
हाशिए पर प्रोजेक्ट सिटी बस : तीसरी बार भी खाली गई निविदा, उपनगरीय सेवा पर संकट, चलाने को कोई तैयार नहीं, एक ने भी नहीं की भागीदारी
कटनी. शहर में तीन साल से सिटी बसें चलाने का झुनझुना नगर निगम लोगों को दिखा रहा था। इसके लिए नगर निगम ने नौ बार टेंडर बुलाए, लेकिन जानकर ताज्जुब होगा कि एक भी बस ऑपरेटर न तो शहर में बस चलाने आगे आया और ना ही निगम अधिकारी किसी को टेंडर दिला पाए। नगर निगम के अफसरों की इस बेपरवाही से सिटी बस का सपना चकनाचूर हो गया है। अब तो सिटी बस संचालन के लिए टेंडर बुलाने में नगरीय प्रशासन विभाग ने टेंडर प्रक्रिया में रोक लगा दी है। अब आगामी आदेश तक कोई भी प्रक्रिया सिटी बस के लिए नहीं हो सकेगी। बता दें कि पिछले नौ वर्षों से नगर निगम और बस ऑपरेटरों के मध्य यह सबसे बड़ी योजना उलझकर रह गई है। नौ बार की टेंडर प्रक्रिया में नगर निगम बस संचालन में फेल साबित रहा। रिटेंडर की कार्रवाई 11 सितंबर को हुई, 10 दिवस में इसमें फाइनेंशियल बिड बुलाई गई, लेकिन कोई भी ऑपरेटर आगे नहीं आया। इस योजना के लिए तीन करोड़ 60 लाख और दूसरे क्लस्टर में 3 करोड़ 44 लाख की सिटी बस योजना कागजों में ही दौड़ रही है।
खास-खास:
- सिटी बस के लिए 2018 में क्लस्टर बनाया गया था, जिसे कैंसिल कर दिया गया, इसमें 100 दिवस की अवधि में बसों का संचालन शुरू नहीं हो पाया।
- 8 जनवरी 19 को प्रथम क्लस्टर दीनदयाल कटनी सिटी बस सर्विसेज लिमिटेड के तहत लोक सेवक ट्रेवल्स जबलपुर से अनुबंध हुआ था, लेकिन बस ऑपरेटर ने रुचि नहीं दिखाई।
- तीन बार नोटिस भी जारी हुआ, ऑपरेटर ने जवाब भी नहीं दिया। इसमें दूसरा क्लस्टर जुलाई में लागू किया, फिर भी बात नहीं बनी, जबकि ऑपरेटर संजय शर्मा का तर्क था कि नगर निगम ने खबर ही नहीं दी।
- चीफ ऑपरेटिंग ऑफिसर योगेश पवार के अनुसार अब प्रदेश में जहां-जहां टेंडर रन हो गए हैं वहीं पर काम होंगे, कटनी में टेंडर नहीं करने का आदेश हुआ है।
इन-इन तारीखों में हुए टेंडर
- 01 दिसंबर 2017
- 03 जनवरी 2018
- 3 फरवरी 2018
- 15 मार्च 2018
- 24 अप्रैल 2018
- 25 जून 2018
- 11 सितंबर 2019
इनका कहना है
नगरीय प्रशासन विभाग द्वारा सिटी बस के लिए टेंडर बुलाने पर रोक लगा दी गई है। हालांकि कटनी में कोई भी बस ऑपरेटर बस चलाने के लिए आगे नहीं आए। टेंडर नहीं डाला। सिटी बस शहर में चल सकें इसके लिए विभाग से मार्गदर्शन मांगा गया है।
शैलेंद्र शुक्ला, अधीक्षण यंत्री।
सिटी बस के लिए नौ बार टेंडर हो चुके हैं। टेंडर फिर से कराया कोई भी ऑपरेटर आगे नहीं आ रहे हैं। दो बार में दो लोग आए, रुपये भी जमा किया, लेकिन वे काम नहीं शुरू किए। अब सरकार बदली है। नई सरकार की इच्छा अनुसार आगे की कार्रवाई होगी। नगर निगम के नोडल अधिकारी भी रुचि नहीं दिखा रहे।
शशांक श्रीवास्तव, महापौर।
Published on:
20 Nov 2019 12:18 pm
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