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नक्सलियों ने पर्चे फेंक जनता से की अपील, विकास के नाम पर धोखा हो तो ना करें बीजेपी को वोट

नक्सलियों ने पर्चे में मुख्य रूप से भाजपा और आरएसएस के खिलाफ लिखा गया है।

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election Chhattisgarh 2018

नक्सलियों ने पर्चे फेंक जनता से की अपील, विकास के नाम पर धोखा हो तो ना करें बीजेपी को वोट

कवर्धा . छत्तीसगढ़ चुनाव में नक्सली अब कवर्धा में भी लोकतंत्र को आघात करने पर्चा फेंकने लगे हैं। नक्सली के जीआरबी डिवीजन कमेटी ने इसमें पर्चे के माध्यम से चुनाव बहिष्कार करने की बात कही है।

तरेगांव थाना अंतर्गत ग्राम लरबक्की, आमानारा, गाडाघाट गांव में पर्चा फेंके जाने की सूचना है। पर्चा स्कूल में भी फेंका गया है। वहीं पेड़ों पर चस्पा भी किया गया है। विधानसभा चुनाव के द्वितीय चरण के तहत कबीरधाम में 20 नवंबर को मतदान होना है और इस तरह चार दिन पहले ही नक्सलियों के नाम से पर्चा फेंका जाना काफी गंभीर है। पर्चें में मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ में हो रहे चुनाव बहिष्कार की बात कही गई है। इसमें दो प्रकार के पर्चे हैं।

एक पर्चे में केवल छह बिंदुओं पर बात लिखी है जबकि दूसरे पर्चे में विस्तृत विवरण दिया गया है। मुख्य रूप से भाजपा और आरएसएस के खिलाफ लिखा गया है। वहीं बालाघाट, मंडला, कवर्धा जिले में पांचवीं-छठवीं अनुसूची लागू करने संघर्ष तेज करने की बात कही। हालांकि पुलिस प्रशासन इस तरह के किसी भी पर्चा फेंके जाने व मिलने की बात को स्वीकार नहीं कर रहे हैं।

पर्चे में नक्सलियों ने विभिन्न मुद्दों और सुविधा देने की बात कही है। पर्चे में लिख है कि मध्यप्रदेश-छत्तीसगढ़ में किसानों की समस्या, विस्थापन, भ्रष्टाचार, महंगाई, बेरोजगार, कुपोषण, उचित शिक्षा की सुविधा, स्वास्थ्य की सुविधा, स्वच्छ पीने का पानी, हर परिवार को आवास का मुद्दा पर वोट मांगने आने वाले से सवाल करो।

पिछले माह ही 1-2 अक्टूबर को ग्राम शंभूपीपर के प्राथमिक स्कूल में लाल रंग से लिखा पर्चा चस्पा मिला था। इसमें नक्सलियों ने ग्रामीणों को सीधे धमकी दी थी। इसके पूर्व 5 मई को कामाडबरी और बैजलपुर में पर्चा फेंका गया था। इसमें भी नक्सलियों ने शासन खिलाफ और अपने उद्देश्यों का जिक्र किया था।

जिले में सुरक्षित मतदान हो सके, इसके लिए ही बीएसएफ और आईटीपीबी के 5000 से अधिक जवान पहुंच चुके हैं, जो ग्रामीण व मतदान केंद्रों की सुरक्षा के लिए पर्याप्त हैं। नक्सली हमेशा से ही लोकतंत्र के खिलाफ रहे हैं ऐसे में इस तरह चुनाव बहिष्कार करने बात कहते रहते हैं।