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खंडवा

थर्ड लाइन की जद में 100 फीट जमीन, 100 मकान

रेलवे की मार्किंग के बाद परेशान हैं रहवासी, रेल मंत्रालय भेजने अधिकारी बना रहे जांच रिपोर्ट, विरोध के बाद राजस्व अमले ने बताई अपनी नाप

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खंडवा. रेलवे की थर्ड लाइन की जद में यहां 100 फीट जमीन और उसमें बने करीब 100 मकान आ गए हैं। थर्ड लाइन का मतलब तीसरी रेल लाइन से है। रेलवे जल्द ही इटारसी से भुसावल के बीच अप ट्रैक पर एक और नई रेल लाइन बिछाने की तैयारी कर रहा है। इसका सर्वे आर्डर होने के बाद मानकों के आधार पर रेल अधिकारियों ने रेलवे ट्रैक से 100 फीट दूरी तक की जमीन पर मार्किंग शुरू कर दी है। इस मार्किंग की जद में करीब 100 मकान और कई प्लॉट आ चुके हैं। ऐसे में रेलवे को भारी विरोध का सामना करना पड़ रहा है। खंडवा रेलवे स्टेशन से इटारसी एंड की ओर करीब सवा किमी तक रेलवे ट्रैक किनारे यह मार्किंग की गई है।
रेलवे- राजस्व आमने सामने
रेलवे की नाप से नाखुश लोगों ने जब एक जुट होकर विरोध किया तो प्रशासन को इस मामले में दखल देना पड़ा। उच्च स्तर से आदेश के बाद बुधवार को राजस्व निरीक्षक शिव कुमार चोरापे, हल्का पटवारी अशोक सिंह तंवर मौके पर पहुंचे। यहां रेलवे के प्रभारी सेक्शन इंजीनियर रेल पथ ब्रॉड गेज केके सिंह भी मौजूद रहे। यहां मोहल्ले वालों के साथ पार्षद संतोष सरवान भी नाप देखने पहुंचे। रेलवे और राजस्व दोनों ने अपने नक्शे के आधार पर जमीन की नापजोख देखी। जब राजस्व अमले ने अपना टेप निकाला तो रेलवे के मार्किंग पोल से पटरी की ओर काफी जमीन राजस्व की निकली।
मंडल को भेजेंगे रिपोर्ट
यहां रेल अधिकारी बता रहे हैं कि तीसरी लाइन का सर्वे आर्डर होने के बाद रेलवे के मानक के आधार पर 30 मीटर 48 सेमी यानि 100 फीट जमीन पर मार्किंग पोल लगाए जा रहे हैं। राजस्व हल्का की आराजी 937, 938 इससे प्रभावित हो रही है। स्थानीय अधिकारी मार्किंग रिर्पो तैयार कर भुसावल मंडल भेजेंगे। वहां से यह रिपोर्ट रेल मंत्रालय भेजी जाएगी। इसके बाद तय होगा कि नई रेल लाइन के लिए कहां कितनी जमीन रेलवे को आरक्षित करना है। राजस्व अमले का कहना है कि 100 फीट का मानक रेलवे स्टेशन के पास होता है। स्टेशन से आउटर की ओर यह दूरी कम होती जाती है।
सड़क पर मंदिर- मजार
नगर पालिक निगम के सूरज कुंड वार्ड की जमीन प्रभावित हो रही है। रेलवे से लगी इस आराजी में कुछ लोगों ने सड़क पर ही मंदिर और रेलवे की ओर मजार बना दी है, जो अतिक्रमण बताया जा रहा है। अब राजस्व और रेलवे के बीच फंसी पेंच में यहां के रहवासी कितने प्रभावित होते हैं यह आने वाला वक्त बताएगा। फिलहाल रजिस्ट्री कराने के बाद मकान बनाने वाले अपने घर बचाने के लिए अदालत भी जाने को तैयार हैं।