कटनी. हैदराबाद में महिला पशु चिकित्सक के साथ हुए जघन्य अपराध को लेकर जिले के पशु विभाग में कार्यरत चिकित्सक व स्टॉफ में खासा आक्रोश है। सुरक्षा को लेकर शुक्रवार को कलेक्टे्रट पहुंचे और हक के लिए आवाज बुलंद की। मुख्यमंत्री कमलनाथ व पशु विभाग मंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा। शीघ्र ही व्यवस्था में सुधार की मांग की। ज्ञापन के माध्यम से पशु चिकित्सकों ने कहा कि प्रदेश में 24 घंटे सातों दिन पशु चिकित्सा सेवा, पशुधन संजीवनी 1962 लागू है। इस योजना में महिला-पुरुष सभी पशु चिकित्सकों एवं क्षेत्रीय स्टॉफ को 24 घंटे आकस्मिक सेवा में 40 से 50 किलोमीटर दूर जाने की बाध्यता रहती है। हैदराबाद कांड के बाद महिला पशु चिकित्सिकों व स्टॉफ में भय का माहौल है। 1962 पशुधन संजीवनी के चलते रात्रिकालीन सेवा में हर समय दुर्घटना की आशंका बनी रहती है। इस योजना में शासन द्वारा केवल सुबह 10 से शाम 5 बजे तक ही किया जाए। वाहन न होने के कारण स्वयं के वाहन से यात्रा के लिए भी बाध्य किया जाता है। इसमें महिला स्टॉफ को भारी जोखिम उठाना पड़ रहा है।
बनाते हैं दबाव
स्थानीय गौरक्षा एवं गौ सेवा से संबंधित संगठन संस्थाएं आएदिन रोड एक्सीडेंट सहित अन्य मामलों में अर्धरात्रि में पशु चिकित्सकों व स्टॉफ को मौके पर सेवा देने के लिए बाध्य करते हैं। इस दौरान विभाग द्वारा पुलिस द्वारा सुरक्षा की कोई व्यवस्था नहीं होती। ज्ञापन सौंपने के दौरान डॉ. आरके सोनी अध्यक्ष प्रांतीय राजपत्रित पशु चिकित्सा अधिकारी संघ, बीआर अरखेल अध्यक्ष सहायक पशु चिकित्सा क्षेत्र अधिकारी संघ, डॉ. रवि कटारिया, डॉ. विकास गुप्ता, डॉ. खुशबू जैन, ज्योति सेन, नेहा मरावी, अलका चौबे, विमला, अतुल तिवारी आदि मौजूद रहीं।
महिला चिकित्सकों ने पुलिस को सराहा
वहीं हैदराबाद पुलिस द्वारा आरोपियों के किए गए एनकाउंटर पर महिला चिकित्सकों ने कहा कि उसे न्याय मिला है, लेकिन जिसकी बेटी, बहन छिनी है उसकी भरपाई नहीं हो सकती। इसलिए ऐसा सख्त कानून बने, जिससे अपराधी इस तरह का दुस्साहस न करें।