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CG Shiv Mandir: विश्व के अद्भुत 25 मुख वाला शिवलिंग छत्तीसगढ़ में, दर्शन मात्र से पूरी होती है मनोकामना

CG Shiv Mandir: विश्व के अद्भुत 200 वर्ष से अधिक प्राचीन पंचमुखी बूढ़ा महादेव शिवलिंग के पीठ रहस्य अत्यंत दुर्लभ है। संभवत: मध्यभारत में यह एकलौता 25 मुख वाला शिवलिंग है..

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CG Shiv Mandir

CG Shiv Mandir: कवर्धा और पंडरिया रियासत के लगभग सभी गांवों में शिव मंदिर मिलेंगे। इसके पीछे का महत्वपूर्ण कारण है कि इन दोनों रियासतों में शैव संप्रदाय की बहुलता अर्थ शिव जी को मानने वालों की बहुतायत रही है। दूसरा कारण है कि जनजातीय गोंड समाज में भी गौरा-गौरी और बड़ा देव, बूढ़ा देव के रूप में शिवजी पूजित हैं।

CG Shiv Mandir: धर्मनगरी कबीरधाम

भारत की चारों दिशाओं से द्वादश ज्योतिर्लिंग अपनी कृपा बरसा रहे हैं। कुछ इसी तरह कबीरधाम जिले में स्थापित शिवलिंग भी अपनी कृपा बरसा रहे हैं। इसमें 12 प्राचीन शिवलिंग पर बात करते हैं कि कवर्धा के पूर्वोत्तर में पंडरिया स्टेट की राजधानी 15वीं सदी में स्थापित कामठी का विशाल शिवलिंग और मिनी भेड़ाघाट के नाम से विख्यात घोघरा जो कि पांडातराई के निकट का 18 वीं सदी का प्राचीन शिवलिंग यहां मेला भरता है।

स्वामी स्वरूपानंद ने कहा था अद्भुत शिवलिंग

पूर्व में जालेश्वर स्वयंभू शिवलिंग डोंगरिया जिसे शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद जी ने अद्भुत शिवलिंग कहा था। गौरकांपा का शिवलिंग जो 150 वर्ष पुराना है। दक्षिण पूर्व में झिरना में स्थापित प्राचीन शिवलिंग इसके जलहरी में शिलालेख अंकित है और राजपरिवार कवर्धा की राजमाता द्वारा स्थापित क्षेत्र का एकमात्र शिवलिंग जिसके मध्य में सर्प अंकित है रानी सागर का सिद्धेश्वर शिवलिंग। उत्तर में पचराही का 11वीं सदी का पंचायतन शिवलिंग और भोरमदेव का 11वीं सदी का हाटकेश्वर शिवलिंग, जो 11वीं सदी का है। दक्षिण-पूर्व में मोतेसरा का वामदेव(चतुर्मुखी) शिवलिंग जो कि 10से 11वीं सदी का है।

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कवर्धा नगर का विख्यात पंचमुखी बूढ़ामहादेव शिवलिंग और राधाकृष्ण बड़े मन्दिर का 1802 में स्थापित प्राचीन शिवलिंग और उत्तर पश्चिम में रामचुआ का प्राचीन शिवलिंग जिले की धर्मप्रेमी श्रद्धालुओं की मनोकामना पूर्ण कर रहे हैं।

पंचमुखी बूढ़ा महादेव में 25 तत्व निहित

धर्मनगरी कवर्धा में विश्व के अद्भुत 200 वर्ष से अधिक प्राचीन पंचमुखी बूढ़ा महादेव शिवलिंग के पीठ रहस्य अत्यंत दुर्लभ है। संभवत: मध्यभारत में यह एकलौता 25 मुख वाला शिवलिंग है। पंचमुखी स्वरूप क्यों और इसमें निहित तत्व कौन-कौन से हैं इस पर जिला पुरातत्व समिति के सदस्य व इतिहासकार आदित्य श्रीवास्तव ने विस्तार से चर्चा की। उन्होंने बताया कि कवर्धा में श्रीराधाकृष्ण बड़ेे मन्दिर से शंकरी नदी के तट पर बूढ़ा महादेव मन्दिर तक का क्षेत्र हरिहर क्षेत्र है।

श्री जगन्नाथ मन्दिर में हरि(जगन्नाथ) और शिवलिंग राधाकृष्ण मन्दिर में श्रीकृष्णजी(हरि) और शिवलिंग नदी तट पर श्री राम(हरि) मन्दिर और पंचमुखी बूढ़ा महादेव अर्थात हरि और हर विराजमान हैं। बूढ़ा महादेव पंचमुखी हैं और प्रत्येक मुख में भी 5-5 मुख अर्थात 25 मुख हुए। इन 25 मुखों में निहित रहस्य को जानते हैं। सांख्य सूत्र(1/61)में प्राणी में 25 तत्व माने गए हैं। इसमें प्रकृति, पुरुष, महत(बुद्धि) मन और अहंकार हैं। वहीं ज्ञानेन्द्रियां आंख, कान, नाक, जीभ और त्वचा। कर्मेंद्रियां मुंह, पैर, हाथ, गुदा और लिंग। पांच तन्मात्र शब्द, स्पर्श, दृष्टि, स्वाद और गंध। 5 महाभूत आकाश, वायु, अग्नि, जल और पृथ्वी। इस तरह 25 प्रकृति होते हैं।

अत्यावश्यक 25 प्रकृति तत्व मनुष्य के जीवन में सदुपयोगी

शास्त्रों के अनुसार सृष्टि के आरंभ में जब कुछ नहीं था, तब प्रथम देव शिव ने ही सृष्टि की रचना के लिए पंच मुख धारण किए। त्रिनेत्रधारी शिव के पांच मुखों से ही महाभूतों आकाश, पृथ्वी, जल, वायु और अग्नि की उत्पत्ति हुई। भगवान शिव के ये पांच मुख पञ्चतत्व माने गए हैं। इसीलिए उन्हें पंचानन और पञ्चवक्त्र कहा जाता है।

पंच महाभूत को भारतीय दर्शन में सभी पदार्थों के मूल माने गए हैं जो शिवजी के पंचमुख हैं। तैतरीय उपनिषद में उल्लेख आता है। आकाश के पश्चात वायु, वायु के बाद अग्नि, अग्नि के बाद जल, जल के बाद पृथ्वी से औषधि, औषधि से अन्न, अन्न से वीर्य, वीर्य से पुरुष अर्थात शरीर उत्पन्न होता है। पंचमुखी बूढ़ा महादेव संसार के लिए अत्यावश्यक इन 25 प्रकृति के अजस्र स्रोत हैं। साथ ही ये संदेश देते हैं कि इन 25 तत्वों का सदुपयोग कर मनुष्य अपना जीवन सार्थक और आनन्दमय बना सकता है। एक और महत्वपूर्ण बात है यदि ध्यानपूर्वक इन पंचमुखी शिवलिंग को देखें तो मध्य का शिवलिंग गणेश जी का आभास दिलाता है।

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