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नदी की मुश्किल डगर: पुरखों को तर्पण देने घाट तक पहुंचने में ‘जान को खतरा’

No arrangement of Ghat in Katni river

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कटनी

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Balmeek Pandey

Sep 19, 2024

No arrangement of Ghat in Katni river

No arrangement of Ghat in Katni river

जीवनदायनी के मैले व टूटे घाट खोल रहे नगर निगम द्वारा की जाने वाली व्यवस्था की पोल, सिर्फ कागजों में बन रही योजना, आजतक नाले बंद हुए और ना ही गंदगी फेंकना
गाटरघाट, मोहन घाट, मसुरहा घाट, गिरजा घाट के हालात बद् दे बद्तर, सफाई का भी नहीं इंतजाम

कटनी. गुरुवार से पितृपक्ष शुरू हो रहा है, बुधवार से ही लोगों ने तर्पण का क्रम शुरू कर दिया है। एक पखवाड़े तक लोग याने कि परीवा तिथि से लेकर अमावस्या तक पुरखों को ‘पानी’ देने के लिए लोग नदी घाटों पर जाते हैं, यहां पर पुरखों की याद में स्नान आदि करके तर्पण करते हैं, ताकि उनके पुरखों को मोक्ष की प्राप्ति हो, लेकिन मुश्किल डगर मैली जीवनदायनी के घाटों में पुरखों को मोक्ष देना लोगों के लिए किसी चुनौती से कम नहीं है। कटनी नदी के घाट एकदम मैले हैं, हालात ऐसे हैं कि यहां के पानी से लोग आचमन तक नहीं कर सकते। एक तो बारिश के कारण नदी का जल स्तर बढ़ा हुआ है। यह भयंकर स्थिति कटनी नदी के गाटरघाट से लेकर नई बस्ती के आगे तक बने हुए हैं। इसकी मुख्य वजह यह है कि शहर के 80 फीसदी लोगों का कंठ तर करने वाली नदी का दामन यहां पर एकदम मैला है। नदी में शहर का गंदे नाले मिल रहे हैं। लोग घाटों पर पूजन सामग्री से लेकर अन्य कचरा फैला रहे हैं। नगर निगम द्वारा घाटों को भी व्यवस्थित नहीं कराया गया। घाट का समय पर निर्माण न कराया जाना, सुरक्षा के इंतजाम न करना है। लोग पितरों को यहां पहुंचकर आसानी से तर्पण कर सकें, ऐसे कोई इंतजाम नहीं किए हैं।

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चारों घाटों के हालत खराब
शहर के चारों नदी घाटों के हालात खराब हैं। कटनी नदी के गाटरघाट में कोई व्यवस्था नहीं है। मसुरहा घाट में घाट बचा है, लेकिन यहां पर सुरक्षा नहीं है। मोहनघाट व गिरजाघाट के हाल बेहाल हैं। यहां पर कोई भी ऐसा घाट नहीं हैं, जो पर लोग नदी के पानी से आचमन कर सकें।

जिम्मेदारों को नहीं सरोकार
इन घाटों की सफाई के लिए जिम्मेदार जनप्रतिििधयों व नगर निगम के अधिकारियों को कोई सरोकार नहीं हैं। सिर्फ स्वच्छता सर्वेक्षण के समय घाटों की सफाई करा दी जाती है, शेष समय यहां पर स्वच्छता दूत व अधिकारी झांकने तक नहीं जाते। इसके अलावा नदी के सौंदर्यीकरण की योजना सिर्फ कागजों में बनकर रह गई है।

रिवर फ्रंट योजना कागजों में
2017 से कटायेघाट से लेगर गाटरघाट तक नदी रिवर फ्रंट योजना बनी थी। दो योजनाओं पर एक लगभग 6 करोड़ रुपए तो दूसरी लगभग 3 करोड़ रुपए की योजना को स्वीकृति मिली है। रिवर फ्रंट योजना का समय पर काम नहीं हो पाया। नगर निगम द्वारा सिर्फ घाट खोद दिया गया है, लोगों के उपयोग लायक तक नहीं बनाया गया।