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कपास मंडी को लेकर निगम, मंडी प्रशासन आमने-सामने, कोर्ट जाने की तैयारी

-निगम ने कहा रजिस्ट्री हमारे नाम, मंडी का कहना राजस्व पत्रों में हम कब्जाधारी-करीब 30 करोड़ रुपए विभिन्न निर्माण कार्यों पर अब तक कर चुका खर्च

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कपास मंडी को लेकर निगम, मंडी प्रशासन आमने-सामने, कोर्ट जाने की तैयारी

पंधाना रोड पर मंडी प्रशासन द्वारा वर्ष 1964 से 10 एकड़ में कपास मंडी का संचालन किया जा रहा है। नई कृषि उपज मंडी बनने के बाद से यहां कपास मंडी के स्थान पर सब्जी मंडी संचालित हो रही है।

खंडवा. पंधाना रोड स्थित पुरानी कपास मंडी पर आधिपत्य का मामला अब तूल पकड़ते जा रहा है। नगर निगम और मंडी प्रशासन कपास मंडी को लेकर आमने-सामने हैं। नगर निगम इस जगह की रजिस्ट्री अपने नाम बता रहा है। जबकि मंडी प्रशासन का कहना है कि राजस्व प्रपत्रों में हम इस जगह के कब्जाधारी है। मामले में अब नगर निगम हाईकोर्ट जाने की तैयारी में है। जवाब में मंडी प्रशासन भी अपनी तैयारियों में जुटा हुआ है।

भूभाटक टैक्स से आया था मामला सामने

पंधाना रोड पर मंडी प्रशासन द्वारा वर्ष 1964 से 10 एकड़ में कपास मंडी का संचालन किया जा रहा है। नई कृषि उपज मंडी बनने के बाद से यहां कपास मंडी के स्थान पर सब्जी मंडी संचालित हो रही है। करीब आठ माह पहले तहसील कार्यालय से मंडी के भूभाटक टैक्स के लिए नोटिस जारी हुआ था। नोटिस नगर निगम के नाम था और मंडी से भूभाटक टैक्स 3 लाख रुपए की मांग की गई थी। मंडी प्रशासन ने प्रपत्रों में नगर निगम के स्थान पर मंडी प्रबंधन करने को कहा था। नोटिस के सामने आते ही निगम अधिकारियों ने पुराने रिकाॅर्ड चेक किए, जिसमें मंडी की जमीन निगम के नाम पर निकली थी। अब मंडी के आधिपत्य के लिए निगम और मंडी प्रशासन आमने-सामने है।

खसरा, रकबा निकलवाया, हमारे नाम जमीन

मंडी आधिपत्य के मामले में निगम का कहना है कि कपास मंडी की जगह उनके नाम है। निगमायुक्त नीलेश दुबे ने बताया कि वर्ष 1959 में यह जगह निगम ने खरीदी थी, जिसकी रजिस्ट्री भी हमारे पास है। तत्कालीन समय में मंडी संचालन के लिए जगह मंडी प्रबंधन को दी गई थी, जिसकी मुआवजा राशि आज तक नहीं मिली है। दो बार मुआवजा भी तय किया गया, लेकिन मंडी प्रबंधन ने कोई जवाब नहीं दिया। हमने इसका खसरा-रकबा नकल भी निकाल ली है। मामला कृषि मंत्री, मुख्यमंत्री के संज्ञान में भी है। पिछले दिनों भोपाल मंडी बोर्ड में भी हम फाइल दे चुके हैं। अब इस मामले में हाई कोर्ट जाने की तैयारी है।

गजट नोटिफिकेशन भी हमारे नाम

इधर, मंडी बोर्ड का कहना है कि कपास मंडी की जगह पर हमारा आधिपत्य है। मंडी सचिव ओपी खेड़े ने बताया कि जिस समय मंडी बोर्ड को जगह मिली थी, उस समय सुपुर्दगी पत्र भी दिया गया था। वर्ष 1964 के गजट नोटिफिकेशन में भी यह जगह मंडी प्रशासन के नाम पर है। राजस्व प्रपत्रों में मंडी की जगह मंडी बोर्ड के नाम है। यहां मंडी प्रशासन द्वारा करीब 30 करोड़ रुपए का निर्माण कार्य भी कराया जा चुका है। यहां वर्तमान में बाउंड्रीवॉल, गोदाम, शेड, इलेक्ट्रिसिटी, कृषक भवन, दुकानें सहित कई निर्माण हमारे द्वारा कराए गए है। यदि निगम कोर्ट जाता है तो हम भी हमारे पूरे दस्तावेज लेकर कोर्ट की शरण लेंगे।