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500 फीट की खुदाई में भी नहीं मिल रहा पानी, खेती भी कमजोर, विवश किसान

पेयजल समस्या से जूझ रहे बस्ती के लोग, अतिक्रमण की भी है समस्या, बहोरीबंद क्षेत्र का ग्राम बरतरी विकास से अछूता

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कटनी

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Balmeek Pandey

Oct 14, 2020

500 फीट की खुदाई में भी नहीं मिल रहा पानी, खेती भी कमजोर, विवश किसान

500 फीट की खुदाई में भी नहीं मिल रहा पानी, खेती भी कमजोर, विवश किसान

बहोरीबंद. गांवों का संपूर्ण विकसित तभी हो सकते हैं जब वहां पर मूलभूत सुविधाओं के साथ कृषि, शिक्षा और स्वास्थ्य की बेहतर सुविधाएं हों। युवाओं के हाथ में रोजगार, स्वरोजगार हो, किसानों को सिंचाई के लिए पर्याप्त बानी, बिजली, बेहतर खाद-बीत की उपलब्धता हो। इन सबकी बात जिम्मेदारों द्वारा कागजों पर तो की जाती हैं, लेकिन हकीकत से गांव अभी भी कोसों दूर हैं। सुविधाओं से वंचित हैं। ऐसे में गांवों का विकास न सिर्फ अवरुद्ध है बल्कि ग्रामीणों में हताशा और निराशा भी साफ देखी जा सकती है। बहोरीबंद जनपद क्षेत्र की ग्राम पंचायत बरतरी की जब पत्रिका ने हकीकत जानी और जो पीड़ा ग्रामीणों ने बयां की वह वाकई चौकाने वाली थी। गांव ने एक से ढ़कर जटिल समस्याएं गिनाईं। चम्मू लाल प्रजापति, तुलसीराम मेहरा, बिहारी आदिवासी, रामगुलाम मेहरा, मोहनलाल मेहरा, उम्मेद मेहरा, श्यामलाल प्रजापति ने बताया कि यहां की सबसे बड़ी समस्या पानी और पीएम आवास हैं। पानी चाहे पीने का हो या सिंचाई के लिए पठारी क्षेत्र के इस गांव में जल स्तर भी बहुत नीचे है। 500 फीट तक खुदाई करने पर भी कभी-कभी एक बूंद पानी नहीं निकलता। गर्मी की आहट आते ही यहां पर पेयजल के लिए बड़ी जद्दोजहर करनी पड़ती है। बारिश के जल को सहेजने, स्थाई समाधान को लेकर कोई प्रयास नहीं हो रहे।

ग्राम-बरतरी
ग्राम पंचायत-बरतरा-बरतरी
आबादी-2558
तहसील-बहोरीबंद
फोटो-39

खेती भी भगवान भरोसे
कुछेक किसानों को छोड़ दिया जाए जिनके पास निजी साधन हैं वहीं तो यहां की खेती वर्षा पर ही निर्भर है। यहां की प्रमुख खेती धान, गेंहू की है। इसकी अर्थव्यवस्था कृषि पर ही निर्भर है। 2558 आबादी वाली इस पंचायत में ज्यादातर आबादी आदिवासी है। लोगों ने बताया कि यहां पानी की टंकी तो बनी, लेकिन आजतक टंकी का पानी नहीं पी पाए और टंकी भी गिर गई। दूसरी समस्या प्रधानमंत्री आवास की है। ग्रामीणों ने बताया कि यहां बहुत ही कम संख्या में पीएम आवास आए हैं, जबकि ज्यादातर गरीब लोग यहां निवास करते हैं।

नालियों का नहीं निर्माण
्रतुलसीराम मेहरा, बिहारी आदिवासी, रामगुलाम मेहरा, मोहनलाल मेहरा, उम्मेद मेहरा आदि ने बताया कि गांव में समस्याएं तो कई हैं। गांव में सड़क तो बनी है, लेकिन नाली का निर्माण नहीं कराया गया। नाली न होने से गंदा पानी सड़क पर बहता है। बस स्टैंड में अतिक्रमण है। स्कूल और बस स्टैंड के चारों तरफ लोग शासकीय जमीन पर कब्जा किये हैं। जिससे अन्य भवन नहीं बन पा रहे है। जिम्मेदार तमाम समस्याओं पर ध्यान नहीं दे रहे।