
Fire brigade from the city
इंदौरी. ग्राम पंचायत मुख्यालयों पर आग बुझाने के लिए कोई साधन न होने के कारण आग लगने की स्थिति में शहर से दमकल बुलाई जाती है। नतीजन दमकल वाहन के पहुंचने तक पीडि़तों का काफी नुकसान हो चुका होता है। आगजनी के लगातार घटनाओं के बाद भी इस ओर कोई कारगर पहल नहीं की जा रही है। जनप्रतिनिधि और अधिकारी चाहे तो संसाधन उपलब्ध कराए जा सकते हैं।
गर्मी के दिनों में आगजनी की घटना हर साल सामने आती है, जिससे पीडि़त को भारी नुकसान का सामना करना पड़ता है। कवर्धा व सहसपुर लोहारा विकासखंड अंतर्गत सैकड़ों ग्राम पंचायत है। साथ इन पंचायतों के अंतर्गत अन्य आश्रित गांव भी आते हैं। इसके बाद भी पंचायत मुख्यालयों पर आग बुझाने के लिए कोई संसाधन नहीं है। हालांकि कुछ पंचायतों में टैंकर की सुविधा कराई गई है, लेकिन उसमें भी मोटर पंप नहीं लगाया गया है, जिससे आग नहीं बुझाई जा सकती। आग लगने की स्थिति में संबंधित ग्राम की ग्रामीण द्वारा सबसे पहले आग लगने की सूचना नगर पंचायत या नगरपालिका में दी जाती है और फिर यहां से ग्रामीण क्षेत्रों के लिए दमकल की गाड़ी रवाना होती है। कभी कभी दमकल वाहन पहुंचने तक सब कुछ जलकर खाक हो चुका होता है। क्योंकि कई गांव की दूरी शहर से 30-40 किलोमीटर है। यही नहीं पूरे क्षेत्र के लिए नगर पालिका में सिर्फ अकेले हैं और वह भी आग बुझाने में सक्षम नहीं होने की स्थिति में विभाग द्वारा दूसरे जिला से मंगाई जाती है।
गर्मी में आगजनी की बढ़ जाती है संभावना
गर्मी के दिनों में आए दिन आगजनी की घटना बढ़ जाती है। हर साल गर्मी की शुरुआत से ही आगजनी की घटनाएं होती रहती है। पिछले सप्ताह ही 29 मार्च को गुढ़ा में करीब तीन एकड़ की चने का फसल जलकर खाक हो गई। इसी तरह होलिका दहन की रात गैंदपुर में आगजनी की घटना से चार पहिया वाहन सहित घर जलकर राख में तब्दील हो गई। पिछले पखवाड़े भर में कई आगजनी की घटनाएं सामने आई। अक्सर तेज गर्मी शुरू होते ही आग लगने की घटनाएं सुनने को मिलता है। कई बार दमकल समय पर नहीं पहुंचने के कारण लगी आग पर काबू नहीं पाने से फसल राख में तब्दील हो जाती है।
ग्रामीण करते हैं स्वयं जुगाड़
गांवों में आगजनी की घटना होने के स्थिति में ग्रामीण स्तर पर लोग इकट्ठे होकर स्वयं आग पर काबू पाने की जुगत में लग जाते हैं। निजी व घरेलू पंप मोटर से पाईप से पानी का छिड़काव करते हैं। वहीं महिला-पुरूष सहित युवा वर्ग अपने-अपने हिसाब से पानी ढ़ो कर आग बुझाने का भरसक प्रयास करते हैं। पंचायतों में दमकल की व्यवस्था नहीं होने के कारण गांवों में आगजनी की घटना होने पर इस तरह का नजारा अक्सर देखने को मिलता है। कई मर्तबा ग्रामीणों की सुझबुझ से ही आगजनी पर किसी अनहोनी से पहले ही काबू पाने में कामयाब हो जाते हैं।
गांव में जागरूकता भी जरूरी
हर साल आगजनी की घटनाएं सामने आती है, जिसमें ज्यादातर खलिहानों में रखे फसल जलने के ज्यादा मामले सामने आते हैं। इसके पीछे एक वजह यह है कि लोग गर्मी के दिनों में खेतों में पड़े अवशेष पर खुले जगहों पर जला देते हैं और बिना बुझाएं वापस आ जाते हैं। आग दो-तीन दिन तक सुलगते रहते हैं। गर्मी में वैसे ज्वलन गति तेज रहती है, जो इस तरह के लापरवाही से आगजनी की घटना से इंकार नहीं किया जा सकता। इससे लिए लोगों को जागरूक करने की जरूरत है।
Published on:
08 Apr 2019 11:07 am
बड़ी खबरें
View Allकवर्धा
छत्तीसगढ़
ट्रेंडिंग
