कटनी. जिला अस्पताल में हुए अग्निकांड की जांच करने के लिए बुधवार की दोपहर 12 बजे कलेक्टर द्वारा गठित की गई जांच टीम पहुंची। सोमवार की रात हुए अग्निहादसे के कारणों, आग लगने की वजह, सुरक्षा उपायों आदि के बारे में टीम ने छह घंटे जांच की। जांच के दौरान अधिकारियों के अस्पताल के कदम-कदम पर कई खामियां मिलीं, हालांकि जांच अधिकारी जांच के संबंध में कुछ भी बताने से इन्कार कर रहे थे। सीएमएचओ डॉ. प्रदीप मुढिय़ा गोलमोल जवाब देते रहे।
आपको जानकर हैरानी होगी कि जब टीम जांच के लिए पहुंची और सबसे पहले इस बात की जांच करी कि यदि अस्पताल में आग लगती है, शॉर्ट-सर्किट आदि के कारण धुआं होता है तो फिर फायर एक्सटिंग्यूसर कैसे काम करते हैं। एक कागज के टुकड़े में आग लगाकर स्प्रिंकलर के पास ले जाई गई, लेकिन न तो वह चालू हुआ और ना ही अलार्म बजा। हद तो तब हो गई कि इलेक्ट्रीशियन उपकरणों को ऑपरेट नहीं कर पाया।
इन्होंने की जांच
कलेक्टर अवि प्रसाद ने 6 सदस्यीय जांच टीम गठित की है। इसमें एसडीएम प्रिया चंद्रावत, अधीक्षण यंत्री अयूब खान, कार्यपालन यंत्री लोक निर्माण विभाग हरि सिंह, सीएमएचओ डॉ. प्रदीप मुढिय़ा, वीके गौतम अनुविभागीय अधिकारी लोक निर्माण विभाग, उपयंत्री राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन राजेश डोंगरे सहित विद्युत सुरक्षा सब इंजीनियर ज्योति यादव ने जांच की। दोपहर 12 बजे से शाम 6 बजे तक तक छह घंटे तक जांच की। यह जांच टीम नगर निगम, पीआइयू व जिला चिकित्सालय के अधिकारियों व कर्मचारियों द्वारा फायर सेफ्टी के संबंध में किए गए उपायों की जांच कर रही है।
इन खामियों से भरी है अस्पताल की बिल्डिंग
150 बिस्तर वाले इस अस्पताल में पग-पग पर खामियां सामने आई हैं। यहां पर स्प्रिंकलर, होजरील, हाइड्रेंट, प्वाइंट, फायर पंप, अंडरग्राउंड वॉटर टैंक, एक्सटिंग्यूसर, एग्जिस साइनेज, पेनल साइनेज, एमसी हूटर, स्मोक डिटेक्टर आदि नहीं पाए गए। यहां तक कि यहां पर प्रॉपर फायर कंट्रोल ट्रेनिंग स्टॉफ को नहीं दी गई। प्रत्येक फ्लोर में रेस्क्यू टीम तैनात रहनी चाहिए लेकिन जिला अस्पताल प्रबंधन ने अबतक ऐसी कोई व्यवस्था नहीं की है। इंदौर से फायर कंसलटेंट सौरभ शर्मा ने पहुंचकर यहां पर अपनाए जाने वाले सुरक्षा उपायों की जानकारी प्रभारी सीएस डॉ. एसपी सोनी को दी। ट्रामा सेंटर और पुरानी बिल्डिंग में भी सुरक्षा उपायों की भारी कमी है।
इलेक्ट्रीशियन नहीं बंद कर पाया अलार्म सिस्टम
जिला अस्पताल में तैनात इलेक्ट्रीशियन तरुण यादव से 150 बिस्तर वाली बिल्डिंग के सिस्टम से एकदम अनजान दिखे। जब फायर कंसलटेंट सहित अन्य अधिकारियों ने अलार्म चालू होने, बंद कराने की प्रोसेस पूछी तो ठीक से कोई जानकारी नहीं दे पाए। जब पत्रिका ने इसी पड़ताल की तो तरुण यादव ने कहा कि मंगलवार को ही उनको यहां का सिस्टम बताया गया है। दो-तीन बार बताने में मैने अलार्म सिस्टम को ऑपरेट करना सीखा हूं। इसके पहले मुझे यहां कि किसी भी उपकरण आदि की जानकारी नहीं थी।
एयर प्यूरीफायर का देखा सिस्टम
जांच टीम के अधिकारियों ने जांच के दौरान प्रसव कक्ष के अंदर मौजूद दूसरे एयर प्यूरीफायर के सिस्टम को भी देखा। यह सिस्टम किस तरह से काम करता है और आग लगने की क्यों संभावनाएं बनी है देखा व समझा।
अग्निशमक यंत्र मिले काम, डेट का भी नहीं था अता-पता
