कोरोनाकाल में कवर्धा जिला अस्पताल में पांच माह से धूल खा रहा 27 लाख का ऑक्सीजन सिस्टम, संजीवनी बना कबाड़

100 बिस्तर जिला अस्पताल में लगाया गया ऑक्सीजन प्वाइंट का उपयोग पांच माह बाद भी शुरू नहीं हो पाया है। 27 लाख रुपए खर्च के बाद भी कार्य का वेरीफिकेशन नहीं हो सका है जिसके कारण मामला अटका हुआ है।

By: Dakshi Sahu

Published: 08 Dec 2020, 02:15 PM IST

कवर्धा. 100 बिस्तर जिला अस्पताल में लगाया गया ऑक्सीजन प्वाइंट का उपयोग पांच माह बाद भी शुरू नहीं हो पाया है। 27 लाख रुपए खर्च के बाद भी कार्य का वेरीफिकेशन नहीं हो सका है जिसके कारण मामला अटका हुआ है। शुरूवाती दौर में जिला अस्पताल के 50 फि क्स जगहों पर ऑक्सीजन प्वाइंट लगाया, ताकि आपातकाल में मरीजों को तत्काल बेड पर ही ऑक्सीजन की सप्लाई हो सके। इसके लगने से अलग से ऑक्सीजन सिलेंडर की जरूरत नहीं पड़ती। मरीजों की सुविधा के लिए हर बेड के पास प्वाइंट लगाया गया है। लेकिन विभागीय लचरता के चलते ये सेवा अब तक शुरू नहीं हो पाई है।

फाइलों में अटक गया ऑक्सीजन सप्लाई
ऑक्सीजन प्वाइंट लगाने के लिए 27 लाख रुपए में ठेका दिया गया था, जिसके मुताबिक ठेकेदार ने अपना काम पूरा कर दिया है। काम पूरा होने के बाद ठेकेदार ने जिला अस्पताल को ऑक्सीजन प्लांट हैण्डओवर करना चाहा, लेकिन सिविल सर्जन ने कार्य वेरिफिकेशन के बाद ही हैंडओव्हर लेने की शर्त रखी है। जिसके चलते पांच माह से न तो वेरिफिकेशन हो पाया है और न ही ये ऑक्सीजन सप्लाई शुरू हो सका है। जिला अस्पताल के सिविल सर्जन डॉ. एसके तिवारी का कहना है कि ऑक्सीजन प्लांट तो ठेकेदार ने तैयार कर दिया है, लेकिन उसमें कुछ खामियां हैं। कुछ समय पूर्व इसे शुरू करने के लिए ट्रायल लिया गया था। तब कुछ प्लाइंट पर ऑक्सीजन की सप्लाई नहीं हो रही थी। इसलिए इसे शुरू नहीं किया जा सका है।

मरीजों को जान का खतरा
सिविल सर्जन ने बताया कि आधे-अधूरे रूप से शुरू करने पर मरीज की जान को खतरा हो सकता है। इसलिए कलेक्टर ने वेरिफिकेशन के लिए एक निजी संस्था को निर्देशित किया था, जिसकी रिपोर्ट आ चुकी है। रिपोर्ट देखने के बाद ही इसे शुरू करने को लेकर निर्णय लिया जाएगा। फिलहाल जिला अस्पताल में ऑक्सीजन की कोई कमी नहीं है। पर्याप्त सिलेंडर मौजूद है। उसी के ऊपर निर्भर नहीं है।

50 पाइंट का एक और प्लांट तैयार करेंगे
जिला अस्पताल में एक और ऑक्सीजन प्लांट सीजीएमसी द्वारा लगाया जा रहा है। उसमें भी 50 प्वाइंट होगा, जिसका काम शुरू चुका है। लगभग दो माह के भीतर इसे तैयार कर लिया जाएगा। इसके बाद ऑक्सीजन प्वाइंट की संख्या 100 हो जाएगी। जल्द ही मरीजों को इसका लाभ मिलेगा।

समय पर उपयोग नहीं
कोविड-19 के दौरान अगर इसका उपयोग शुरू हो जाता तो मरीजों को काफी राहत मिलती। मरीजों की सुविधा के लिए अस्पताल प्रबंधन ने 27 लाख रुपए खर्च कर इसे तैयार कराया था। लेकिन उसी प्रबंधन की लापरवाही कहे या देरी के चलते ये शुरू नहीं हो सका है। जबकि जिला अस्पताल में ही समय पर ऑक्सीजन न लगने से मरीज की मौत होने की घटना सामने आ चुकी है।

अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग
सेंट्रल ऑक्सीजन सिस्टम को प्रारंभ नहीं होने के चलते ही भाजयुमो कार्यकर्ताओं द्वारा विरोध जताते हुए सीएमएचओ को ज्ञापन सौंपा गया। इस ेदौरान भाजयुमो जिलाध्यक्ष कैलाश चंद्रवंशी ने कहा कि तत्कालीन सिविल सर्जन और ठेकेदार की मिलीभगत के कारण ही ऑक्सीजन पाइप लाइन में लीकेज और अन्य कारणों से आज तक प्रारंभ नहीं हो पाया है। भाजयुमो कार्यकर्ताओं ने सेंट्रल ऑक्सीजन सिस्टम को तत्काल प्रारंभ करने की मांग की। वहीं संबंधित अधिकारियों पर कार्रवाई की भी मांग की।

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