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खंडवा

नाती पोतों को लेकर कॉलेज पहुंचे पॉलीटे​क्निक के पूर्व छात्र

पॉलीटेक्निक कॉलेज में हीरक जयंती समारोह एवं एलुमनी मीट का आयोजन, साथ पढ़ने वाले दोस्तों से मिलकर याद किए पुराने दिन

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खंडवा. दशकों बाद अपने कॉलेज लौटे छात्रों ने हर कदम अपने पुराने दिन याद किए। कॉलेज का वहीं गेट, वैसी ही पार्किंग और क्लास रूम भी वही देख मानो बढ़ती उम्र में भी सब एक पल के लिए कॉलेज स्टूडेंट बन गए थे। मौका था पॉलीटेक्निक महाविद्यालय के 60 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में आयोजित हीरक जयंती समारोह एवं एलुमनी मीट का। 7 जनवरी को शुरू हुए इस आयोजन में 60 वर्ष के भूतपूर्व छात्र शामिल हुए। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि विधायक देवेन्द्र वर्मा रहे। अध्यक्षता विधायक राम दांगोरे ने की।विशेष अतिथि के रूप में विधायक नारायण पटेल, महापौर अमृता यादव, भाजपा जिलाध्यक्ष सेवादास पटेल, सांसद प्रतिनिधि अमर यादव, जिला महामंत्री अरूण मुन्ना, जनपद अध्यक्ष महेन्द्र सिंह सावनेर, छात्रसंघ अध्यक्ष स्नेहा रायकवार उपस्थित रहे।
प्राचार्य एपी साकल्ले ने कार्यक्रम की शुरूआत में उदबोधन दिया। इसके बाद बीडी सनखेरे, समन्वयक हीरक जयंती एवं एलुमिनी मीट ने महाविद्यालय के प्रतिवेदन का वाचन किया।
शाल- श्रीफल से सम्मान
इस मौके पर महाविद्यालय के सेवानिवृत्त शिक्षकों को शाल श्रीफल देकर सम्मान किया गया। छत्तीसगढ़ से विशेष रूप से आमंत्रित स्व. सुभाष बेलचंदन कृत वनांचल गेड़ी नृत्य संस्था ने नृत्य प्रस्तुत किया।
यह रहे मौजूद
कार्यक्रम में सुभाष माहेश्वरी, संजीव श्रीवास्तव, अनुराग बाजपेयी, दशरथ मोयदे, डॉ. समीर दीक्षित, रंजना शक्तावत, डॉ. पुष्पा नागर, आरसी वागिले, कमल बखत्यापुरी, सीएस मौर्य, पीसी लाड आदि मौजूद रहे। कार्यक्रम का संचालन बीडी सनखेरे ने एवं आभार प्रदर्शन सतीश श्रीवास्तव ने किया।
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पूर्व छात्रों ने दिया डोनेशन
मैं वर्ष 1986 में सिविल का छात्र रहा हूं। खंडवा से पढ़ाई के बाद अब कवि होने के साथ इंदौर में व्यवसाय कर रहा हूं। संस्थान ने काबिल बनाया इसलिए ऋण चुकाना भी जरूरी है। माता- पिता कमला देवी विनायक राव कदम की स्मृति में मेधावी छात्रों के लिए 25 हजार रुपए की स्कॉलरशिप अपनी तरफ से हर साल दूंगा।
– विश्वनाथ कदम, पूर्व छात्र
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कॉलेज के कर्ज की कुछ किस्तें दे सकते हैं तो जरूर देना चाहिए। पहले से बहुत सुविधाएं संस्थान में हो चुकी हैं। अब और बेहतर बन जाए यही आशा है। काशी से आकर वर्ष 2000 में सिविल डिप्लोमा के बाद बीटेक किया और अब बीएचयू में इंजीनियर हूं। मैंने 1 लाख 11 हजार रुपए संस्थान को अपनी ओर से दिए हैं।
– प्रशांत मिश्रा, पूर्व छात्र
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पॉलीटेक्निक से मिली शिक्षा की देन है कि आज इस मुकाम पर पहुंचा हूं। वर्ष 1998 में यहां पढ़ाई की। दाखिला सिविल में लिया फिर मैकेनिकल की पढ़ाई कर ली। लेकिन काम सिविल की पढ़ाई आई। अब एलएन इंफ्रा का मालिक हूं और खुद का एक चैनल सेटअप किया है। इस संस्थान को मैं 5 लाख रुपए दे रहा हूं।
