
Not getting written permission to break Katni river bridge
कटनी. कटनी नदी पर धसके हुए पुल को तोडऩे में लिखित अनुमति के फेर में काम अटक गया है। इसमें सेतु निगम की गंभीर बेपरवाही सामने आई है। तीन माह बाद भी पुल को तोडऩे का आदेश नहीं हुआ। बता दें कि कार्यपालन यंत्री सेतु निगम पीएस परिहार, ठेकेदार रामसज्जन शुक्ला ने तीन माह पहले कटनी नदी पर निर्माणाधीन पुल के धसके स्लैब को तोडऩे के लिए भोपाल मुख्यालय से अनुमति मांगी है। लेकिन तीन माह बाद भी अधीक्षण यंत्री, चीफ इंजीनियर, इएनसी ने अनुमति नहीं दी। तीन माह में तीन बार पत्राचार हुआ है, लेकिन कोई जवाब नहीं आया। इइ व ठेकेदार का कहना है कि चीफ इंजीनियर एआर सिंह मौखिक तौर पर सिर्फ यही कह रहे हैं कि ठेकेदार ने पुल बनाया है, वह टूटा है, इसलिए आप अपने हिसाब से तोडि़ए। ठेकेदार का तर्क है कि सेतु निगम विभाग की सतत निगरानी में काम हुआ। डिजाइन भी चेक की गई। बॉटम, बीम, डेक्स स्लैब अधिकारियों की उपस्थिति में बना। इसके बाद भी हादसा हुआ। पुल को तोडऩे के लिए मौलाना आजाद कॉलेज से एक्सपर्ट की रिपोर्ट भी मांग गई है कि कैसे तोड़ा जाए, लेकिन वह भी नहीं मिली। उल्लेखनीय है कि पुराना पुल अत्यंत जर्जर व कमजोर है। मिशन चौक फ्लाइओवर बन जाने से हैवी ट्रैफिक बढ़ जाएगा, ऐसे में पुराने पुल की सांमत आ जाएगी। इसके बाद भी जिम्मेदार अधिकारी व जनप्रतिनिधि ध्यान नहीं दे रहे। पुल तोडऩे में ब्लास्टिंग की जाएगी इससे पुराने पुल को खतरा होगा। इसके अलावा आसपास की बस्ती को भी खाली कराना सबसे बड़ी चुनौती है।
यह है मामला
24 जुलाई को कटनी नदी 4 करोड़ रुपये से अधिक का निर्माणाधीन एक हिस्से का पुल तेज धमाके के बाद धंसक गया। इससे हड़कंप की स्थिति बन गई थी। इसके बाद लोक निर्माण विभाग मंत्री सज्जन सिंह वर्मा ने तत्काल सेतु निगम के चार अधिकारियों को निलंबित कर जांच बैठाई। 27 जुलाई को मुख्य अभियंता भोपाल एआर सिंह के नेतृत्व में जांच हुई। जांच रिपोर्ट आई, जिसमें ठेकेदार और तत्कालीन सेतु निगम के इंजीनियों की बेपरवाही सामने आई। बता दें कि नदी में 2008 से पुल निर्माणाधीन है और अबतक एक हिस्से का भी काम पूरा नहीं हुआ था और बड़ा हादसा हो गया।
लोहे व स्टील का पुल बनाने तैयारी
धसके हुए पुल को तोडऩे के लिए विभाग पहल नहीं कर रहा, लेकिन दूसरी ओर नए पुल बनाने के लिए भी संभावनाएं तलाश रहा है। पुराने पुल को तोडऩे और नए पुल के टेंडर की भी कोई प्रक्रिया नहीं की गई। अधिकारी यह रणनीति बना रहे हैं कि किसी विदेशी कंपनी से संपर्क कर बहुत कम समय में स्टील व लोहे का ब्रिज तैयार करा दिया जाए, ताकि समस्या का शीघ्र समाधान हो सके।
खास-खास:
- 2009 से शुरू हुआ था कटनी नदी नवीन पुल का निर्माण, एक साल में तैयार किया जाना था धनुषाकार पुल, पहले ड्राइंग डिजायन बदलने व भूमि अधिग्रहण में अटका रहा काम।
- 2017 में फिर से शुरू हुआ था काम, तीन साल से ठेकेदार ने बंद कर दिया किया था काम, 45-45 मीटर की दूरी में दो पिलर में तैयार हो रहा था पुल, दो स्लैब बनाकर पुल का चल रहा था काम, तभी हो गया हादसा।
- पुल निर्माण में छह करोड़ रुपये से अधिक खर्च हो रहे हैं, अभी तक सेतु निगम ठेकेदार को 4 करोड़ 25 लाख रुपये का कर चुका है भुगतान, देरी पर नहीं हुई जुर्माने की कार्रवाई।
इनका कहना है
विभागीय अधिकारी पुल को तोडऩे लिखित अनुमति नहीं दे रहे हैं। मौखिक बातें कहकर कार्रवाई करने की बात करते हैं। पुल को तोडऩा बड़ा रिस्की है। ठेकेदार भी पुल को तोडऩे आगे नहीं आ रहे। लिखित में आदेश मांग रहे हैं। बीच का रास्ता निकालने पहल की जाएगी।
पीएस परिहार, कार्यपालन यंत्री, मप्र सेतु निगम।
Published on:
14 Jan 2020 11:45 am
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