
इस जिले में नसबंदी के बाद बच्चा पैदा नहीं होंगे ऐसी गारंटी बिल्कुल भी नहीं!
कटनी. परिवार नियोजन के तहत नसबंदी ऑपरेशन कराने वाले जिले के दंपत्ति यदि ब्रेफिक्र होकर यह सोचें कि अब उनको बच्चा पैदा नहीं होंगे और आवश्यक सावधानी बरतना जरूरी नहीं समझ रहे हैं तो उनकी यह बड़ी भूल होगी। लोग नसबंदी ऑपरेशन इस आशय से कराते हैं कि यह उपाय प्रसव रोकने के लिए सौ फीसदी कारगर है, तो थोड़ा जल्दबाजी होगी, क्योंकि स्वास्स्थ्य विभाग के आंकड़े चौकाने वाले सामने आए हैं। सालभर में जिले में लगभग डेढ़ दर्जन नसबंदी ऑपरेशन के केस फेल हो गए हैं।
जानकारी के अनुसार अप्रेल 2023 से मार्च माह तक हुए नसबंदी ऑपरेशन में एक दो नहीं बल्कि 16 केस फेल हो गए हैं। महिलाओं को गर्भ ठहरने के बाद अब और बच्चा न पैदा करने की चाहत ने पशोपेश में डाल दिया है। ऑपरेशन कराने के बाद भी बनी ऐसी स्थिति के चलते लोगों ने स्वास्थ्य विभाग में बकायता शिकायत भी दर्ज कराई है। स्वास्थ्य विभाग ने ऑपरेशन फेल हो जाने के बाद प्रत्येक हितग्राही को 30 हजार रुपए क्लेम देने का प्रस्ताव तैयार किया है।
यह रही है जिले की स्थिति
परिवार नियोजन के तहत जिले के स्वास्थ्य विभाग को अप्रेल 2023 से 31 मार्च 2024 तक 7804 महिला व 331 पुरुषों के ऑपरेशन कराने का लक्ष्य तय किया गया था। अबतक 6512 महिला व मात्र 16 पुरुषों की नसबंदी हुई है। इन्ही में अब कई महिलाओं के ऑपरेशन फेल हो रहे हैं। जानकारी के अनुसार महिला और पुरुष नसबंदी दोनों में ही ऑपरेशन के दौरान जिस नस को काटा जाता है, उसके दोनों सिरों को धागा से अलग-अलग करके बांध दिया जाता है, या फिर रिंग चढ़ा दी जाती है। ऑपरेशन के बाद यदि धागा ढीला पड़ जाए या उसकी गांठ खुल जाए तो ऐसी स्थिति में नसबंदी फेल हो जाती है। फेल हुए केसों के दावों की जांच कर कमेटी ने अपनी रिपोर्ट शासन को भेज दी है। अब शासन स्तर पर मुआवजा के लिए प्रक्रिया चल रही है।
तीसरी संतान के बाद कराया था ऑपरेशन, हुआ फेल
कन्हवारा स्वास्थ्य विभाग के माध्यम से परिवार नियोजन अपनाने के लिए कन्हवारा निवासी चंदा कुशवाहा 30 वर्ष ने बताया कि पत्नी ने नसबंदी ऑपरेशन 2020 में करवाया था, जिसके बाद वे बच्चों के लालन-पालन में लग गए। अब वह पुन: 6 महीने की गर्भवती हो गई हैं। नसबंदी ऑपरेशन फेल होने के बाद दंपत्ति परेशान हैं, पति-पत्नी शिकायत करते हुए उचित कार्रवाई की मांग की है।
ऐसे मिलता है क्लेम
नसबंदी का ऑपरेशन होने के बाद यदि पेट में गर्भ धारण हो जाए तो उसे 90 दिन में क्लेम करना आवश्यक है। इससे पहले उसे सोनोग्राफी भी करानी होती है। आवेदक ने अल्ट्रासाउंड नहीं कराया है तो ऐसी स्थिति में विभाग अल्ट्रासाउंड कराएगा। महत्वपूर्ण बात ये है कि जिस अस्पताल में उसने नसबंदी कराई है, वहीं उसे क्लेम का आवेदन करना होगा। साक्ष्य के तौर पर रिपोर्ट जमा करनी होती है।
वर्जन
अधिकांश ऑपरेशन अब नस काटकर नहीं होते, बल्कि रबर की रिंग चढ़ाई जाती है, जो अब स्लिप हो जाती है। कई बार बहुतायता में ऑपरेशन होने से ऐसी स्थिति बनती है। सामान्य तौर पर कुल ऑपरेशन का 5 प्रतिशत फैल्युअर होता है। जो केस फेल हुए हैं उनकी जांच कराई गई है। मुआवजा के लिए प्रक्रिया चल रही है। अन्य केसों की भी जांच कराएंगे।
डॉ. आरके अठया, सीएमएचओ।
Published on:
16 Mar 2024 09:45 pm
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