जांच टीम ने नर्सिंग स्टॉफ व डॉक्टरों से लेबर रूम में मौजूद व उपयोग किए गए अग्निशमक यंत्रों के बारे में जानकारी ली। इस दौरान किसी भी सिलेंडर में एक्सपायरी डेट का उल्लेख नहीं मिला। नर्सिंग स्टॉफ ने बताया कि अलग से रजिस्टर में लिखा गया है, जब टीम ने दिखाने कहा तो रजिस्ट की तलाश की जाती रही। वहीं टीम ने पाया कि यहां पर आग पर काबू पाने के लिए अग्निशमक यंत्रों की भारी कमी है। नियम के अनुसार हर 15 मीटर में इनकी व्यवस्था होनी चाहिए थी और संकेतक भी होने चाहिए थे।
कई उपकरण जलकर व कार्बन से खराब
लेबर रूम के एयर प्यूरीफायर व एसी सहित अन्य उपकरणों में आग लगने, एसी की गैस का रिसाव होने से बढ़ी आग व लपटों के कारण भयंकर धुआं भर गया था। आग लगने व कार्बन के कारण लेबर रूम सहित वार्ड के कई उपकरण क्षतिग्रस्त हो गए हैं। पूरे में कार्बन की परत चढ़ गई है व फोम आदि की सामग्री खराब हो गई है। आगजनी से लाखों रुपए का नुकसान हुआ है।
छह घंटे चली जांच, कुछ भी बताने से बचते रहे जांच अधिकारी
एसडीएम, इलेक्ट्रिकल विभाग, पीआइयू, पीडब्ल्यूडी, सीएमएचओ, बिजली विभाग के अधिकारी जांच में जुटे रहे। दोपहर 12 बजे से जांच शुरू हुई जो शाम छह बजे तक चली। तीन दिवस के अंदर जांच टीम रिपोर्ट कलेक्टर को सौंपेगी। जांच टीम ने देखा कि आग लगने के कारण क्या थे, सुरक्षा के क्या उपाय थे। एम्पीयर व बोल्ट आदि की जानकारी जुटाई गई है। हालांकि जांच के लिए पहुंचे अधिकारी मीडिया को कुछ भी बताने से इन्कार करते रहे। गोपनीय जांच का हवाला देकर खामियों को उजागर न करने की बात कहते रहे।
आगजनी को लेकर खास-खास
– इलेक्ट्रिक स्विच बहुत ही अंदर बना हुआ है, आगजनी की घटना में एकदम से उपकरण बंद करना व सप्लाई बंद करने में भी हो सकती है कठिनाई।
– जांच के दौरान अधिकारियों ने पाया कि यहां पर लगे कई उपकरण गुणवत्ता मानक के नहीं हैं, मानक अनुसार केबिल न लगाना भी बताई जा रही वजह।
– असिस्टेंट इंजीनियर विद्युत अंकेक्षण द्वारा इलेक्ट्रिक संबंधी उपायों की जांच रिपोर्ट सौंपेंगे।
– लिफ्ट चालू न होने से नहीं हो पाई उपकरणों की जांच, अस्पताल शुरू होने के कई माह बाद भी नहीं मिल रही मरीजों व परिजनों को सुविधा।
– शहरभर में नियमों को ताक पर रखकर हो रहा अस्पताल, मॉल, शॉपिंग कॉम्पलेक्सों का हो रहा संचालन, नगर निगम व प्रशासन नहीं कर रहा कोई जांच कार्रवाई।
सीएमएचओ डॉ. प्रदीप मुढिय़ा ने कही यह बात
सीएमएचओ ने कहा कि जांच में देखी जा रही हैं कि क्यां कमियां हैं। बगैर फायर सेफ्टी उपायों के अस्पताल शिफ्ट करने पर कहा कि सिविल सर्जन ने आवेदन किया है। पुरानी बिल्डिंग में नया विंग बनना है, क्रिटिकल केयर यूनिट भी बनना है। मरीजों का दबाव भी था, इमरजेंसी सेवाओं में दिक्कत आ रही थी। सुरक्षा उपायों पर कहा कि हर कमियों को दूर किया जाएगा। आगजनी के दौरान अस्पताल के बाहर गभवर्ती महिलाओं की रैम्प में पर्दे लगाकर कराए गए प्रसव पर कहा कि हम जहां पर नाल काटते हैं वहां डिलेवरी मानते हैं। अब सभी प्रोटोकॉल का पालन किया जाएगा। हालांकि अस्पताल के बाहर रैम्प में हुए प्रसव को लेकर नर्सिंग स्टॉफ ने भी कहा कि बाहर डिलवेरी हुई है। स्वास्थ्य विभाग व जिला प्रशासन अपनी नाकामी छिपाने के लिए वरिष्ठ अधिकारियों को भ्रामक जानकारी भेजी जा रही है।
वर्जन
कलेक्टर के निर्देश पर जिला अस्पताल में हुए अग्निहादसे की जांच की जा रही है। छह घंटे जांच की गई है। गुरुवार को भी जांच की जाएगी। तीन दिवस में जांच रिपोर्ट सौंपनी है। जांच में जो भी तथ्य सामने आ रहे हैं वे रिपोर्ट में उल्लेखित किए जाएंगे।
प्रिया चंद्रावत, एसडीएम व नोडल अधिकारी जांच टीम।