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दादा का सपना पूरा करने ठानी जिद, यूपीएससी में पास नाती बनेगा अफसर

मां ने आर्टिफीशियल गहनों से चलाया काम, पिता ने पढ़ाई में लगाए रुपए, पांचवीं बार में विगढ़ के लाल ने सफलता

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कटनी

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Balmeek Pandey

May 24, 2023

दादा का सपना पूरा करने ठानी जिद, यूपीएससी में पास नाती बनेगा अफसर

दादा का सपना पूरा करने ठानी जिद, यूपीएससी में पास नाती बनेगा अफसर

कटनी. दादा का सपना था कि मेरा नाती अफसर बनकर देश की सेवा करे...। और इसी सपने को पूरा करने के लिए विजयराघवगढ़ निवासी शिवराम गुप्ता के बेटे विकास गुप्ता (27) ने अफसर बनने का सपना संजोया और तैयारी की। चार बार के अटेम्ट में मिली असफलता से हार नहीं मानी और पांचवीं बार यूपीएससी की परीक्षा उत्तीर्ण की। मंगलवार को जारी हुए परीक्षा परिणाम में विकास गुप्ता ने 468वीं रैंक प्राप्त की है। इस परीक्षा में आई रैंक के अनुसार विकास को सिविल सर्विसेस में इन्कम टैक्स ऑफिसर या फिर डीएसपी की पोस्ट मिलेगी। विकास की इस सफलता ने परिवार में न सिर्फ खुशी का माहौल है बल्कि प्रदेश व देशभर में विगढ़ व कटनी का मान बढ़ा है।
विकास के पिता शिवराम ने कहा कि बेटा के परिणाम से वे बहुत गौरवान्वित हैं। विकास के दादा स्व रमेश्वर प्रसाद गुप्ता का सपना था कि मेरा नाती पढ़ लिखकर ऑफीसर बने, जो विकास ने कर दिखाया। शिवराम ने बताया कि मां का जल्दी स्वर्गवास हो गया था। बेटा दादा के पास अधिक रहता था। कक्षा एक से लेकर 12वीं तक स्व लाल अवध राज सिंह बघेल सरस्वती स्कूल में पढ़ाई की। इसके बाद सागर स्थित इंदिरा गांधी कॉलेज से मैकेनिकल से इंजीनियरिंग की। इसके बाद दो साल दिल्ली में कोचिंग ली। इंदौर में भी एक साल रहकर तैयारी करते हुए सफलता प्राप्त की। छोटा बेटा शिवम गुप्ता (24) आइजर मोहाली में पीएचडी की पढ़ाई कर रहा है। पिता ने कहा कि लोगों की सेवा करने का मेरे मन में हमेशा भाव बना रहता है। मैं चाहता हूं कि बेटी भी इमानदारी के साथ काम करे तो और गर्व होगा।

जीवन में नहीं माननी चाहिए हार
पत्रिका से चर्चा के दौरान विकास ने कहा कि सेल्फ स्टडी करते हुए सफलता प्राप्त की है। उन्होंने कहा कि किसी भी लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए की जाने वाली मेहनत से हार नहीं माननी चाहिए। मेरा चौथा एटेप्ट था। चार बार फेल हो चुका था। खुद पर विश्वास रखा। दोस्तों और परिवार का सहयोग मिला, मां विनीता व पिता की प्रेरणा ने संबल दिया, जिसका परिणाम सामने है। मेरी सफलता में माता-पिता सहित बन सबसे बड़ा रोल माता-पिता का है। छोटी सिस्टर अनामिका गुप्ता बेटे की तरह माता-पिता का ध्यान रखती हैं। सपार्ट के कारण ही पढ़ पाया।

दोस्त हों तो मेरे जैसे, डेढ़ लाख है उधार
विकास ने कहा कि पढ़ाई के लिए रुपए भी होना बहुत आवश्यक है। माता-पिता ने कमाई का पूरा पैसा पढ़ाई में लगाते हैं। घर में कभी महंगा पेंट नहीं कराया, पुराने सामने से ही गुजारा हो रहा है। मां अधिकांश आर्टिफीशियल गहनों से काम चलाया, ताकि बेटा-बेटी पढ़ लिखकर आगे बढ़ सकें। दोस्तों ने भी अहम किरदार निभाया है। डेढ़ लाख रुपए उधार हैं। दोस्त यही कहते थे कि तुम पढ़ाई करो, जब पैसे होंगे दे देना। चाय पीते हुए एक दोस्त से रुपए मांगा तो उसने बिना बात किए सात हजार रुपए दिए, डेढ़ साल में आजतक नहीं मांगा।