
एसीसी द्वारा अमेहटा में बनवाए गए सौसर में पानी नहीं, विजयराघवगढ़ के वार्ड क्रमांक 7 में पानी की तलाश में पहुंचे चीतल की कुत्तों के काटने से मौत.
कटनी. विजयराघवगढ़ के वार्ड क्रमांक सात में शनिवार सुबह एक चीतल की दर्दनाक मौत हो गई। नागरिकों ने बताया कि चीतल व दूसरे वन्यप्राणियों को इन दिनों जंगल में पानी नहीं मिल रहा है। शनिवार सुबह एक चीतल पानी की तलाश में विजयराघवगढ़ बस्ती पहुंचा तो कुत्तों ने पीछा किया और भागते हुए नाली में गिरने से मौत हो गई। कैमोर, अमेहटा, विजयराघवगढ़ व आसपास के क्षेत्र में एक सप्ताह में तीन चीतल की मौत अलग-अलग कारणों से हुई है।
अमेहटा के ग्रामीण बताते हैं कि एसीसी प्रबंधन ने जंगल में कन्वेयर बेल्ट लगाया तो चीतलों की आवाजाही पर असर पड़ा। कुछ स्थानों पर दीवार खड़ी कर देने से भी वन्यप्राणियों की आवाजाही प्रभावित हुई। अमेहटा व कैमोर में वन्यप्राणियों के पानी पीने के लिए एसीसी प्रबंधन ने सौसर का निर्माण करवाया है, लेकिन ज्यादातर सौसर में पानी नहीं है।
जंगल में पानी नहीं मिलने के बाद चीतल व दूसरे वन्यप्राणी एसीसी द्वारा बनवाए गए सौसर तक पहुंचते हैं और पानी नहीं मिलने से प्यास में दम तोड़ दे रहे हैं। एसीसी द्वारा बनवाए गए कई सौसर वन्यप्राणियों के लिए किसी काम के नहीं है।
अमेहटा गांव में रहने वाली सावित्री बाई बतातीं हैं कि एक सप्ताह में तीन सांभर की मौत हो गई है। अमेहटा में बने सौसर में दो माह से पानी नहीं है। चीतल पानी पीने जाते हैं तो एसीसी की बाउंड्री बन गई है। अब वन्यप्राणी कहां जाएं। मौत के मुंह में समा रहे हैं।
वहीं इस पूरे मामले को लेकर विजयराघवगढ़ रेंजर राघवेंद्र सिंह का कहना है कि जंगल में पानी के प्राकृतिक जलस्रोत सूख जाने के बाद वन्यप्राणी आबादी का रुख कर रहे हैं। हमारी पूरी कोशिश है कि वन्यप्राणियों के लिए उनके रहवास के समीप ही पानी का इंतजाम हो। एसीसी द्वारा बनवाए गए सौसर में पानी को लेकर प्रबंधन से बात की है। बताया गया कि पांच सौसर में लीकेज के कारण पानी नहीं रुक रहा है। एसीसी प्रबंधन ने जल्द लीकेज रोककर पानी भराव की व्यवस्था करने की बात कही है।
Updated on:
27 Mar 2022, 4:47 PM IST
Published on:
27 Mar 2022, 4:47 PM IST
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