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स्पर्श न कोई दवा फिर भी जटिल बीमारी ठीक करने का दावा, देखें वीडियो

गौतम बुद्ध के जमाने की रेकी पद्धति को सीखा, छोटी सी उम्र में बनाया वल्र्ड रिकॉर्ड° साउथ आफ्रिका में पूरा किया सेशन, वल्र्ड का दूसरा रेकी हॉस्पिटल मध्यप्रदेश में खोलने की जताई इच्छा, समाज के लिए कुछ करने बढ़ाया हाथ

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कटनी

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Balmeek Pandey

Aug 06, 2021

स्पर्श न कोई दवा फिर भी जटिल बीमारी ठीक करने का दावा, देखें वीडियो

स्पर्श न कोई दवा फिर भी जटिल बीमारी ठीक करने का दावा, देखें वीडियो

कटनी. गौतम बुद्ध के जमाने में प्रचलित उपचार की विधि रेकी पद्धति को दोबारा जीवन दान देने शहर के एक नवयुवक ने न सिर्फ कारगर प्रयास शुरू किए हैं, बल्कि वल्र्ड रिकॉर्ड भी अपने नाम किया है। हम बात कर रहे हैं गांधीगंज निवासी आयुष गुप्ता की। पत्रकार वार्ता कर रेकी के बारे में जानकारी साझा करते हुए बताया कि यह बहुत पुरानी पद्धति है। जो गौतम बुद्ध के जमाने में बेहद प्रचलित थी। उस वक्त स्पर्श के जरिए लोगों का इलाज किया जाता था, लेकिन वक्त के साथ यह पद्धति और ज्यादा एडवांस हो गई है। अब लोगों को रेकी के जरिए बिना स्पर्श किए हैं ठीक किया जा सकता है। उन्होंने बताया कि कोविड-19 सेकंड वेब के दरमियान ढाई सौ से ज्यादा मरीजों को बिना छुए रेकी के जरिए ठीक कर चुके हैं। उन्होंने बताया है कि पूरे दुनिया में रहकर के जरिए इलाज करने के लिए सिर्फ एक ही अस्पताल है और दूसरा अस्पताल में भारत में बनाने की तैयारी कर रहे हैं।
उन्होंने इसके लिए पूरे हिंदुस्तान में अपनी टीम भी गठित करना शुरू कर दी है, ताकि लोगों का इलाज हर क्षेत्र में किया जा सके। उन्होंने बताया कि कटनी से उनका विशेष लगाव है लिहाजा वे कटनी के लिए भी एक स्पेशल प्लान बना रहे हैं। कटनी में भी रेकी अस्पताल खोलने की तैयारी की जाएगी। उन्होंने बताया कि ऐसी कई असाध्य बीमारियां हैं जिनका इलाज आज मुमकिन नहीं है, लेकिन रेकी के जरिए उनमें भी राहत की संभावनाएं नजर आती हैं। यही वजह है कि उन्होंने रेकी को प्राथमिकता दी है। आयुष गुप्ता ने इसको लेकर 3 किताबें भी लिखी हैं।

ये बनाए रिकॉर्ड
बता दें कि छोटी सी उम्र में आयुष को यंगस्टर रेकी हीलर इन द वल्र्ड (वल्र्ड रिकॉड इंडिया) 2020 मिला है, जिसे फिल्म अभिनेता अमिताभ बच्चन ने दिया है। दूसरा यंगेस्ट टेरोकॉर्ड रीडर इन इन इंडिया एवॉर्ड 2020 भी इनके नाम है। साथ ही हॉवल्र्ड वल्र्ड रिकॉर्ड वल्र्ड यंगेस्ट निम्रोलॉजिस्ट 2021 मिला है। बता दें कि मुंबई में बीए साइकोलॉजी की पढ़ाई करने वाले आयुष ने पुणे में रेकी के दो सेशन और तीन शेषन साउथ आफ्रिका से सीखे हैं। पिता काशीप्रसाद गुप्ता की प्रेरणा से आगेे बढ़ रहे हैं। मां सुषमा गुप्ता के बीमार होने पर इस विधि को जाना और उन्हें ठीक करने पद्धति अपनाई, सफलता मिली और अब इस विधि में परिपक्व होकर देश के लिए कुछ करने ठाना है। देवांक शुक्ला नागपुर से विधि सीखी है।


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