कटनी. जीव मात्र की रक्षा के लिए जिन्होंने हलाहल जहर का प्याला लिया ऐसे औघड़दानी भगवान भोलेनाथ की उपासना का महापर्व सोमवार को महाशिवरात्रि है। समूचे विश्व में भगवान शिव की विशेष उपासना का क्र जारी हो गया है। महाशिवरात्रि के इस पवित्र दिन के लिए हम आपको दर्शन कराने जा रहे हैं ऐसे शिवलिंग का जो स्वयंभू हैं। हम बात कर रहे हैं कटनी जिले के बरही नगर स्थित विजयनाथ धाम का। जहां पर 7 दिन तक चली खुदाई के बाद भगवान शिवलिंग रूप में प्रकट हुए हैं। इस प्रसिद्ध स्थल पर पूरे महीने विशेष मेला जैसे माहौल रहता है। इस मंदिर में कई ऐसे रहस्य समाए हैं जो आपको हैरान कर देंगे। यह मंदिर बड़ा ही अनूठा है। यह मंदिर कौमी एकता की मिसाल भी है। इसका जीता जागता उदाहरण है जिले के बरही में स्थित विजयनाथ धाम…। यह शिव मंदिर एक मुस्लिम धर्मावलम्बी की पहल पर बना था। मुस्लिम धर्मावलम्बी ने इसके लिए अपनी 28 एकड़ जमीन दान में दे दी थी। यह मंदिर जन आस्था के साथ सामाजिक समरसता की भी मिसाल है। सावन और महाशिवरात्रि पर यहां विशेष मेला लगता है। बताया जता है कि मंदिर में विराजित शिवलिंग का आकार अपने आप दिनों दिन बढ़ रहा है।
स्वयं-भू हैं शिवलिंग
बरही निवासी सतीश तिवारी, केएल सोनी, संदीप अनुसार आज से लगभग 101 वर्ष पहले बरही थाने में पदस्थ दुर्गा प्रसाद पाण्डेय को शिवजी ने स्वप्न दिया कि वे गांव के बाहर जो दमदहा नाला है वहां कुल्लू के पेड़ के नीचे शिवलिंग दबा हुआ है। दुर्गा प्रसाद ने स्वप्न के बारे में नगर के लोगों को अवगत कराया। ग्रामीणों ने उसे गंभीरता से लिया और पूजा-पाठ के बाद खुदाई शुरु की। इस शिवलिंग को स्वयं प्रकट व स्वयं-भू माना जाता है।
एक सप्ताह तक चली थी खुदाई
स्थानीय हरप्रसाद स्वर्णकार ने बताया कि शिवजी के स्वप्न के अनुसार कुल्लू के पेड़ के नीचे खुदाई का काम शुरु किया गया। दमदहा नाला के पास लगभग एक सफ्ताह खुदाई की गई, लेकिन शिवलिंग नहीं मिला। ग्रामीणों ने स्वप्न को झूठा मानकर खुदाई बंद कर दी। कुछ दिनों बाद उन्हें पुन: स्वप्न आया और शिवजी ने बताया कि समीप ही पहाड़ी पर लगे कुल्लू के पेड़ के पास शिवलिंग है, उसी स्थान में फिर खुदाई करो। ग्रामीणों ने फिर प्रयास किया और उसी स्थान पर लगभग दो फीट की गहराई पर एक छोटे से आकार में शिवलिंग निकल आया। शिवलिंग मिलते ही लोग खुशी से झूम उठे।
तभी से पड़ गया यह नाम
पूर्व नगर परिषद अध्यक्ष बालाप्रसाद वर्मा, कंछेदी ताम्रकार ने बताया कि लगातार एक सप्ताह तक खुदाई के बाद शिवलिंग न मिलने से लोग निराश हो गए थे। लेकिन फिर से की गई खुदाई में मिली विजय के बाद से इस धाम का नाम विजयनाथ धाम रख दिया गया। बाबा का शिवलिंग खुदाई में निकलने की बात पूरे नगर और क्षेत्र में फैल गई और यहां हर वर्ग के लोगों की खुशी का ठिकाना न रहा। इसके बाद मंदिर की अधारशिला रखने का विचार बनाया गया।
मो. इलाहीबख्श बने मिसाल
स्थानीय गिरजा प्रसाद ने बताया कि बड़े ही धूमधाम माहौल के साथ उस समय बाबा का पूजन हुआ। तभी बरही निवासी मो. इलाहीबख्स आगे आए और कहा कि बाबा की स्थापना के लिए वे जमीन अपनी दान करना चाहते हैं। मो. इलाहीबक्स ने उसी समय 28 एकड़ जमीन बाबा विजयनाथ मंदिर को दान में दे दी। आज इसी विशाल प्रांगण में न सिर्फ मंदिर बना है बल्कि भव्य मेले का आयोजन भी होता है। इस मंदिर के निर्माण में सोनी समाज के लोगों भी बड़ा योगदान है।
लगातार बढ़ रहा आकार
यह धाम बड़ा ही रमणीक है और अनूठेपन को संजोए हुए है। स्थानीय गिरजा प्रसाद एवं पं. श्यामनंदन तिवारी ने बताया कि 101 वर्ष पहले जब यह शिवलिंग निकला था वह काफी छोटा था, आज वह लगभग दोगुने आकार का हो गया है। इस धाम में प्रतिदिन मेले सा माहौल रहता है वहीं सोमवार, श्रावण सोमवार, प्रदोष तिथि, संतान सप्तिमी, हलषष्ठी, नागपंचमी, त्रयोदशी, बसंत पंचमी, महाशिवरात्रि आदि में विशेष आयोजन होते हैं।
जगजाहिर है मेला
बरही नगर निवासी राजेश्वर व रामदेव मिश्रा, संदीप ने बताया कि विजयनाथ धाम बरही का मेला क्षेत्र बड़े मेलों से एक है। इसकी ख्याति दूर-दूर तक हैं। महाशिवरात्रि के दिन यहां देश के कोने-कोने श्रद्धालु आते हैं। मेला बसंत पंचमी से शुरू होकर महाशिवरात्रि तक यानी लगभग 20 दिन तक चलता है। यह क्षेत्र में आस्था का प्रमुख केंद्र है। ऐसी मान्यता है कि सावन और महाशिवरात्रि के दिन यहां पर सच्चे मन से की गई प्रार्थना को भगवान भोलेनाथ अवश्य पूरा करते हैं।