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स्लीमनाबाद/कुआं। जिले के इकलौता शेषनाग मंदिर बहोरीबंद विकासखण्ड की ग्राम पंचायत कुआं में स्थित है, जो अपने अद्भुत रहस्यों को आज भी संजोय हुए है। यहां तो वैसे प्रतिदिन जिसे सर्प डसता है वो मंदिर पहुंचकर पूजा-अर्चना करते हैं, लेकिन नागपंचमी के दिन प्रदेश के कई जिलों से लोग पहुंचते हैं व काल सर्प दोष मुक्ति के लिए पूजा अर्चना करते हैं। शेषनाग मंदिर के पुजारी राममिलन नायक ने बताया कि कुआं स्थित शेषनाग मंदिर जिले का इकलौता शेषनाग मंदिर है। यहां सर्प डसने से पीडि़त लोग बड़ी संख्या में पहुंचते हैं। साथ ही जिन्हें काल सर्प दोष होता है उन्हें भी इससे मुक्ति मिलती है।
वैसे तो प्रतिदिन लोगों का आना जाना मंदिर में लगा रहता है, लेकिन नागपंचमी पर प्रदेश के कई जिलों से लोग अपनी मन्नतों को लेकर पहुंचते हैं। लोग पूजा-अर्चना कर सुख-समृद्धि की कामना करते हैं। साथ ही काल सर्प दोष निवारण के लिए मंदिर में पूजा-अर्चना होगी। शेषनाग मंदिर पहुंचने के लिए बहोरीबंद व सिहोरा मार्ग से वाहन आते हैं, जो सीधे कुआं ग्राम पहुंचते हैं। नाग पंचमी के दिन तहसील क्षेत्र में अलसुबह से लोग नाग देवता की पूजा अर्चना करने के साथ ही सांपों को दूध अर्पित करेंगे। पंडित रमाकान्त पौराणिक ने बताया कि इस साल नाग पंचमी के दिन मंगला गौरी व्रत का संयोग बन रहा है। यह व्रत माता पार्वती को समर्पित माना गया है। मान्यता है कि इस दिन भगवान शंकर व माता पार्वती की पूजा करने से सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है। भगवान शंकर की कृपा से कालसर्प दोष से मुक्ति मिलती है।
Published on:
02 Aug 2022 05:48 pm

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