
कटनी. सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र बहोरीबंद में पदस्थ रहीं एक एएनएम के साथ बड़ी धोखाधड़ी का मामला सामने आया है। सेवानिवृत्त होने के बाद मिलने वाली ग्रेच्यूटी और जीपीएफ के 17.36 लाख रुपए हड़प लिए गए हैं। हैरानी की बात तो यह है कि 2016 से सेवानिवृत्त होने के बाद वृद्ध महिला को स्वास्थ्य विभाग के दो कर्मचारी 9 वर्षों से गुमराह करते रहे। जब पीडि़ता ने जनसुनवाई में शिकायत की तो पता चला कि राशि तो खोले गए फर्जी खाते में जारी हो चुकी है।
जानकारी के अनुसार सावित्री देवी वर्मा पति जगदीश प्रसाद वर्मा (72) सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र बहोरीबंद अंतर्गत आने वाले प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में बतौर एएनएम पदस्थी थीं। 31 अगस्त 2016 को सेवानिवृत्त हो गईं थीं। सावित्री वर्मा को ग्रेच्यूटी और जीपीएफ के 17 लाख 36 हजार 399 रुपए के मिलने थे। इस संबंध में तत्कालीन सीएमएचओ अशोक चौदहा के द्वारा एक साथ 22 सेवानिवृत्त होने वाले कर्मचारियों की राशि जारी करने के आदेश किए थे।
जीपीएम की राशि पाने के लिए नौ साल से सेवानिवृत्त महिला बैंक व सीएमएचओ कार्यालय के चक्कर काटती रही। विभाग के अधिकारी-कर्मचारी महिला को गुमराह करते रहे कि शीघ्र ही राशि जारी हो जाएगी। कोषालय अधिकारी को 1 मई 2025 को तत्कालीन सीएमएचओ द्वारा लिखे गए पत्र में कहा गया कि 10 फरवरी 2021 को एक्सिस बैंक के खाता क्रमांक 920010062298506 में भुगतान किया जा चुका है।
इधर सेवानिवृत्त वृद्ध महिला आयेदिन अपने पेंशन व सैलरी खाते वाले बैंक भारतीय स्टेट बैंक बाकल में जाकर खाता चैक करती थीं। इस बैंक के खाता क्रमांक 11518036041 में जीपीएफ आदि की राशि नहीं आ रही थी। लगातार स्टेटमेंट निकलवाकर चेक कराती रहीं। स्वास्थ्य विभाग के लिपिक व अधिकारियों को हकीकत बताती रहीं, लेकिन सिवाय आश्वासन और गुमराह करने के कोई काम नहीं किया गया।
सीएमएचओ कार्यालय से सावित्री वर्मा को बताया गया था कि उनकी जीपीएफ की राशि एक्सिस बैंक के खाते में 10 फरवरी 2021 को जारी की जा चुकी है, तो महिला ने परिजनों के साथ सीएमएचओ कार्यालय में 4 नवंबर को जाकर बताया कि एक्सिस बैंक में मेरा अकाउंट नहीं है और ना ही मेरे खाते में अबतक राशि आई। जब इस पूरे मामले की परतें खुली तो स्वास्थ्य विभाग में बड़ी गड़बड़ी का भंडाफोड़ हुआ।
इस पूरे मामले में यह बात सामने आई है कि स्वास्थ्य विभाग के दो कर्मचारियों ने सावित्री वर्मा का एक्सिस बैंक में फर्जी तरीके से खाता खुलवाकर सैलरी व पेंशन खाते से अलग जाकर उसमें राशि डाल दी गई और 17.36 लाख रुपए नकद, एटीएम व चेक के माध्यम से गबन कर लिए गए। सबसे पहले 500 रुपए एसबीआई के मेन ब्रांच के एटीएम से 500 रुपए निकालकर चेक किया गया और फिर 144 बार एटीएम आदि का प्रयोग कर 17.36 लाख रुपए निकालकर हड़प लिए गए। बताया जा रहा है कि अन्य कर्मचारियों की राशि भी डाली गई है। लाखों रुपए का फर्जीवाड़ा किया गया है।
हैरानी की बात तो यह है कि दो माह से मामला अधिकारियों के संज्ञान में है और अबतक सेवानिवृत्त महिला को राशि नहीं मिली है और ना ही फर्जीवाड़ा करने वाले कर्मचारियों पर कोई आंच आई है। इस मामल में स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी कर्मचारियों पर कार्रवाई करने की बजाय बचाने में जुटे हैं। बता दें इस पूरी खेल में लिपिक व एक संविदा कर्मचारी की भूमिका है। राहुल मिश्रा का कहना है कि गलती हो गई है, इसे ठीक कराया जा रहा है।
बुढ़ापे में जीपीएफ व ग्रेच्यूटी आदि की राशि जीवन यापन का सहारा होती है, लेकिन महिला के साथ हुई धोखाधड़ी ने गहरा आघात पहुंचाया है। महिला इन दिनों लकवा जैसी गंभीर बीमारी से ग्रसित हैं। कई माह से व्हीलचेयर पर आ गई हैं। एक माह से बेटी-बहु व परिजन एंबुलेंस से जिला मुख्यालय लेकर पहुंच रहे हैं, लेकिन कोई समाधान नहीं हो रहा है। लाचार महिला न्याय की आस में भटक रही है। अफसरों के ना सुनने और गलती पर पर्दा डालने की प्रथा सिस्टम पर भारी पड़ रही है।
मामला संज्ञान में आया है। इस पूरे मामले में विभाग के ही कुछ कर्मचारियों की संलिप्तता सामने आई है। प्रथम दृष्टया सेवानिवृत्त एएनएम को जीपीएफ की राशि मिले यह व्यवस्था सुनिश्चित की जा रही है। इस पूरे प्रकरण की जांच कराते हुए दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
Published on:
28 Dec 2025 03:26 pm
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