
अब भारत में खेल केवल स्वस्थ्य रहने तक सीमित नहीं रहा, इसमें सुनहरा भविष्य भी छिपा
कवर्धा.
कवर्धा नगर के आउटडोर स्टेडियम कवर्धा में प्रधान आरक्षक वसीम रजा कुरैशी ट्रेनर/कोच द्वारा खेल युसू 100 मीटर दौड़, 800 मीटर दौड़, गोला फंेक, भला फेंक, चक्कर फेंक आदि खेल के खिलाडिय़ों को प्रशिक्षण दिया जाता है। इसके अलावा वह जिले के विभिन्न ग्रामवासी युवाओं व अन्य जिले के योग्य युवक-युवतियों को नगर के करपात्रीजी आउटडोर स्टेडियम में पुलिस, आर्मी, एसएसबी, आइटीबीपी, ससस्त्र बल, सब इंस्पेक्टर और अन्य भर्ती प्रशिक्षण देते हैं। अब तक सैकड़ों युवक-युवती विभिन्न भर्ती प्रक्रिया में चयनित हो चुके हैं। इसका प्रमुख श्रेय राष्ट्रीय खिलाड़ी और शहीद पंकज विक्रम एवार्ड से सम्मानित प्रधान आरक्षक वसीम रजा कुरैशी को भी जाता है। क्योंकि युवाओं के लिए यह एक माध्यम बने, जिससे कि उन्हें एक राह मिली।
खेल महत्वपूर्ण
वसीम रजा कुरैशी का कहना है कि खेल तंदुरुस्ती बनाए रखने के लिए बहुत ही महत्वपूर्ण है। अलग-अलग प्रकार के खेल हमें जीवन जीने का तरीका भी सिखाते हैं। खेल से अच्छी तरह से एक्सरसाइज होती है। खेलना ना केवल शारीरिक रूप से हमारे लिए अच्छा होता है, बल्कि मानसिक रूप से भी अच्छा होता है। खेल खेलने से हमारी मानसिक एकाग्रता भी बढ़ती है। नियमित रूप से खेलना एक व्यक्ति को कई रोगों से मुक्त करता है।
बीमारी दूर रहती
राष्ट्रीय खिलाड़ी कुरैशी ने कहा कि अगर हम रोजाना खेलने की आदत डालें तो हम बीमारियों से दूर रहते हैं। अलग-अलग प्रकार के खेल खेलने से हमारी कई बीमारी जैसे अलग-अलग शरीर के अंगों से जुड़े दर्द, मोटापा, अधिक वजन और हृदय से जुड़े रोगों को ठीक करता है। खेल किसी इंसान के जीवन में उतना ही आवश्यक है जितना कि शिक्षा। खेल खेलने से ही इंसान के अंदर जितने की तथा सफ लता पाने की इच्छा जागरुक होती है।
अब खेल अनिवार्य
खिलाडिय़ों को लेकर चर्चा करते हुए उन्होंने बताया कि भारत सरकार ने विद्यालयों में स्पोट्र्स की गतिविधियों को अनिवार्य कर दिया है। अब हर बच्चे का किसी ना किसी खेल में भाग लेना बहुत ही अनिवार्य हो गया है। यह बढ़ते हुए बच्चों के लिए बहुत ही आवश्यक है। यदि खेल में लगातार अपना समय, अभ्यास करें तो इसमें बेहतर भविष्य है। सरकार खिलाडिय़ों की आर्थिक रूप से भी मदद करती है। हर चीज उपलब्ध कराई जाती है।
प्रतिभा की कमी नहीं
भारत जैसे विशाल देश में प्रतिभा की कोई कमी नहीं है। हमें बस प्रतिभा की पहचान करनी है। राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय खेलों के मामले में भारत कभी भी पीछे नहीं रहा है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपने खेल का प्रदर्शन बखूबी किया है और हर वक्त खेलों के प्रति लोगों को जागरूक भी करता रहता है। भारत सरकार ने बच्चों को न केवल शैक्षणिक रूप से मजबूत करने की कोशिश की है बल्कि शारीरिक व मानसिक स्थिति पर भी जोर दिया है।
Published on:
28 Aug 2022 08:51 pm
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