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आखों से दिव्यांग बेटी चुनौतियों से लड़ी, प्रगति पथ पर आगे बढ़ी, अब दूसरों को जीने राह दिखा रही सुदामा

मंगलवार को एक दिन के लिए कटनी की सांकेतिक कलेक्टर बनी सुदामा चक्रवर्ती.

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sudama chakrwarti

sudama chakrwarti

कटनी. पिता मजदूर और मां गृहिणी। घर में 3 भाई और दो बहनें। पढ़ाई और आखों से नहीं दिखने की समस्या में इलाज के लिए पैसे की किल्लत ऐसी कि नि:शुल्क स्वास्थ्य परीक्षण केंद्र तक पहुंचने के लिए बस के किराए का भी इंतजाम नहीं। और इन सबके के बाद भी 2017 में गुडग़ांव दिल्ली में आयोजित पांचवे राष्ट्रीय जूडो प्रतियोगिता में स्वर्ण पदक, 2018 में राष्ट्रीय ब्लाइंड जूडो में कांस्य पदक व 2021 में लखनऊ में आयोजित ब्लाइंड जूडो प्रतियोगिता में कांस्य पदक सहित देश के अलग-अलग शहरों में आयोजित दूसरी प्रतियोगिताओं में कई मैडल।

चुनौतियों के बीच लक्ष्य तक पहुंचने की यह कहानी है कटनी जिले के आदिवासी बाहुल्य ढीमरखेड़ा विकासखंड के दशरमन गांव में रहने वाली सुदामा चक्रवर्ती की। बिटिया सुदामा बचपन से ही चुनौतियों से लड़ी और प्रगति पथ पर आगे बढ़ी और दूसरों को जीने की राह दिखा रही हैं। सुदामा चक्रवर्ती के इसी जज्बे को सम्मान देने लिए आज 8 मार्च को अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस पर उन्हे एक दिन के लिए कटनी का सांकेतिक कलेक्टर बनाया गया।

बीए द्वितीय वर्ष की छात्रा सुदामा चक्रवर्ती बताती हैं कि पिता छोटेलाल मजदूरी और मां सुम्मी बाई घर का काम करती हैं। पहली कक्षा में जब भाई के साथ प्रवेश लेने गईं तो शिक्षक ने यह कहकर लौटा दिया कि देख नहीं पाती तो पढ़ेगी कैसे। फिर भी पढऩे की जिद नहीं छोड़ी और अगले साल स्कूल में प्रवेश लिया। अक्षर स्पर्श कर पढ़ाई की। शासकीय उच्चतर माध्यमिक महात्मा गांधी स्कूल से कक्षा 12वीं पास कर वर्तमान में श्याम सुंदर अग्रवाल महाविद्यालय सिहोरा में बीए द्वितीय वर्ष की पढ़ाई कर रही हूं।

जूडो का प्रशिक्षण तरूण संस्कार संस्था से प्राप्त किया है और अपनी स्नातक की पढ़ाई के साथ जूडो का निरंतर अभ्यास पड़वार स्टेडियम स्लीमनाबाद स्थित प्रशिक्षण केन्द्र में कर रही हूं। जूडो हमे आत्मरक्षा में मजबूत बनाती है। आज मैं जो भी हूं तो यह माता-पिता की देन हैं कि उन्होंने मेरे कदम नहीं रोके।