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इस विधि से करें शनि देव की आराधना, सुख-शांति से हो जायेंगे सराबोर

मानव जीवन में शनि के सकारात्मक प्रभाव

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कटनी

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Balmeek Pandey

May 14, 2018

shani dev ki puja kaise karni chahiye

shani dev ki puja kaise karni chahiye

कटनी। भारतीय समाज में आमतौर ऐसा माना जाता है कि शनि अनिष्टकारक, अशुभ और दु:ख प्रदाता है, पर वास्तव में ऐसा नहीं है। मानव जीवन में शनि के सकारात्मक प्रभाव भी बहुत है। शनि संतुलन व न्याय के ग्रह हैं। यह सूर्य के पुत्र माने जाते हैं। यह नीले रंग के ग्रह हैं, जिससे नीले रंग की किरणें पृथ्वी पर निरंतर पड़ती रहती हैं। यह सबसे धीमी गति से चलने वाला ग्रह है। इसलिए यह एक राशि का भ्रमण करने में ढाई वर्ष और 12 राशियों का भ्रमण करने पर लगभग 30 वर्ष का समय लगाता है। न्याय के देवता शनिदेव को खुश करना कोई आसान काम नहीं है। ऐसे में यदि कोई इन्हें खुश कर लेता है तो उसे करियर में सफलता तो मिलती ही है साथ ही धन-धान्य की भी वृद्धि होती हैं।


पंडित बिहारी चतुर्वेदी कटनी के अनुसार सूर्य पुत्र शनि अपने पिता सूर्य से अत्यधिक दूरी के कारण प्रकाशहीन है। इसलिए इसे अंधकारमयी, विद्याहीन, भावहीन, उत्साह हीन, नीच, निर्दयी, अभावग्रस्त माना जाता है। फिर भी विशेष परिस्थितियों में यह अर्थ, धर्म, कर्म और न्याय का प्रतीक है। इसके अलावा शनि ही सुख-संपत्ति, वैभव और मोक्ष देने वाला ग्रह माना जाता है। मान्यता है कि धर्मराज होने की वजह से प्राय: शनि पापी व्यक्तियों के लिए दुख और कष्टकारक होता है। मगर ईमानदारों के लिए यह यश, धन, पद और सम्मान का ग्रह है। शनि की दशा आने पर जीवन में कई उतार-चढ़ाव आते हैं। शनि प्राय: किसी को क्षति नहीं पहुंचाता, लेकिन अति की स्थिति में अनेक ऐसे सरल तरीके हैं, जिनका प्रयोग कर हम लाभ उठा सकते हैं। जिनका प्रयोग कर हम शनि की शांति कर सकते हैं और जीवन में दुख दूर कर कामयाबी की ओर बढ़ सकते हैं।

इन उपायों से खुश करें शनि देव को:
शनि देव की पूजा के लिए कड़ी अराधना करनी होती है। खासकर शनि की साढ़ेसाती से परेशान लोगों को शनिदेव की पूजा पूरे विधि विधान से करनी चाहिए। इनकी पूजा में कुछ खास बातों का ध्यान करना चाहिए। यहां हम आपको बता रहे हैं शनि देव की पूजा से जुड़ी बातें जिनका हमें पूजा करने से पहले जान लेना चाहिए।
1.शनिवार के दिन पीपल के पेड़ पर शनिदेव की मूर्ति के पास तेल चढ़ाएं या फिर उस तेल को गरीबों में दान करें।
2.शनिदेव को तेल चढ़ाना चाहिए लेकिन इस बाद का ध्यान रखना चाहिए कि तेल इधर-उधर गिरे न। तेल को सावधानी से इस्तेमाल करें।
3.शनिवार को काला तिल और गुड़ चीटों को खिलाएं। इसके अलावा शनिवार के दिन चमड़े के जूते चप्पल दान करना भी अच्छा रहता है।

४.शनिदेव की पूजा मूर्ति के सामने खड़ें न हों। शनि के उस मंदिर में जाएं, जहां शनि शिला के रूप में हों। इस दिन सात्विक आहार लें।
5.शनिदेव को प्रसन्न करने के लिए पीपल और शमी के पेड़ की पूजा करें। इसके अलावा शनि के सामनें तेल का दीपक जलाएं।
6.शनि की पूजा करने वालों का दूसरों के प्रति व्यवहार अच्छा होना चाहिए। इन लोगों को गरीबों, दीन दुखियों और जरूरतमंदों की मदद करनी चाहिए।

जानकारों के मुताबिक शास्त्रों में शनि देव के क्रोध के अनेक उदाहरण मिलते हैं। कहते हैं कि मेघनाद की कुंडली में रावण ने सारे ग्रहों को पकड़कर सबसे शुभ माने जाने वाले 11वें भाव में क़ैद कर दिया था, लेकिन त्रिलोक को जीतने वाला रावण भी शनि देव को रोक न सका और उन्होंने धीरे-से अपना पैर अनिष्ट-कारक 12वें भाव में बढ़ा दिया। शनि देव के इस कार्य की ही वजह से अपराजेय समझा जाने वाला मेघनाद भी आखिऱकार मृत्यु का ग्रास बना।

वैदिक ज्योतिष के मुताबिक़ भिन्न-भिन्न भावों में शनि का फल भी भिन्न-भिन्न होता है। शनि सूर्य-पुत्र के नाम से ख्यात है। कहते हैं कि शनि जिसे चाहे राजा से रंक बना देता है और रंक से राजा। पंडित रामकुमार मिश्रा के अनुसार यदि आप शनि देव की वक्र दृष्टि का शिकार हैं तो यह 5 सरल उपाय जो बचाएंगे आपको शनि के क्रोध से और दिलाएंगे जीवन में क़ामयाबी.

