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रेलवे और ठेका कंपनी के बीच खींचतान, यात्रियों का किया जा रहा बड़ा नुकसान

Retiring room closed in Katni Junction

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कटनी

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Balmeek Pandey

Dec 09, 2024

Retiring room closed in Katni Junction

यात्रियों की सुविधा 10 फरवरी से ताले में कैद, कटनी जंक्शन का रिटायरिंग रूम का नहीं मिल रहा लाभ, अफसर नहीं दे रहे ध्यान

कटनी. कटनी जंक्शन जो भारतीय रेलवे के प्रमुख स्टेशनों में से एक है, यहां का रिटायरिंग रूम 10 फरवरी से बंद है। रेलवे ने यात्रियों को ठहरने की सस्ती और सुलभ सुविधा देने के लिए यह रूम बनाया था। इस सुविधा का संचालन आइआरसीटीसी के माध्यम से नम: इंटरप्राइजेज, सतना को सौंपा गया, लेकिन 10 महीने से अधिक समय से यह सुविधा पूरी तरह बंद है। ठेका कंपनी द्वारा बार-बार कमियों का हवाला देकर संचालन शुरू करने में देरी की जा रही है, जिससे यात्री और रेलवे दोनों को नुकसान हो रहा है। रिटायरिंग रूम बंद होने से यात्री सुविधाओं पर बड़ा असर पड़ा है। महंगे होटलों में ठहरने की मजबूरी, रेलवे के राजस्व का नुकसान, और अधिकारियों की उदासीनता जैसे मुद्दे यात्रियों को नाराज कर रहे हैं। रेलवे को शीघ्र समाधान के साथ इस सुविधा को पुन: चालू करना चाहिए।

यात्रियों की परेशानियां
रिटायरिंग रूम बंद होने के कारण यात्रियों को होटल में रुकने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है। पहले रेलवे के रिटायरिंग रूम में डोरमेट्री 75 रुपये प्रति 24 घंटे, नॉन एसी रूम 480 रुपये प्रति 24 घंटे, एसी रूम 800 रुपये प्रति 24 घंटे मिल जाते थे। इस सस्ती सुविधा के अभाव में यात्रियों को अब 1000 से 2000 रुपए तक के होटल खर्च का सामना करना पड़ रहा है। खासकर, उन यात्रियों को अधिक परेशानी हो रही है, जो परिवार सहित यात्रा करते हैं या जिन्हें ट्रेन बदलने के लिए लंबे समय तक स्टेशन पर रुकना पड़ता है।

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ठेका कंपनी और रेलवे के बीच गतिरोध
रेलवे ने इस रिटायरिंग रूम का ठेका नम: इंटरप्राइजेज को दिया है। कंपनी ने पिछले 10 महीनों में चार बार रिटायरिंग रूम का निरीक्षण किया, लेकिन हर बार कमी का हवाला देकर संचालन शुरू करने में टालमटोल करती रही। रेलवे अधिकारियों का कहना है कि सभी जरूरी सुधार किए जा चुके हैं और रिटायरिंग रूम को चालू करने के लिए तैयार है। फिर भी कंपनी बार-बार नए सुधारों की मांग कर रही है। यात्रियों को सस्ती सुविधाओं के अभाव में महंगे होटलों में रुकने की मजबूरी है।

राजस्व पर असर
कटनी जंक्शन पर प्रतिदिन 100 जोड़ी ट्रेनों का ठहराव होता है, और लगभग 17 हजार यात्री यहां से यात्रा करते हैं। रेलवे को इस स्टेशन से हर माह 4-5 करोड़ रुपए का राजस्व प्राप्त होता है। रिटायरिंग रूम से मिलने वाला राजस्व पिछले 10 महीनों से पूरी तरह बंद है। यह स्थिति रेलवे के आर्थिक नुकसान का कारण बन रही है। साथ ही, यात्रियों के बीच रेलवे की छवि पर भी नकारात्मक प्रभाव पड़ रहा है।

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जिम्मेदारों की भूमिका पर सवाल
रिटायरिंग रूम जैसी महत्वपूर्ण सुविधा के कई महीने से बंद होने पर भी रेलवे के अधिकारियों ने इसे गंभीरता से नहीं लिया। न तो कोई ठोस कदम उठाए गए। जनप्रतिनिधियों ने इस विषय पर ध्यान दिया। यात्रियों का कहना है कि इस समस्या को सुलझाने के लिए कोई भी सक्रिय प्रयास नहीं किए जा रहे हैं। रेलवे अधिकारियों के मुताबिक रिटायरिंग रूम को आइआरसीटीसी के माध्यम से नम: इंटरप्राइजेज को सौंपने के लिए तैयार किया गया है। चार बार निरीक्षण किया गया, और हर बार ठेका कंपनी ने कमियां बताईं। यात्रियों की मांग है कि रेलवे तत्काल रिटायरिंग रूम को चालू करें, ठेका कंपनी के साथ अनुबंध को रद्द कर नई व्यवस्था लागू की जाए। भविष्य में ऐसी देरी को रोकने के लिए ठोस कदम उठाए जाएं।

वर्जन
यह बात सही है कि रिटायरिंग रूम 10 माह से बंद है। इसे आइआरसीटीसी के पास जाना है। अपग्रेड होकर सौंपा जाना था। इसका निरीक्षण भी करा लिया गया है। रेलवे की तरफ से सभी काम करा दिए गए हैं। ठेका कंपनी द्वारा चालू न करने पर रेलवे द्वारा ही शीघ्र चालू किया जाएगा। कुछ तकनीकी कारणों के चलते रिटायरिंग रूम बंद है। शीघ्र यात्रियों के लिए सुविधा शुरू की जाएगी।
मधुर वर्मा, सीनियर डीसीएम रेलवे।