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#mpelection- अन्नदाता के खेतों को नहीं बिजली, उच्च शिक्षा और रोजगार से वंचित युवा, यह वासी दिक्कतों पर दिखाएंगे नेताओं को आइना

10 से सड़क के उड़े धुर्रे, उद्योगों ने स्थानीय युवाओं से किया किनारा, बड़वारा विधानसभा में बुनियादी सुविधाओं का मुद्दा तय करेगा सियासत

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कटनी

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Balmeek Pandey

Oct 26, 2018

Critical problem in Badwara Vidhansabha

Critical problem in Badwara Vidhansabha

जिला, प्रदेश सहित छत्तीसगढ़ में बड़वारा का संगमरमर पत्थर अपनी उजाश वर्षों से फैला रहा है। बड़वारा के भादावर, अमराडाड़, मगरहटा, माल्हन, गुड़ा जमुनिया सहित एक दर्जन गांवों में यह विशेषता समाई हुई है। इससे सरकार को न सिर्फ लाखों रुपए का राजस्व बल्कि बड़ी-बड़ी कोल माइंस में काम करने वाले हजारों मजदूरों को इसके सफेर रंग से राह दिखती है, जिससे विकास की राह आसान हो रही है, लेकिन सफेद सोने का यह गढ़ भाजपा, कांग्रेस और जनता दल द्वारा राजगद्दी संभाले जाने के बाद भी उपेक्षित है। अब फिर से सियासी गलियारों में उद्योग, शिक्षा, स्वास्थ्य और सड़कों का जाल बिछाने का दावा किया जा रहा, लेकिन बड़वारा विधानसभा खासकर मुख्यालय की ज्वलंत समस्याएं इस बार बड़ा सियासी मुद्दा बनने जा रही हैं।

कटनी. जिले की एक मात्र बड़वारा विधानसभा सीट जो आरक्षित है। इसे आदिवासी बाहुल्य के चलते आरक्षित किया गया है। जिसका मुख्य उद्देश्य क्षेत्र में विकास को गति देना और यहां के वाशिंदों के जीवन स्तर को ऊपर उठाना रहा है। हर सियासतदार ने अपने हिसाब से विकास के दावे की विसात बिछाई, पांच साल राज किये और कमोवेश क्षेत्र की समस्याएं जस की तस बनी रहीं। बड़वारा की तस्वीरें विकास को साफ बयां कर रही हैं। बड़वारा विधानसभा के लोगों की मानें तो यहां पर कोई एक मुद्दा नहीं है। यहां सड़क, बिजली, खाद-बीज, उच्च शिक्षा, तकनीकी शिक्षा, खेल, रोजगार, सिंचाई सबसे बड़ा मुद्दा है। यह के रहवासियों का साफ कहना है कि राजनीति खींचतान के कारण कई बार विकास पीछे छूट जाता है, लेकिन पिछले 15 सालों से प्रदेश में एक ही पार्टी की सरकार है। विधानसभा में 10 साल से माननीय फूल की लहर में राज कर रहे हैं, लेकिन जनता के दर्द को क्यों नहीं महसूस किये, यह सबसे बड़ा सवाल है। बेरोजगारी और 10 साल से नगर में उड़ रहे धूल के गुबार तय करेंगे की ऊंट इस बार किस करवट बैठेगा। यही सबसे बड़ा मुद्दा होगा।

शिक्षा का स्तर नगण्य
बड़वारा निवासी शत्रुघन सिंह की मानें तो बड़वारा में शिक्षा का स्तर लगातार नीचे गिरता जा रहा है। स्कूल तो खुले हैं लेकिन शिक्षक ही नहीं हैं। 10 वर्षों से यहां पर आइटीआइ केंद्र खोले जाने का सब्जबाग माननीय द्वारा दिखाया गया। आइटीआइ के लिए जमीन तक आवंटित हो गई, लेकिन अबतक नीव तक नहीं रखी गई। कन्या हॉयर सेकंडरी स्कूल की नगर में सख्त जरुरत है। इसके लिए स्थानीय से लेकर जिला और प्रदेश स्तर तक आवाज उठाई गई, लेकिन किसी ने इस समस्या पर ध्यान नहीं दिया। उच्च शिक्षा और तकनीकी शिक्षा के बिना युवा पैरों पर नहीं खड़ा हो पा रहा। गुणा-विलायतकला, झरेला और रूपौंद में तीन उद्योगों की स्थापना हुई, लेकिन स्थानीय युवाओं को रोजगार नहीं मिला। युवा सहित विस क्षेत्र की जनता वाकइ में अपने आप को छला महसूस कर रही है।

सुदूर बस्ती से भी खराब स्थिति
जितेंद्र कुमार रजक, गेंदा बाई, चंद्रभान बर्मन आदि की मानें तो बड़वारा में लगभग 10 साल से सड़क की जो हालत है वह शायद कभी नहीं रही होगी। मुख्यालय की सड़क के धुर्रे उड़े हुये हैं। मिशन चौक बड़वारा से रूपौद स्टेशन मार्ग, जगतपुर उमरिया से बस स्टैंड तक, बाजार सहित बस्तियों की सड़कें गायब हैं। मुख्य मार्ग में नाली न होने से कचड़ और दलदल है, जिससे संक्रमण बढ़ा है। नगर में एक सुविधायुक्त बस स्टैंड तक नहीं बन पाया। बसें सड़कों पर खड़ी हो रही हैं। महिलाओं के लिए टॉयलेट नहीं हैं, प्रसाधन अता-पता नहीं है, बैठने के लिए शेड तक की व्यवस्था नहीं है। यह बड़वारा के विकास की तस्वीर है। इसे चुनावी मुद्दा न कहा जाये तो फिर क्या कहा जाएगा।

10 में से पांच घंटे मिल रही बिजली
भद्दी प्रसाद पटेल, राजेंद सिंह, चंदू सिंह, अजय राय, चंद्रभान, गणेश सिंह ठाकुर सहित अन्य किसानों ने बताया कि 10 घंटे कृषि बिजली का दावा किया जा रहा है, खेत में सूख रहीं धान की फसलें बता रहीं हैं कि कितने घंटे बिजली मिल रही है। ठीक से 5 घंटे भी बिजली नहीं मिल रही। अघोषित कटौती और मेंटेनेंस सबसे बड़ी समस्या है। अनाप-शनाप बिल किसानों की कमर तोड़ रहे हैं। बड़वारा का पॉवर स्टेशन 40 साल पहले बना था, ट्रांसफार्मर पुराने है कनेक्शन चौगने बढ़ गए हैं। मझगवां, अमाड़ी, भुड़सा, विलायतकला, भजिया, सब स्टेशन बनाये, लेकिन मुख्यालय के स्टेशन की क्षमता नहीं बढ़ाई है।

इलाज रेफर टू कटनी
रूप सिंह, विष्णु कुमार, दीपक, झल्लू यादव आदि ने बताया कि कहने को बड़वारा में सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र हैं। लेकिन यहां पर न तो डॉक्टर हैं और ना ही नर्सिंग स्टॉफ। यहां पर इलाज के नाम पर सिर्फ रेफर टू कटनी होता है। हमेशा दवाओं का टोटा रहता है। मुख्यालय में कई वर्षों से व्यवहार न्यायालय मांग की जा रही है, सर्व सुविधायुक्त खेल मैदान बनाये जाने मांग हुई लेकिन एक यह सिर्फ सपना बनकर रह गया है। नगर में स्वच्छता की स्थिति बदहाल है।