
- जिले में रोज 33 कुंटल सेफ की खपत, गर्मियों में ईरान से आने वाले सेब की रहती थी भरपूर आपूर्ति
गर्मियों के मौसम में सेब की मांग काफी ज्यादा रहती है। मुख्य रूप से इस मौसम में बड़ी मात्रा में ईरान की सेब बाजार पहुंचती है, लेकिन इस बार ईरान-ईजराइल के बीच चल रहे युद्ध के कारण इसकी आवक लगभग रुक गई है। फल व्यापारी शेख अख्तर का कहना है कि पिछले वर्षों में फरवरी से ही ईरान से बड़ी मात्रा में सेब की खेप आना शुरू हो जाती थी। यह सेब आकार में बड़ा, स्वाद में अच्छा और कीमत में अपेक्षाकृत सस्ता होता था, इसलिए बाजार में इसकी मांग भी काफी रहती थी। लेकिन इस बार ईरान में चल रहे युद्ध के कारण वहां से माल की सप्लाई प्रभावित हो गई है।
बाजार में ईरानी सेब की आवक घटकर 8 से 10 कैरेट है। यह भी सी स्टोर का माल है जिसे दिल्ली व मुंबई के व्यापारी बाजार में ऊंचे दामों पर उपलब्ध करवा रहे हैं। स्थानीय व्यापारियों का कहना है कि पिछले साल ईरानी सेब थोक भाव में 170 से 180 रुपए कैरेट में मिल जाती थी, यह सेब चिल्लर में ठेले व दुकानों से 90 से 100 रुपए किलो बिकती थी, लेकिन इस बार एक कैरेट का भाव 1800 से 1900 रुपए हैं, जिसके बाद यह दुकानों पर 200 रुपए किलो में बिक रही है। आने वाले समय में भाव ओर बढ़ने वाले हैं।
रोजाना 33 कुंटल सेब की खपत
बाजार में सेब की मांग है लेकिन कम ही दुकानों पर यह उपलब्ध हैं। फल व्यवसायी गोविंद का कहना है कि रोजाना 33 कुंटल सेब की खपत हैं। दरअसल शहर में सीजन की पहली सेब हिमाचल से आती है, जिसके खत्म होने पर जम्मू कश्मीर और आखरी में ईरान की सेब आती है। अभी यह मौसम ईरान की सेब का है लेकिन इस बार ईरानी सेब का आवक नहीं के बराबर हैं। इनकी लागत ज्यादा होने के कारण बाजार में सेब के दाम भी बढ़ गए हैं।
Updated on:
09 Mar 2026 12:05 pm
Published on:
09 Mar 2026 12:04 pm
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