छत्तीसगढ़ में 11वीं सदी में बने इस मंदिर में विराजमान है विश्व के इकलौते तांत्रिक गणेश

छत्तीसगढ़ में 11वीं सदी में बने इस मंदिर में विराजमान है विश्व के इकलौते तांत्रिक गणेश

Akanksha Agrawal | Publish: Jun, 10 2019 11:08:20 AM (IST) Kawardha, Kabirdham, Chhattisgarh, India

भोरमदेव (Bhoramdeo temple) के मंदिर में प्राचीन सभ्यताओं और प्राकृतिक सभ्यता का अनुठा संगम देखने को मिलता है। भोरमदेव का मंदिर भगवान शिव (lord shiva) को समर्पित है। पर इस मंदिर में कुछ और ऐसे रहस्य भी हैं, जिनके बारे में शायद आपको नहीं पता होगा। तो आईये जानते हैं छत्तीसगढ़ के खजुराहो (Chhattisgarh khajuraho temple) से जुड़े कुल दिलचस्प बातें।

मैकाल की पहाडिय़ों और हरे भरे जंगलों के बीच भोरमदेव का मंदिर(bhoramdeo temple), जिसे देखते ही लोग इसकी सुंदरता के दीवाने हो जाते हैं। यह मंदिर छत्तीसगढ़ के खजूराहो (chhattisgarh khajuraho) के नाम से जाना जाता है। यह मंदिर कवर्धा से 18 किलोमीटर दूर प्रकृति की सुंदरता के बीच बसा हुआ है। 11वीं सदी में बने इस मंदिर में प्राचीन पाषाण सभ्यताओं (Ancient stone civilizations) की मूर्तियां हैं। इस मंदिर के बारे में ये सभी बातें तो हर कोई जानता है, पर इस मंदिर के अंदर कुछ ऐसा भी है जिससे अभी तक काफी लोग अंजान हैं।

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11वीं सदी में नागवंशी राजाओं ने भोरमदेव मंदिर (bhoramdeo temple) का निर्माण करवाया था। उस समय नागवंशी राजा तंत्र मंत्रों का अभ्यास किया करते थे। जिसकी छवि मंदिर की दीवारों में की गई नक्काशी में दिखाई देती है।

मंदिर के गर्भगृह में मौजूद है अष्टभुजी गणेश जी (tantrik ganesh)
भोरमदेव मंदिर (chhattisgarh khajuraho temple) को भगवान भोलेनाथ के नाम से जाना जाता है। पर बहुत कम लोगों को ये मालूम है कि मंदिर के गर्भगृह में शिवलिंग के साथ भगवान गणेश (lord ganesha) की प्रतिमा भी स्थापित है। वहां के पंडितों का कहना है कि यह मौजूद भगवान गणेश की प्रतिमा की तरह विश्व में कोई दूसरी प्रतिमा नहीं है। यहां मौजूद भगवान गणेश अष्टभुजी (asthbhuji ganesha) हैं यानि इनकी आठ भुजाएं हैं, जिन्हे तांत्रिक गणेश (tantrik ganesha) कहा जाता है।

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कोर्णाक मंदिर (konark temple) जैसी है यहां की स्थापत्य कला
भोरमदेव मंदिर (bhoramdeo temple) की कामुक मुर्तियों के कारण अक्सर इस मंदिर की तुलना खजुराहो से की जाती है। और इसलिए इसे छत्तीसगढ़ का खजुराहो भी कहा जाता है। पर इस मंदिर की स्थापत्य कला काफी हद तक ओडिशा के कोर्णाक सूर्य मंदिर से मिलती जुलती है।

भोरमदेव मंदिर के पास ही मौजूद हैं मंडवा महल, जिसे शादी के मंडप की तरह बनाया गया है। इसलिए इसका नाम मंडवा महल पड़ा। इस मंदिर को नागवंशी राजा रामचंद्र देव और उनकी रानी राजकुमारी अंबिका देवी की शादी के लिए बनाया गया था। मंडवा महल का निर्माण 3049ई. में हुआ माना जाता है।

भोरमदेव मंदिर (bhoramdeo temple) और मंडवा महल के पास ही मौजूद है छेरकी महल। 14वीं शताब्दी में बना एक शिव मंदिर है। इस मंदिर के मुख्य द्वार पर चतुभुर्ज गणेश, शिव, पार्वती और नंदी की ,खुबसूरत नक्काशियां बनी हुई है।

 

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