आदिम जाति कल्याण विभाग के छात्रावासों का हाल... विभाग व शिक्षा विभाग सहित जिले के अफसरों ने नहीं दिया ध्यान, कलेक्टर के निर्देश के बाद मात्र 22 बच्चों को ही मिला प्रवेश
कटनी. जिले में आदिम जाति कल्याण विभाग के माध्यम से 58 छात्रावासों का संचालन हो रहा है। सरकार द्वारा गरीब, जरुरतमंद बच्चों के लिए यह सुविधा शुरू की गई है ताकि बच्चे घर से स्कूल दूर होने पर व व्यवस्थाएं न होने पर छात्रावास में रहकर भविष्य को संवार सकें। आपको जानकार ताज्जबू होगा कि इन छात्रावासों में लगभग आधी सीटें खाली हैं। आदिम जाति कल्याण विभाग के अधिकारी, शिक्षा विभाग के अधिकारी व जिला प्रशासन के अधिकारी दाखिला नहीं दिला पाए हैं। बच्चों को सुविधा का लाभ मिले, इसके लिए सार्थक पहल नहीं की गई।
जानकारी के अनुसार जिले में संचालित छात्रावासों में 4100 सीटें हैं। इनके विरुद्ध जिले में मात्र 2473 बच्चों ने ही दाखिला लिया है। 1627 सीटें अभी भी खाली पड़ी हैं और शैक्षणिक सत्र कुछ ही माह का बचा है। छात्रावासों में आधे बच्चे अव्यवस्थाओं के कारण नहीं ठहर रहे। पिछले हफ्ते जेडी द्वारा किए गए औचक निरीक्षण के बाद हकीकत सामने आ चुकी है। बच्चे कलेक्टर के पास भी समस्याओं को लेकर पहुंच रहे हैं।
- 550 सीटर उत्कृष्ट छात्रावास में सिर्फ भरी गईं 421 सीटें
- 650 सीनियर छात्रावास में से 463 बच्चो को ही मिला प्रवेश
- 1085 सीटर के 9 से 12 छात्रावासों में 590 को ही मिला प्रवेश
- 1615 आश्रम छात्रावास की सीट में सिर्फ 831 बच्चे ही पहुंचे
कलेक्टर के फरमान के बाद की हकीकत
24 नवंबर को कलेक्टर द्वारा जिला शिक्षा अधिकारी को पत्र लिखकर कहा गया था कि अजा, अजजा, आश्रमों में सीट के हिसाब से प्रवेश दिलाएं। इसके बाद मात्र 22 बच्चों को ही प्रवेश दिलाया गया है। बच्चों को प्रवेश दिलाकर एमटी टास पोर्टल पर प्रोफाइल रजिस्ट्रेशन कराना था, ताकि छात्र ऑनबोर्ड हो सके, लेकिन इसमें गंभीरता से ध्यान नहीं दिया गया। गौरतलब है कि ऑनबोर्ड करने की प्रक्रिया में भी पोर्टल में तकनीकी खामी के कारण समस्या हो रही है।
इन छात्रावासों में 30 से भी कम संख्या
जिले के कई ऐसे छात्रावास हैं जिनमें विद्यार्थियों की 30 से भी कम संख्या है या फिर इसके आसपास है। अजा उत्कृष्ट बालक ढीमरखेड़ा में 14, अजा उत्कृष्ट बालक रीठी 21, अजा उत्कृष्ट बालक बड़वारा 21, अजा नवीन बालक खिरहनी कटनी 10, अजा नवीन कन्या छात्रावास बरगवां 19, अजा नवीन बालक छात्रावास कैंप 26, अजा नवीन बालक छात्रावास रीठी 32 बच्चे ही दर्ज हैं।
इन हॉस्टल में स्थिति ज्यादा खराब
कक्षा 9 से 12 तक सीनियर छात्रावासों की स्थिति बेहद चिंतनीय है। 1085 सीटर छात्रावासों की संख्या में से 590 बच्चों को ही विभाग प्रवेश दिला पाया है। शा.आ.सी. बालक छात्रावास रीठी 16 बच्चे, कन्या छात्रावास घुघरा 7 छात्राएं, बालक घुघरा, 17 बच्चे, कन्या कटनी 16, देवरी भदौरा 13, बालक बहोरीबंद 33, बालक कूड़ामर्दानगढ़ 5, बालक ढीमरखेड़ा 28, बालक कटरिया 18, बालक सिलौड़ी 26, बालक झिन्नापिपरिया 19, देवराकला 10, बालक कैमोर 9, बालक बरही नवीन 21 विद्यार्थी ही रह रहे हैं। कॉलेतों में पढऩे वाले बच्चों के लिए 100 सीटर के छात्रावास में 68 बच्चे ही प्रवेशित हुए हैं। इसी प्रकार महाविद्यालय बालक छात्रावास कटनी में 18 बच्चे ही पंजीकृत हैं।
मध्यमिक स्कूलों के छात्रावासों की स्थिति खराब
माध्यमिक स्कूलों के छात्रावासों की भी स्थिति बेहद खराब है। यहां पर भी 430 सीटर में से मात्र 173 बच्चे ही प्रवेश ले पाए हैं। आदिम जाति कल्याण विभाग बच्चों को छात्रावासों की सुविधा मुहैया नही करा पाया है। आश्रम ठुठिया सलैया में 39, आश्रम लोहरवारा में 19, आश्रम जालासुर 15, आश्रम घुघरा 29, आश्रम पोड़ी 29, आश्रम खंदवारा 8, आश्रम भादावर 12, आश्रम बड़ागांव 16, आश्रम चिखला में मात्र 4 बच्चे ही दर्ज हो पाए हैं।
वर्जन
छात्रावासों में सीटें खाली है यह बात सही है। इसके लिए पहल की जा रही है। दो माह में 22 बच्चों को प्रवेश दिलाया गया है। प्रोफाइल रजिस्टेशन के बाद भी बच्चों की ऑनबोर्ड प्रक्रिया नहीं हो पा रही है, जिससे शिष्यावृत्ति में भी समस्या है। सीटें फुल हों, इसके लिए सार्थक पहल की जाएगी।
पूजा द्विवेदी, जिला संयोजक आदिम जाति कल्याण विभाग।