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खनिज, राजस्व, स्थानीय पुलिस व प्रशासन के गठजोड़ से जिले में खनिज कारोबारियों व माफियाओं ने चीरा है नदियों का सीना

रेत खनन से जिले की नदियों का अस्तित्व खतरे में, नियमों को रौंदकर हुआ है कारोबार, महानदी, उमराड़ व पिपही नदी में बेतहाशा खनन, गहरी खाइयों से बयां हो रही मनमानी

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कटनी

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Balmeek Pandey

Jan 02, 2026

Send mining in katni

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कटनी. जिले से होकर बहने वाली प्रमुख नदियां महानदी, उमराड़ नदी और पिपही नदी आज अपने अस्तित्व के संकट से जूझ रही हैं। ये नदियां बड़वारा, बरही सहित विजयराघवगढ़ तहसील से होकर प्रवाहित होती हैं, लेकिन इनके घाटों पर रेत निकासी के नाम पर बड़े पैमाने पर वैध और अवैध खनन किया गया है। इस अंधाधुंध खनन से नदियों का प्राकृतिक स्वरूप बुरी तरह प्रभावित हुआ है और कई स्थानों पर उनके अस्तित्व पर ही सवाल खड़े हो गए हैं।
नदी घाटों पर बनी गहरी खाइयां अवैध खनन के स्पष्ट निशान बयां कर रही हैं। नियमों को ताक पर रखकर रेत निकालने से न केवल नदी का प्रवाह बाधित हुआ है, बल्कि जलीय जीव-जंतुओं के साथ-साथ मानव जीवन के लिए भी गंभीर खतरा पैदा हो गया है। बता दें कि वर्तमान में कटनी जिले में संचालित होने वाली 49 रेत खदानों का ठेका धनलक्ष्मी प्रालि के पास है, लेकिन टेंडर सरेंडर करने व फिर से वर्कऑर्डर न मिलने के कारण खनन रुका हुआ है।

प्रकृति के दुश्मनों पर मेहरबारी

हैरानी की बात यह है कि रेत निकासी करने वाली कंपनियों द्वारा खुलेआम नियमों की अनदेखी की गई है। आरोप है कि इस पूरे खेल में खनिज विभाग, राजस्व विभाग, स्थानीय पुलिस और प्रशासन की मिलीभगत से जिले में खनिज कारोबारी और रेत माफिया नदियों का सीना चीर रहे हैं। वर्तमान में भले ही अक्टूबर माह से रेत निकासी पर रोक है, लेकिन बदस्तूर खनन होता रहा है। महानदी और उमराड़ नदी के साथ-साथ बरही क्षेत्र की जाजागढ़ स्थित पिपही नदी में भी नियमों को रौंदते हुए खनन किया गया है। वहीं ढीमरखेड़ा क्षेत्र में भी नदियों का अस्तित्व धीरे-धीरे खत्म होता नजर आ रहा है। सामाजिक कार्यकर्ता राघवेंद्र सिंह कहना है कि यदि समय रहते अवैध रेत खनन पर सख्ती नहीं की गई तो आने वाले समय में नदियां केवल नाम मात्र की रह जाएंगी। पर्यावरण प्रेमियों और ग्रामीणों ने प्रशासन से अवैध खनन पर तत्काल रोक लगाने और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है।

बरही क्षेत्र यहां मिटाया गया नदी का स्वरूप

बरही तहसील क्षेत्र में महानदी के छिंदहाई पिपरिया, बहिरघटा घाट में बेतहाशा खनन हुआ है, जहां पर न सिर्फ अवैध तरीके से रेत निकासी हुई है बल्कि मौत की खाइयां बना दी गई हैं। उमराड़ नदी में परसवारा, सुतरी, कुठिया मोहगवां में पिपही, जाजागढ़ पिपही नदी, सलैया सिहोरा में जमकर वैध और अवैध तरीके से खनन हुआ है।

बड़वारा क्षेत्र में भी मरी सी हुई महानदी

बड़वारा तहसील क्षेत्र में महानदी में रेत खनन के नम पर जीवनदायनी के अस्तित्व से खिलवाड़ हुआ है। महानदी यहां पर कई घाटों में मरी-मरी से हो गई है। क्षेत्र के सांधी घाट, गुणा देवरी घाट, मरौठी घाट, इमलिया घाट, संकरीगढ़ घाट, भदौरा नंबर एक बसाड़ी के पास घाट में, लोहरवारा-कुम्हरवारा घाट में रेत निकासी के दौरान नियम-कायदे रौंदे गए हैं, जिससे नदियों का बहाव प्रभावित करने, जमकर सुविधा अनुसार घाट बनाने से स्वरूप बदल गया है।

वर्जन

जिले में कई वर्षों से रेत का खनन हो रहा है। स्वीकृत खदानों में नियमों के अनुसार ही खनन करने की अनुमति कंपनियों की दी जाती है। अवैध खनन की सूचना पर कार्रवाई होती है। अभी जिले में अक्टूबर माह से रेत निकासी पर रोक है।

रत्नेश दीक्षित, उप संचालक खनिज।