1. हनुमान चालीसा का पाठ करें
हनुमान चालीसा का नियमित पाठ शनिदेव के प्रकोप से बचने का रामबाण उपाय है।


2. शनि मंत्र का जाप
कहते हैं कि मन्त्रों में इतनी शक्ति होती है कि उनका सही उपयोग मरे हुए को भी जि़न्दा कर सकता है। हर देवता का अपना मन्त्र होता है, जिसको विधि-पूर्वक जपना उस देवता को प्रसन्न करने का सबसे आसान तरीक़ा है। शनि देव के निम्न मंत्र का 40 दिनों में 19,000 बार जप साढ़ेसाती में बहुत लाभ देता है -
चित्र में ये शामिल हो सकता है: एक या और लोेग
मंत्र - ऊँ प्रां प्रीं प्रौं स: शनिश्चराय नमः

शनि-मंत्र के बीज अक्षरों की अपरिमित शक्ति ढैया और साढ़े साती के ताप का शमन करती है। शनिदेव के इस मन्त्र का लाभ सभी को लेना चाहिए। साथ ही दशरथ कृत शनि स्तोत्र भी शनि के दुष्प्रभावों से बचने का बेहतरीन उपाय है।


3. तिल, तेल और छायापात्र का दान
तिल, तेल और छायापात्र शनिदेव को अत्यन्त प्रिय माने जाते हैं। इन चीज़ों का दान शनि की शान्ति का प्रमुख उपाय है। मान्यता है कि यह दान शनि देव द्वारा दिए जाने वाले कष्टों से निजात दिलाता है। छायापात्र दान की विधि बहुत ही सरल है। मिट्टी के किसी बर्तन में सरसों का तैल लें, उसमें अपनी छाया देखकर उसे दान कर दें। यह दान शनि के आपके ऊपर पडऩे वाले दुष्प्रभावों को दूर कर उनका आशीर्वाद लाता है।

4. धतूरे की जड़ धारण करें
वैदिक ज्योतिष में विभिन्न जड़ों की मदद से ग्रहों की शान्ति का विधान है। कई ज्योतिषियों का मानना है कि रत्न धारण करना नुक़सान भी पहुँचा सकता है, लेकिन जड़ धारण करने से ऐसी आशंका नहीं रहती है। रत्न ग्रह की शक्ति बढ़ाने का काम करते हैं, वहीं जडिय़ाँ ग्रहों की ऊर्जा को सकारात्मक दिशा में मोडऩे का कार्य करती हैं।

शनिदेव को ख़ुश कर उनकी कृपा पाने के लिए ग्रन्थों में धतूरे की जड़ को धारण करने की सलाह दी गई है। धतूरे की जड़ का छोटा-सा टुकड़ा गले या हाथ में बांधकर धारण किया जा सकता है। इस जड़ी को धारण करने से शनि की ऊर्जा आपको सकारात्मक रूप से मिलने लगेगी और जल्दी ही आपको ख़ुद अन्तर महसूस होगा।

5. सात मुखी रुद्राक्ष धारण करें
जडिय़ों की ही तरह रुद्राक्ष को भी हानि रहित उपाय की मान्यता प्राप्त है। सात मुखी रुद्राक्ष धारण करना न सिफऱ् भगवान शिव को प्रसन्न करता है, बल्कि इससे शनिदेव का आशीर्वाद भी दिलाता है। पुराणों के अनुसार सात मुखी रुद्राक्ष धारण करने से घर में धन-धान्य की कमी नहीं रहती है और लक्ष्मी मैया की कृपा हमेशा बनी रहती है। साथ ही सेहत से जुड़ी समस्याओं में भी इसे बहुत प्रभावी माना जाता है। इस रुद्राक्ष को सोमवार या शनिवार के दिन गंगा जल से धोकर धारण करने से शनि जनित कष्टों से छुटकारा मिलता है और समृद्धि प्राप्त होती है।

ऐसे बचें शनि की साढ़े साती से:
लोग शनि की दिशा,साढ़े साती का नाम सुनते ही घबराने लगते हैं जिसके लिए वह मुंहमांगे कीमत देकर इसका उपाये करने में लगे रहते हैं। लेकिन बहुत कम लोगों ये जानते हैं कि अगर कुछ बातों को ध्यान रखा जाए तो शनि की साढ़े सती उन्हें ज्यादा परेशान नहीं करेगी।
1- शराब तथा अन्य नशे से दूरे रहें।
2- किसी परस्त्री के साथ रिश्ता न रखें।
3- किसी का दिल न दुखाएं।
4- महिलाओं का आदर करें।
5- सुबह जल्दी उठकर भगवान का ध्यान करें।
6- परिवार के सभी सदस्यों के साथ मिल जुलाकर रहेंं।
7- भैरवजी की उपासना करें और शाम के समय काले तिल के तेल का दीपक लगाकर शनि दोष से मुक्ति के लिए प्रार्थना करें।
8- किसी धार्मिक कार्यक्रम में ईधन जैसे लकड़ी, कोयला आदि दान करने से शनि का बुरा प्रभाव टल जाता हैं।
9- समय समय पर शनि मंदिर में चिमटा, चमड़े की जूतियां आदि का दान करें।


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