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बिटिया@work: बेटी को ऑफिस लाकर एसडीएम बताएंगे कैसे करते हैं सुनवाई, दूर करते हैं लोगों की समस्या, बिजनेसमैन भी नहीं रहेंगे पीछे, देखें वीडियो

23 सितंबर को दफ्तर लाकर बेटियों को कामकाज से अवगत कराएंगे प्रशासनिक अधिकारी, बिजनेसमैन, व्यापारी अन्य
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कटनी

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Balmeek Pandey

Sep 23, 2018

patrika's initiatives Bitiyawork in katni

patrika's initiatives Bitiyawork in katni

कटनी. बिन बेटी ये मन बेकल है, बेटी है तो ही कल है, बेटी से संसार सुनहरा, बिन बेटी क्या पाओगे?, बेटी नयनों की ज्योति है, सपनों की अंतरज्योति है, शक्तिस्वरूपा बिन किस देहरी-द्वारे दीप जलाओगे?, शांति-क्रांति-समृद्धि-वृद्धि-श्री सिद्धि सभी कुछ है उनसे, उनसे नजर चुराओगे तो किसका मान बढ़ाओगे?..., भोर की उजास है बिटिया, प्रभात की पहली किरण है बिटिया, सफलता का हर क्षण है बिटिया, जीवन का सार है बिटिया, खुशियों का संसार है बिटिया। हमारा घर बेटियों से रोशन है...। अब एक कदम और आगे बढ़ाएं और इस बार 23 सितंबर को बेटियों के दिन को सार्थक बनाएं। पत्रिका के अभियान 'बिटिया ञ्च वर्क' के साथ जुड़कर अपने जीवन की अमूल्य निधि अपनी बिटिया को मौका दें, आपके संसार को समझने का। बेटियों को और भी सशक्त बनाने के लिए पत्रिका का यह अभियान वाकई सराहनीय है। मैं भी इस अभियान से जुड़कर बेटी को ऑफिस लेकर आऊंगा और बेटी को अपने काम काज से अवगत कराऊंगा। यह बातें एडीएम धर्मेंद्र मिश्रा ने कहीं। उन्होंने शहर के लोगों से भी अपील की है कि इस खास दिन अभियान के साथ कदम से कदम मिलाते हुए लोग अपने कार्यस्थल पर बेटी को जरूर लाएं। यह कार्यस्थल आपका दफ्तर, खेत-खलिहान, व्यापारिक प्रतिष्ठान, कारखाना, दुकान कोई भी हो सकता है। बेटी को इस कर्मक्षेत्र से परिचित कराएं। आपके काम का मर्म समझाएं, आपकी सीट पर बैठाएं और आपकी तरह ही काम करने का मौका दें, ताकि वह और सशक्त हो सके।

हर व्यक्ति को बनना चाहिये साक्षी
धर्मेंद्र मिश्रा ने कहा कि यह अभियान बहुत ही अच्छा है। साल में यह एक बार होता है, इसके हर माह करना चाहिए, ताकि पाठकों की भावना बदले। बेटिया ऑफिस पहुंचकर काम-काज जानेंगे। पापा साफ-सफाई से रहते या गंदगी से। ऑफिस में व्यवहार कैसा है। क्या काम करते हैं। कैसे-कैसे लोग उनके पास आते हैं। पब्लिक डीलिंग वाले स्थान पर यह अभियान काफी सकारात्मक सिद्ध होगा। सभी लोग इस अभियान से जुड़ें। बेटिया ज्यादा संवेदनशील होती है, इसका अच्छा प्रभाव पड़ेगा। एसडीएम ने कहा कि उनकी बेटी कक्षा 11वीं में पढ़ती है। ऑफिस लाकर बेटी को बताएंगे कि कैसे वे प्रशासनिक सेवा को संभाल रहे हैं। कैसे लोगों की मदद करते हैं, समस्याओं का समाधान करते हैं। लोगों की हमसे क्या अपेक्षाएं होती हैं।

बेटियों को मिलेगा बराबरी का दर्जा
हरजीत सिंह खुराना ने कहा कि इस अभियान से बेटिया का उत्साह बढ़ेगा और नई ऊर्जा का संचार होगा। इस अभियान से बेटियों का मनोबल बढ़ेगा और बेटिया सशक्त होंगे। सभी को इसमें आगे आना चाहिये ताकि बेटिया और भी समाज का नाम रोशन कर सकें। उन्होंने कहा खास दिन का यह अनुभव आपकी बिटिया को नई ऊंचाई देगा और आपके स्नेह की मिठास को और बढ़ा देगा। शहर के प्रबुद्ध नागरिकों, कॉरपोरेट हस्तियों, किसानों-कारोबारियों, अफसरों-कर्मचारियों, समाजसेवियों समेत सभी वर्ग पत्रिका के इस अभियान से जुड़कर अपनी बेटियों को अपने कार्यस्थल पर लाने का संकल्प लें। इससे बेटियों को मान, सम्मान और बराबरी का दर्जा मिले, उनकी देखभाल अपेक्षित तरीके से हो, इस ओर ध्यान आकृष्ट करने के लिए पत्रिका ने अवधारणा दी है। इस विशिष्ट अभियान को समाज के हर तबके में अच्छा प्रतिसाद मिलेगा।