
Mosquitoes in government offices
कटनी. स्वास्थ्य विभाग और नगर निगम के जिम्मेदार और वहां का अमला पूरे शहर के मच्छर मारने का दावा करता है। किसी के घर में लार्वा पनपने की स्थिति पर कार्रवाई की जाती है। आम लोगों को सख्त हिदायत नगर निगम से दी जाती है कि अपने घर के आसपास मच्छर के लार्वा नहीं पनपने दें लेकिन स्वास्थ्य विभाग और नगरनिगम की कथनी और करनी में जमीन-आसमान का अंतर है। दोंनों ही विभाग में जहां भी नजर दौड़ाएं, वहां लगे कूलर में मच्छरों के लार्वा पनपने का पूरा इंतजाम दिख जाएगा। पानी पूरी तरह से कब बदला गया था, किसी को नहीं पता। उसमें लार्वा नष्ट करने के लिए दवा कब डाली गई थी, पता नहीं। इससे सभी कूलर लार्वा की नर्सरी बने हुए हैं। शहर के विभिन्न क्षेत्रों में लोगों के घरों में, दुकानों, अस्पतालों और अन्य प्रतिष्ठानों में लार्वा की जांच की जाती है। जांच के दौरान गंदगी, लार्वा मिलने पर जुर्माना भी वसूला जाता है लेकिन नगर निगम कार्यालय में ही 5 से ज्यादा कूलर में पानी भरा है, उनमें लार्वा तैरते नजर आ जाएंगे। शहर में इस समय डेंगू, मलेरिया टाइफाइड जैसी बीमारियों का प्रकोप है। ऐसे में नगर निगम और स्वास्थ्य विभाग के कर्मचारी, अधिकारी खुद लापरवाही बरत रहे हैं।
नगरनिगम कार्यालय में प्रवेश करते ही जन्ममृत्यू प्रमाणपत्र शाखा की ओर जाने वाले मार्ग पर दोनों तरफ अधिकारियों के कमरों में कूलर लगे हुए हैं। इन कूलरों में पानी महीनों से जमा हुआ है। यहां मौजूद छोटे कर्मचारी बताते हैं कि गर्मी न होने के कारण अब कूलर में पानी नहीं भरा जाता है, पुराना पानी ही इसमें भरा हुआ है। कूलर में गंदगी थी और कीड़े बजबजा रहे थे। हैरानी की बात तो यह है कि एक दिन पूर्व ही यहां नगरनिगम की नई कमिश्नर ने निरीक्षण भी किया था।
जिला अस्पताल की पुरानी बिल्डिंग में भी हालात ठीक नहीं है। आमजन को जागरूकता का संदेश देने वाले विभाग व उसके डॉक्टर ही कूलरों में महीनों से जमा पानी नहीं हटवा सके हैं। अस्पताल भवन की पुराने बिल्डिंग में वार्ड की गैलरी में लगी कूलरों में पुराना पानी भरा हुआ है जो लार्वा की नर्सरी बना हुआ है। हैरानी की बात तो यह है कि अस्पताल परिसर में ही मलेरिया विभाग का कार्यालय बना हुआ है। यह विभाग भी वेक्टर जनित रोगों से बचाव के लिए अपनी जिम्मेदारी नहीं निभा रहा है।
स्वास्थ्य विभाग के मुखिया सीएमएचओ कार्यालय का भी बुरा हाल है। इस कार्यालय में प्रवेश करते ही खिडक़ी पर एक कूलर रखा हुआ है,जो सामने से होकर सीएमएचओ रोजाना गुजरते हैं। कूलर में पानी सडक़ रहा है। थोड़ा आगे बढ़ते ही हॉल में कर्मचारी बैठे हुए हैं और इन कर्मचारियों को ठंडक देने के लिए छत पर बड़ा कूलर लगाया हुआ है। इस कूलर में भरे पानी में सैकड़ों की संख्या में कीड़े बजबजाते हुए दिखे।
जानकारी के अनुसार जिले में अबतक डेंगू के चार मरीज पाए गए हैं। मलेरिया विभाग का दावा है कि मरीजों को चिन्हित करने के बाद डेंगू से बचाव के लिए लार्वा विनिष्टीकरण कराया गया है। इधर, जिले में मलेरिया मरीजों का आकड़ा अबतक 9 पहुंचा है। उल्लेखनीय है कि जिला वेक्टर जनित रोगों के लिए संवेदनशील रहा है। अधिकांश वेक्टर जनित रोगों का प्रसार मच्छर के डंक से फैलता है।
इनका कहना
वर्तमान में कूलर चालू है, जिसके चलते उन्हें खाली नहीं कराया गया है। फिर भी यदि कई दिनों से कूलर में पानी भरा हुआ है तो उसे खाली कराया जाएगा। नियमानुसार दवाओं का छिडक़ाव कराएंगे। अस्पताल में भी यदि कूलर बंद पड़े हैं और पानी जमा हुआ है तो सफाई कराने के निर्देश दिए जाएंगे।
डॉ. राज ठाकुर, सीएमएचओ
Published on:
20 Sept 2025 08:25 pm
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