यवसाय में स्थानीय लोगों को रोजगार ना मिलने, मनरेगा में समय पर मजदूरी व 100 दिव व उससे भी कम काम मिलने के कारण मजदूरों का पलायन करना मजबूरी बन गई है। सरकार बदल रहीं हैं, नेता बदल रहे हैं, लेकिन गरीबों के हालात में जितना सुधार होना चाहिए वह नहीं हो पाया। युवा गुजरात, महाराष्ट्र, मुंबई, दिल्ली, बंगाल आदि जाकर भरण-पोषण कर रहा है, जो चुनावी मुद्दा बनेगा।
वर्जन
सीवर लाइन का काम शहर में बंद है, शायद आउट साइड में चल रहा है। चुनाव कार्य में सभी अधिकारी-कर्मचारी व्यस्त हैं, अभी आइडिया नहीं है, मैंने पता नहीं किया कि क्या स्थिति है। चुनाव व त्योहार के बाद काम तेजी से चलेगी। घंटाघर से लेकर जगन्नाथ चौक तक सडक़ निर्माण के लिए प्रक्रिया चल रही है। नवरात्र के पहले तक सीवर लाइन का काम हुआ है। अब चुनाव आ गया, इलेक्टशन के कारण काम रुके हैं, व्यस्त रोड है, अब यदि काम चलेगा तो दिक्कत होगी। चुनाव के बाद ही काम होगा।
विनोद शुक्ला, आयुक्त नगर निगम।
Published on:
10 Nov 2023 09:28 pm
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