– डॉ. एलएन मालवीया, पूर्व छात्र
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इतना सम्मान मिलेगा, सभी सोचा नहीं था
पॉलीटेक्निक खंडवा में पहले बैच के एक पूर्व छात्र अब स्वामी विवेक चैतन्य के नाम से जाने जाते हैं। नर्मदा परिक्रमा कर चुके विवेक ने बाबरी मस्जिद आंदोलन में हिस्सा लिया और सूरत के कार्तिकेय आश्रम में कई वर्ष गायों की सेवा की। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के साथ जेल में रह चुके और कुशाभाऊ ठाकरे, सुदर्शन जैसे समाजसेवियों के साथ कंधा मिलाकर चले। इन्होंने ही जसवाड़ी वाटर स्कीम की ड्राइंग और डिजाइन बनाई थी। वह कहते हैं कि कभी नहीं सोचा था कि फूल हार से स्वागत होगा और इतना सम्मान मिलेगा।
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पीढ़ी दर पीढ़ी का नाता
पॉलीटेक्निक खंडवा में ही सेवाएं दे रहे पंकज अग्रवाल बताते हैं कि वह परीक्षा विभाग में पदस्थ हैं। उन्होंने यहीं से डिप्लोमा किया था। इसके पहले उनकी बहन प्रीति अग्रवाल ने एमओएम की पढ़ाई 1998 में की। पिता केसी अग्रवाल भी 1965 में यहीं से पढ़े और फिर यहीं वर्कशॉप अधीक्षक, मैकेनिकल के एचओडी रहे। पंकज बताते हैं कि उनका इस संस्थान से बचपन का नाता है।
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हरदा कमताड़ा के रहने वाले जयप्रकाश फुलरे बताते हैं कि उन्होंने 1995 में खंडवा पॉलीटेक्निक से पढ़ाई की और अब बिरसिंहपुर पाली में इंजीनियर हैं। उनके पिता यहीं प्रोफेसर रह चुके हैं। बहन रश्मि फुलरे ने 2001 में यहीं से पढ़ाई की। बेटे जयंत फुलरे ने भी यहां एडमिशन लिया था। इस तरह पूरा परिवार समय समय पर इस संस्थान से जुड़ा रहा और यहीं से काबिल होकर आगे बढ़ा।
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कॉलेज गेट, पार्किंग और क्लास रूम, कुछ नहीं बदला
नागपुर में कोविनावा इलेक्टि्रक स्कूटर कंपनी में मैनेजर संध्या पाल और टाटा प्रोजेक्ट में डिप्टी मैनेजर दीपक पाटिल वर्ष 2010 के बैच में एक ही क्लास में पढ़ते थे। दोनों के एक जैसे ही अनुभव रहे। संध्या कहती हैं कि कॉलेज गेट, पार्किंग और क्लास रूम, कुछ नहीं बदला। सबसे पहले क्लास रूम में जाकर अपना फोटो लिया। दीपक कहते हैं कि जिस सांचे में ढले वहीं आने का मौका मिलना बड़ी बात है। इससे भी बड़ा सम्मान यह है कि वर्षों बाद भी शिखक उन्हें नाम से जानते हैं। दोनों ने कहा कि जहां पढ़ाई की वहां वर्षो बाद एक साथ सबका मिलना नसीब की बात है।
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पढ़ाई के दिन याद आए
कर्मचारी भविष्य निधि संगठन उज्जैन में पदस्थ प्रिया चौरे अपने पति मुकेश चौरे और बेटियों के साथ कॉलेज पहुंचीं। वह कहती हैं कि यहां आकर उन्हें पढ़ाई वाले दिन याद आ गए। उन्होंने बताया कि वर्ष 2000 में खंडवा से ही इलेक्ट्रीकल में डिप्लाेमा किया था। दो दशक बाद यहां आना सौभाग्य की बात है।
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