18 जनवरी 2026,

रविवार

Patrika LogoSwitch to English
icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

MP election news : मध्यप्रदेश के इस जिले में बेरोजगारी हुई भयावह, आंकड़ों में खुश रहे ये विभाग

एमबीएस, इंजीनियरिंग सहित तकनीकी शिक्षा के बाद भी बेरोजगार भटक रहा युवा

3 min read
Google source verification

कटनी

image

Balmeek Pandey

Oct 30, 2018

Increased unemployment in Katni district

Increased unemployment in Katni district

कटनी. एमबीए..., इंजीनियरिंग में मास्टर डिग्री, एम कॉम, एमए सहित एक से बढ़कर एक तकनीकी शिक्षा की डिग्री...। यह सब युवाओं के झोली में है, लेकिन इतनी बड़ी शिक्षा के बाद भी जिले में बेरोजगारी की न तो तस्वीर बदली और ना ही युवाओं की तकदीर। कटनी जिले में उद्योग-धंधे और रोजगार के तनिक भी अवसर नहीं हैं। रोजगार मेला का ढिंढोरा पीटा गया, बड़े पैकेज की नौकरियां दिलाने का सब्जबाग दिखाया गया, लेकिन ढंग की नौकरी नहीं मिली। बड़े-बड़े तीन से चार रोजगार मेले हुये। कुछ युवाओं को नौकरी मिली भी तो वह चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी की। युवा आवेदन करके थक गए पर अधिकांश को लोन भी नहीं मिला। ये दर्द कटनी के उन युवाओं का है जो बेरोजगारी की मार झेल रहे हैं। कैमोर निवासी शिवम तिवारी का कहना है कि रोजगार देने के नाम पर किए गए सभी वादे थोथले साबित हुए हैं। बड़वारा निवासी अजय सिंह का कहना युवाओं को स्किल्ड बनाने भी बड़ी-बड़ी बात की गई थीं पर हकीकत ये ही है कि इस दिशा में भी प्रयास नाकाफी रहे।

मेले बने सिर्फ शोपीस

पिछले 6 महीने में तीन बड़े रोजगार मेलों का आयोजन हुआ। कैमोर, कृषि उपज मंडी पहरुआ सहित नगर निगम कम्युनिटी हाल में हर बार नामी कंपनियों के मेले में आने की बात कही गई। बताया गया कि बड़े पैकेज की नौकरी मिलेगी। एमबीए, एमटेक से लेकर पीएचडीधारी बेरोजगार भी मेले में पहुंचे। लेकिन आयोजन स्थल पर पता लगा कि ज्यादातर बड़ी कंपनियां मेले में आईं ही नहीं। रोजगार मेलों में युवाओं में से एक चौथाई को भी नौकरी नहीं मिली।

लोन का नाम, बैंक रोड़ा
बेरोजगारों को लोन मिलने की राह भी आसान नहीं है। विगढ़ क्षेत्र के विष्णुदत्त दुबे का कहना है वह खुद का व्यवसाय शुरू करने स्वरोजगार योजना के तहत कई बार आवेदन कर चुका है। हर बार बैंक वालों ने कोई न कोई बहाना बनाकर लौटा दिया। उनका कहना है सरकार बैंक गारेंटर बनने के कितने ही दावे क्यों न करे हकीकत यही है कि बैंक अभी भी भुगतान क्षमता देखकर ही लोन स्वीकृत करते हैं। आर्थिक रूप से कमजोर युवाओं को लोन मिलने की राह आसान नहीं है। सरकारी आंकड़े भी ये ही हकीकत बयां कर रहे हैं। युवा हताश और निराश है।


पुराने कोर्स से कैसे कुशल बनें युवा
स्किल इंडिया के नाम पर युवाओं को कुशल बनाने के लिए भी खास प्रयास नहीं किए गए। युवाओं को प्रशिक्षण के नाम पर केवल ठगा जा रहा है। यहां पर सिर्फ कम्प्यूटर, फिटर, इलेक्ट्रीशियन, प्लम्बर जैसे कोर्स कराए जा रहे हैं। जिससे युवाओं के भविष्य संवरने का सवाल ही नहीं बनता।

सिर्फ आंकड़ा पूरा करने तक सीमित विभाग
युवाओं को स्वरोजगार से जोडऩे और उनको पैरों पर खड़ा करने के लिए तमाम योजनाएं कागजों में चल रही हैं। जिला रोजगार विभाग के अधिकारी से लेकर उद्योग विभाग के अधिकारी पिछले 4-5 सालों में सिर्फ आंकड़ेबाजी में ही लगे रहे। शासन द्वारा जो लक्ष्य निर्धारित किये गए थे, उन प्रकरणों को ऐन केन प्रकारेण पूरा कराकर अपने कर्तव्य की इतिश्री समझ ली है। उद्योग विभाग द्वारा हर वर्ष मुठ्ठी पर केस के लक्ष्य निर्धारित किये गए हैं। जिले में रोजगार कार्यालय में हुये पंजीयन के अनुसार 52 हजार से अधिक युवा बेरोजगार हैं। वहीं जानकारों की मानें तो दो लाख से अधिक युवा पर रोजी-रोटी का संकट मंडरा रहा है। युवाओं को मुख्य धारा से जोडऩे के लिए तनिक भी प्रयास नहीं हुये हैं। आलम यह है कि युवा अब बेरोजगारी और आर्थिक तंगी के चलते निराश हो रहा है। युवाओं को रोजगार दिलाने ठोस पहल नहीं हुई।

लक्ष्य के मुताबिक हुआ है काम
एसएन पाठक, जिला उद्योग अधिकारी, कटनी का कहना है कि युवाओं को रोजगार दिलाने के हरसंभव प्रयास किए गए हैं। रोजगार मेलों के आयोजन से लेकर स्वरोजगार योजनाओं के माध्यम से बड़ी संख्या में युवाओं को लोन मिला है। रोजगार मेले के माध्यम से युवाओं को स्वरोजगारकी दिशा में बढऩे के लिए प्रेरित किया जा रहा है। पिछले तीन सालों में विभाग ने लक्ष्य के अनुसार सभी लोन के प्रकरण स्वीकृत कराएं हैं। इस वर्ष के लोन प्रकरण जल्दी स्वीकृत हों यह प्रयास है।