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दो माह से बरही, विजयराघवगढ़ व कैमोर नहीं पहुंच रहीं कचरा गाड़ी, लगा ढेर, पांच साल से नगर परिषदों ने नहीं किया भुगतान

जगह-जगह लगे कचरे के ढेर, खाली प्लाट व जगह पाकर खुले में कचरा फेंकते लोग, सड़क किनारे लगा कचरे का अंबार, कहीं पर गीला कचरा तो हीं पर सूखा कचरा, कचरे में मुंह मार रहे अवारा शूकर, मवेशी, कचरे से उठ रही दुर्गंध, दुर्गंध के कारण लोगों में संक्रमण का खतरा...। यह नजारा है इन दिनों जिले की तीन नगर परिषदों बरही, विजयराघवगढ़ और कैमोर का। यहां पर स्वच्छतादूतों द्वारा झाड़ू तो लगाई जा रही है, लेकिन तीनों बड़े कस्बों से कचरे का उठाव नहीं हो रहा।

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कटनी

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Balmeek Pandey

May 11, 2020

Transport of waste stopped due to non-payment

Transport of waste stopped due to non-payment

कटनी. जगह-जगह लगे कचरे के ढेर, खाली प्लाट व जगह पाकर खुले में कचरा फेंकते लोग, सड़क किनारे लगा कचरे का अंबार, कहीं पर गीला कचरा तो हीं पर सूखा कचरा, कचरे में मुंह मार रहे अवारा शूकर, मवेशी, कचरे से उठ रही दुर्गंध, दुर्गंध के कारण लोगों में संक्रमण का खतरा...। यह नजारा है इन दिनों जिले की तीन नगर परिषदों बरही, विजयराघवगढ़ और कैमोर का। यहां पर स्वच्छतादूतों द्वारा झाड़ू तो लगाई जा रही है, लेकिन तीनों बड़े कस्बों से कचरे का उठाव नहीं हो रहा। इसकी मुख्य वजह है कचरा गाडिय़ों का न पहुंचना। शहर से एमएसडब्ल्यू की पिछले दो माह से कचरा गाडिय़ां कचरा उठाने नहीं पहुंच रहीं। सरकार करोड़ों रुपये स्वच्छता में खर्च कर रही है। कटनी में भी 2015 में पडऱवारा में बड़ा प्रोजेक्ट शुरू किया गया, जहां पर कचरा से खाद का निर्माण हो रहा है। यहां पर इन तीनों कस्बों से भी कचरा पहुंचता है, लेकिन तीनों परिषदों द्वारा भुगतान न जमा करने के कारण डोर-टू-डोर कचरा एकत्रित करने वाली कंपनी एमएसडब्ल्यू ने 2 माह से गाड़ी भेजना बंद कर दिया है। स्वच्छता में नगर निगम व नगर परिषदों द्वारा जमकर रुपयों की बंदरबांट हो रहा है, लेकिन कचरा उठाने वाली कंपनी का भुगतान नहीं किया जा रहा है जिससे सफाई व्यवस्था लडखड़़ा गई है।

कई करोड़ रुपये का भुगतान बकाया
नवंबर 2015 से तीनों नगर परिषदों में डोर-टू-डोर कचरा कलेक्शन व बड़े वाहनों से कचरा प्लांट कचरा लाने का काम हो रहा है। जबसे प्रक्रिया शुरू हुई तबसे अबतक का भुगतान नहीं किया गया। बरही में दो वाहन जाते थे, जिनका 77 लाख रुपये, कैमोर में 3 वाहन जिनका 80 लाख रुपये, विजयराघवगढ़ में 2 वाहन जाते थे जिनका 44 लाख रुपये बकाया है। इस पूरी प्रक्रिया में 22 कर्मचारी लगे हुए हैं। सभी में दो-दो हेल्पर अलग से तैनात हैं। परिषदों द्वारा भुगतान करने का आश्वासन देकर काम तो कराया गया, लेकिन अब भुगतान नहीं किया जा रहा। इसी तरह से शहर का ढाई करोड़ रुपये का भुगतान बकाया है।

खास--खास
- तीनों नगर परिषदों के भुगतान संबंधी फाइल विजयराघवगढ़ एसडीएम के पास 10 दिन से अटकी, नहीं हो रहे दस्तखत।
- कस्बों में कचरा उठाव और बेहतर सफाई व्यवस्था के लिए जनप्रतिनिधि भी नहीं दे रहे ध्यान।
- कोराना वायरस के चलते सफाई पर फोकस फिर भी डोर-टू-डोर कचरा कलेक्शन और कचरा संग्रहण पर नहीं फोकस।
- पूर्व में भी कंपनी द्वारा बंद कर दिए गए थे वाहन, कलेक्टर के आश्वासन के बाद शुरु कराए गए थे वाहन।

इनका कहना है
लाखों रुपये का भुगतान नवंबर 2015 से बकाया है। अनुबंध के अनुसार काम किया गया, लेकिन तीनों नगर परिषदों द्वारा भुगतान नहीं किया जा रहा। इसलिए वाहन दो माह से नहीं भेजे जा रहे। 10 दिन से फाइल के लिए विगढ़ एसडीएम के चक्कर काट रहे हैं।
अलोक कुमार, प्रोजेक्ट हेड।

इनका कहना है
नगर में नवंबर माह से गाडिय़ा नहीं आ रहीं। भुगतान भी 2015 से रुका है। पुराने समय में भुगतान क्यों रोका गया यह तो पता नहीं है। अब भुगतान के लिए फाइल तैयार है। प्रशासक स्तर पर अनुमति की प्रक्रिया चल रहा है।
संजय समुंदे्र, सीएमओ, विजयराघवगढ़।

इन दिनों कोरोना वायरस के चलते सभी को स्थिति परिस्थिति समझना होगा। कचरा गाडिय़ां दो माह से क्यों नहीं जा रहीं मैं तत्काल चर्चा करता हूं। भुगतान इतने दिनों से क्यों लंबित है तीनों सीएमओ को तलब किया जाएगा। समस्या का समाधान कर व्यवस्था को यथावत किया जाएगा।
शशिभूषण सिंह, कलेक्टर।