राघवेंद्र चतुर्वेदी @ कटनी. आदिवासी विकासखंड ढीमरखेड़ा में 10 अगस्त 2016 को दौरे पर आए मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने उद्योगों के लिए जमीन चिन्हित करने की घोषणा की थी। तब उन्होंने कहा था कि उद्योगों के लिए जमीन चिन्हित होने से उद्योगपतियों को सहूलियत होगी। युवाओं के लिए रोजगार के अवसर बढ़ेंगे। सीएम की घोषणा के बाद प्रशासन ने जमीन चिन्हित करने की प्रक्रिया पूरी कर उद्योग स्थापना के लिए मध्यप्रदेश इंडस्ट्रीयल डेवलपमेंट कार्पोरेशन (एमपीआइडीसी) को सौंप दी। लेकिन, पांच साल बाद भी युवाओं को उद्योगों से रोजगार मिलना तो दूर, यहां किसी भी उद्योग की नींव तक नहीं रखी जा सकी। साफ दिख रहा है कि अफसरों ने थोड़ी सी भी गंभीरता नहीं दिखाई। नतीजा है कि रोजगार के अवसरों के लिए यहां का युवा अभी सपना ही देख रहा है।
ढीमरखेड़ा जनपद के उपाध्यक्ष जितेंद्र सिंह ठाकुर बताते हैं कि जनपद परिसर में आयोजित कार्यक्रम में मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने उद्योग स्थापना के लिए जमीन चिन्हित करने की घोषणा की थी। इस घोषणा से युवाओं को बड़ी उम्मींदे थी। सीएम की घोषणा के बाद भी संबंधित विभाग के अधिकारी गंभीरता से काम नहीं कर रहे हैं। उद्योग स्थापना के लिए जमीनी स्तर पर काम नहीं हो रहा है।
भारतीय किसान संघ के जिलामंत्री राजेंद्र पटेल बताते हैं कि आदिवासी बाहुल्य शहडोल संसदीय क्षेत्र के ढीमरखेड़ा विकासखंड में सीएम की घोषणा को अमल में लाने के मामले में संबंधित विभाग के अधिकारी और शासन-प्रशासन बेपरवाह हैं। जिम्मेदारों की इसी बेपरवाही का नतीजा है कि अंचल का युवा रोजगार की बाट जोह रहा है। जहां जमीन सुरक्षित है, उसके बारे में अधिकारी लोगों को समझा नहीं पा रहे हैं।
मध्यप्रदेश इंडस्ट्रियल डेव्हलपमेंट कार्पोरेशन जबलपुर के महाप्रबंधक आरसी चक्रवर्ती के अनुसार कटनी में औद्योगिक इकाइयों की स्थापना के लिए जमीन बैंक का पूल बना हुआ है। इसमें 11 सौ हेक्टेयर से ज्यादा जमीन शामिल हैं। कई स्थान हॉइवे और रेलवे कनेक्टिविटी में भी है। हमारी पूरी कोशिश है कि उद्योग स्थापना के लिए निवेशकों को आकर्षित करें। इसके लिए सम्मिलत प्रयास की जरूरत है।
दावे कागजी- उद्योग के लिए जमीन दिखाई एक ग्वालियर चली गई, दूसरी गुना – एमपीआइडीसी के अधिकारियों का दावा है कि उन्होंने तो बहुत कोशिश की है। यह अलग बात है कि उनकी कोशिशें कागजों के बाहर कहीं नजर नहीं आतीं। अधिकारियों का कहना है कि रक्षा और कांच इकाई के लिए मौके पर जाकर जमीन भी दिखाई, लेकिन लाभ नहीं हुआ। असल तस्वीर यह है कि एक इकाई ग्वालियर चली गई और दूसरी गुना। जानकार बताते हैं कि आदिवासी अंचल में युवाओं के लिए उद्योग से रोजगार के अवसर इसलिए भी चुनौती है, क्योंकि औद्योगिक क्षेत्र में निजीकरण हावी है। सरकारी उपक्रम दम तोड़ रहे हैं।
काम की जानकारी
– औद्योगिक विकास के लिए चिन्हित जमीन के लिए जरूरी है कि निवेश सौ करोड़ रूपए से अधिक हो। जिले में बहुतायत में जमीन होने के बाद उद्योग नहीं लगने के पीछे सही ब्रांडिंग का अभाव भी एक कारण है।
– स्लीमनाबाद और आसपास मार्बल खनिज की प्रचुरता और उद्योग के लिए जमीन सुरक्षित होने के बाद इकाई की स्थापना नहीं हो सकी। उद्योग में हाई रिस्क और हाई बेनिफिट का गणित होने के कारण भी अंचल के निवेशक रूचि नहीं लेते।
– ढीमरखेड़ा में चिन्हित जमीन में एथेलॉन प्लांट की भी तैयारी थी। इस इकाई के लिए पानी की ज्यादा जरूरत होती है, तो पता चला कि बेलकुंड में पानी कम है और हिरण नदी भी गर्मी में सूख जाती है।
– उद्योग के लिए सुरक्षित जमीन को निवेशकों को कलेक्टर गाइडलाइन से आधा शुल्क में दिए जाने का प्रावधान है। इसमें सस्ती दर पर जमीन मिलती है। चिन्हित जमीन में खेती, पशुपालन, मछलीपालन, मशरूम उत्पादन शामिल नहीं है।
उद्योग स्थापना के लिए कटनी जिले में 8 स्थानों पर सुरक्षित है 1134 हेक्टेयर जमीन
– 558 मुरवारी ढीमरखेड़ा
– 104 करौंदी ढीमरखेड़ा
– 135 सिमरा रीठी
– 65 बोहता कैलवारा
– 58 बंडा हॉइवे 43 से लगी
– 99 देवरी
– 65 तिहारी
– 50 विलायतकला
(आंकड़े हेक्टेयर में, उद्योगों के लिए सुरक्षित जमीन जिले के अलग-अलग क्षेत्र में है.)