6 जनवरी 2026,

मंगलवार

Patrika LogoSwitch to English
home_icon

होम

video_icon

शॉर्ट्स

catch_icon

प्लस

epaper_icon

ई-पेपर

profile_icon

प्रोफाइल

आज चंद्रमा 180 डिग्री अंश पर, स्नान-दीपदान से ये मिलेगा फल, जाने कार्तिक पूर्णिमा विधी

पूरे साल में 12 पूर्णिमाएं आती है। लेकिन कार्तिक मास की पूर्णिमा खास होती है। इस दिन गंगा, नर्मदा, ताप्ती स्नान और दीपदान से पापों का नाश होता है।

2 min read
Google source verification
Kartik Purnima 2017 or Tripuri Purnima Date and Time in India khandwa

Kartik Purnima 2017 or Tripuri Purnima Date and Time in India khandwa

खंडवा. प्रत्येक वर्ष 12 पूर्णिमाएं होती हैं जो प्रतिमाह आती हैं। इसी में कार्तिक मास में आने वाली पूर्णिमा, कार्तिक पूर्णिमा को त्रिपुरी पूर्णिमा या गंगा स्नान की पूर्णिमा के नाम से भी जाना जाता है। इसी दिन भगवान विष्णु ने अपना पहला अवतार लिया था, वे मत्स्य यानी मछली के रूप में प्रकट हुए थे।
पंडित अंकित मार्केंडेय के मुताबिक इसे त्रिपुरी पूर्णिमा या गंगा स्नान के नाम से भी जाना जाता है। पूर्णिमा के दिन चंद्रमा ठीक 180 डिग्री के अंश पर होता है। इस दिन चंद्रमा से निकलने वाली किरणें काफ ी सकारात्मक होती हैं और यह किरणें सीधे दिमाग पर असर डालती हैं। चंद्रमा, पृथ्वी के सबसे नजदीक है इसलिए इन किरणों का प्रभाव सबसे अधिक पृथ्वी पर ही पड़ता है।

क्या करें इस दिन...
कार्तिक पूर्णिमा के दिन गंगा स्नान, दीप दान, हवन, यज्ञ आदि करने से सांसारिक पाप और ताप का शमन होता है। इस दिन किए जाने वाले अन्न, धन एव वस्त्र दान का भी बहुत महत्व बताया गया है। इस दिन जो भी दान किया जाता हैं उसका कई गुणा लाभ मिलता है। मान्यता यह भी है कि इस दिन व्यक्ति जो कुछ दान करता है वह उसके लिए स्वर्ग में संरक्षित रहता है जो मृत्यु लोक त्यागने के बाद स्वर्ग में उसे पुन:प्राप्त होता है। इस दिन बिना स्नान किए व्यक्ति को नहीं रहना चाहिए।

जानें कार्तिक पूर्णिमा की पूजन विधि
- स्नान कर के भगवान विष्णु की अराधना करनी चाहिए, संभव हो तो गंगा स्नान करें।
- पूरे दिन या एक समय का व्रत जरूर रखें।
- इस दिन नमक का सेवन बिल्कुल ना करें, ब्राह्मणों को दान दें।
- शाम को चंद्रमा को अघ्र्य देने से पुण्य प्राप्ती होती है।
- नर्मदा गंगा के तट पर दीपदान, अन्न दान वस्त्र दान करें।
- ब्राह्मणों द्वारा वैदिक रीति से से पूजन करवाए, महाआरती करके दक्षिणा, वस्त्र दान कर प्रसाद बांटे।

ये महत्व भी...
वहीं इस पूर्णिमा को त्रिपुरी पूर्णिमा की संज्ञा इसलिए दी गई है क्योंकि इस दिन ही भगवान शंकर ने त्रिपुरासुर नामक महाभयानक असुर का अंत किया था। इसके बाद से वे त्रिपुरारी के रूप में पूजित हुए थे।