
RS Five Hundred Fine For Mosquito In Sikar Rajasthan
कटनी. शहर में सात डिग्री तापमान पर भी मच्छर डंक मार रहे हैं। आमतौर पर तापमान घटने व बढऩे पर मच्छरों की संख्या कम हो जाती है, लेकिन इस बार पारे में गिरावट के बाद भी मच्छरों से राहत नहीं है। निचली बस्तियों से लेकर पॉश इलाकों तक में शाम होते ही घरों में मच्छर मंडराने लगते है। जानकारों का कहना है कि शहर में सीवर लाइन के अधूरे निर्माण के कारण समस्या हो रही है। जगह-जगह सीवर के अधूरे काम और कचरा संग्रहण सही तरीके से नहीं होने के कारण मच्छरों का प्रकोप कड़ाके की ठंड में भी कम नहीं हुआ। गंदगी के बीच मच्छरों के तेजी से पनपने का क्रम जारी है। ये मच्छर खुले में ठंड अधिक होने के कारण ठिकाना बदल रहे हैं। अनुकूल तापमान की तलाश में घरों में प्रवेश कर रहे है।
निगम की मनमानी का खामियाजा
शहर में अधूरे सीवर का काम लोगों के लिए सिरदर्द बन गया है। लम्बे अरसे बाद भी प्रोजेक्ट पूरा नहीं होने से गंदे नाली की निकासी समस्या बनी हुई है। ठंड के दिन में जब पारा आठ डिग्री से नीचे जाता है, तो मच्छर का प्रकोप कम हो जाता है, लेकिन नाले जगह-जगह अधूरे होने और मलबों के कारण गंदा पानी जमा हुआ है। इससे जुड़ी नालियों में भी कई जगह चोक है। जहां मच्छर प्रजनन कर रहे हैं। गंदगी के कारण अधिक मच्छर पैदा हो रहे हैं।
बैठना-सोना किया मुश्किल
मौसम के कारण फिलहाल मलेरिया, डेंगू फैलाने वाले मच्छरों का गम्भीर खतरा नहीं है। ठंड में जन्म ले रहे ये मच्छर अंधेरा होते ही सक्रिय हो जाते हैं। इनके सम्पर्क में आने पर बच्चे बीमार पड़ रहे हैं।
पॉश एरिया में भी परेशानी
ठंड में मच्छर का असर केवल मलीन और दूर की बस्तियों तक सीमित नहीं है। इससे सर्वाधिक पीडि़त पॉश एरिया के लोग है। सिविल लाइन, दुबे कॉलोनी, गुरुनानक वार्ड, नई बस्ती, आदर्श कॉलोनी, सुभाष चौक क्षेत्र की कॉलोनियों में भी इस मौसम में भारी संख्या में मच्छर हैं। पॉश इलाके में अपार्टमेंट रहने वाले लोग चौथी मंजिल तक मच्छरों का डंक झेल रहे हैं।
अगरबत्ती, रिपलेंट फेल
मच्छरों को भगाने के लिए जलाई जाने वाली अगरबत्ती, रिपलेंट का असर नहीं हो रहा है। जानकारों की मानें तो मच्छरों को भगाने के लिए इस्तेमाल की जाने वाली वस्तुओं के बीच में ही उनका जन्म होने से, इनकी प्रतिरोधक क्षमता बढ़ गई है।
ये करें उपाय
- घर के आसपास सफाई रखें। पानी जमा न होने दें।
- नालियां गंदी होने पर उसमें मिट्टी तेल, कीटनाशक छिड़कें।
ध्यान रखने वाली बातें
- प्रदेश में मच्छर का प्रजनन काल 12 महीने है।
- शून्य डिग्री सेल्सियस तापमान पर ही मच्छर मरते हैं।
- 10 डिग्री और उससे अधिक तापमान में रहते हैं।
- 07 डिग्री से कम तापमान होने के कारण खुली जगह छोड़ रहे।
- घरों के अंदर तापमान अपेक्षाकृत अधिक होता है, इसलिए प्रवेश कर रहे।
- कई रोगों के संवाहक होते हैं। इसलिए बचाव जरूरी है।
- सर्दियों में अधिक जीवन के लिए सब्जी भंडार, खाली बिल्ंिडग में भी जाते है।
इन वजहों से भी बढ़ रहा हमला
- मच्छरों को मारने की दवा का छिड़काव नियमित नहीं होता।
- निगम की मच्छर फॉगिंग मशीन फिर से गायब हो गई है।
- मच्छर भगाने के रिपलेंट, अगरबस्ती के बीच जन्म होने से, ये असरकारक साबित हो रहे है।
- खाली गड्ढों और गंदी टंकियों में पानी ठहरा और जमा रहने से।
इनका कहना है
मच्छर अभी कम हैं। पिछले वर्ष की तुलना में इस बार मच्छरों का प्रकोप कम रहा है। मलेरिया के भी मरीज कम आए हं। मच्छर मारने के लिए दवा का छिड़काव भी कराया जा रहा है। लोगों को मच्छरदानी लगाने, नीम का धुआ करने, घरों के आसपास पानी न जमा होने देने की सलाह भी दी जा रही है।
शालिनी नामदेव, जिला मलेरिया अधिकारी, स्वास्थ्य विभाग।
मच्छरों का प्रकोप कम करने के लिए वार्डों में विशेष सफाई अभियान चल रहा है। सीवर लाइन का काम भी प्रगति पर है। मच्छर से लोगों को बचाने के लिए दवा का भी छिड़काव करा रहे हैं। जरुरत के अनुसार और पहल की जाएगी, ताकि लोगों को परेशानी न हो।
टीएस कुमरे, आयुक्त नगर निगम।
Updated on:
12 Jan 2019 04:47 pm
Published on:
12 Jan 2019 04:46 pm
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