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भारतीय कपास निगम को नहीं मिल रहा अच्छा कपास

कृषि उपज मंडी में सीसीआई खरीद रही कपास

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 ne cotton ki kharidi ki

खंडवा। कृषि उपज मंडी में नीलामी के लिए आए कपास से भरे वाहन।

खंडवा. कृषि उपज मंडी में भारतीय कपास निगम (कॉटन कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया, सीसीआई) दो दिनों से कपास खरीदी चल रही है। लेकिन सीसीआई को एफएक्यू मापदंड अनुसार कपास नहीं मिल रहा। इससे कम कपास ही सीसीआई खरीद पा रही है। सीसीआई द्वारा कम कपास खरीदने से किसान निराश है। उन्हें फसल का उचित दाम नहीं मिल रहा। व्यापारी द्वारा उनके माल की नीलामी कर खरीदा जा रहा है।

कृषि उपज मंडी में 10 अक्टूबर से कपास की खरीदी चल रही है। बारिश के कारण खराब क्वालिटी व अधिक नमी वाला कपास मंडी में नहीं आने से भारतीय कपास निगम ने कपास की खरीदी शुरू नहीं की थी। 13 नवंबर से सीसीआई ने खरीदी शुरू की, लेकिन मंडी में बिकने आ रहा 80-85 प्रतिशत कपास एफएक्यू मापदंड पर खरा नहीं उतर रहा है। 20 फीसदी ही कपास को सीसीआई खरीद रही है। गुरुवार को मंडी में 44 वाहन से 562 क्विंटल कपास की आवक हुई। इसमें से 4 वाहन कपास ही सीसीआई ने खरीदा।

इस साल सौ रुपए बढ़े भाव

मौसम की मार ने इस बार किसानों की वैसे ही कमर तोड़ चुका है। मंडी में भी किसानों को कपास का उचित मूल्य नहीं मिल रहा। मंडी प्रभारी नारायण दशोरे ने बताया भारतीय कपास निगम ने इस साल खरीदी के भाव 100 रुपए तक बढ़ाए हैं। छोटे रेशे का कपास 5250 व लंबे रेशे का कपास 5550 रुपए प्रति क्विंटल तय किया है। 2018-19 में कपास के भाव 7600 रुपए प्रति क्विंटल तक गए थे। इस वर्ष सवा महीने से चल रही खरीदी में 4200 से 5500 रुपए तक कपास बिका है। इसमें ज्यादातर को 4500-5000 रुपए के बीच कपास का मूल्य मिला है। इससे किसान मायूस हैं। मंडी प्रबंधन ने बताया किसान कम नमी वाला कपास मंडी बेचने लेकर आए। एफएक्यू मापदंड अनुसार 8-12 प्रतिशत नमी वाला कपास हो। अधिक नमी वाला कपास सीसीआई नहीं खरीदेगी। बैंक पासबुक, पेनकार्ड, बी-1, बी-2 खसरा काफी, ऋण पुस्तिका और पटवारी का सत्यापन रिपोर्ट लेकर आए।

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