'100 दिन में शहर को गड्ढामुक्त करूंगा। ये मेरी पहली घोषणा भी है और पहली प्राथमिकता है।' - सुभाष कोठारी, महापौर (13 जनवरी 2015 के शपथग्रहण समारोह में कहा था)
खंडवा. शहर सरकार की विदाई का काउंट डाउन शुरू हो गया है। प्रदेश के अन्य निकायों की तरह यहां भी जल्द ही प्रशासक के हाथों में कमान होगी।
इस परिषद के शपथ समारोह में महापौर सुभाष कोठारी ने पहली प्राथमिकता शहर को 100 दिन में गड्ढा मुक्त करने की बताई थी लेकिन अब जबकि 5 साल का कार्यकाल खत्म होने में सिर्फ 9 दिन शेष रह गए हैं, तब भी सड़कें बदहाल हैं और वादा पूरा होना बहुत दूर रह गया। इस कार्यकाल में ही मुख्यमंत्री शहरी अधोसरंचना विकास योजना के दूसरे चरण में 10 करोड़ रुपए के कार्य किए जाने की शुरूआत हुई थी, जिसमें से 3 करोड़ रुपए लागत से सड़कों को डामरीकृत किए जाने का काम हुआ लेकिन इससे सड़कें तो ठीक न हो पाई, परिषद के सम्मेलन में ये बहस का विषय जरूर बना। डामरीकरण मामले में संबंधित ठेकेदार की सिक्योरिटी डिपॉजिट व परफॉर्मेंस गारंटी रिलीज नहीं करने पर तो कार्रवाई तक की मांग की गई। हालांकि पूरे कार्यकाल के दौरान न महापौर ने अपना वादा पूरा किया और न ही पार्षदों ने गंभीरता दिखाई।
गड्ढे, जिनमें बेशरम के पौधे तक लगाए गए
शहर में गड्ढों की भरमार होने के कारण कई बार ऐसी स्थिति आई जब लोगों को सड़क पर उतरना पड़ा। इंदिरा चौक क्षेत्र में भारतीय जनता पार्टी कार्यालय के सामने के गड्ढे में बेशर्म के पौधे लगाए गए थे। बस स्टैंड के सामने, शेर चौराहा, जलेबी चौक, लालचौकी क्षेत्र में भी लोग ऐसा कर चुके हैं। इतना ही नहीं, बीते साल जून में लोगों ने महापौर के घर के सामने पहुंचकर भी बेशर्म के पौधे लगाए। ये लोगों द्वारा गुस्से का इजहार था जो कि सड़कों की बदहाली पर फूटा। रामेश्वर चौकी के पास भी सड़क की बदहाली पर लोगों में गुस्सा रहा।
सड़कें, जो विभागों के फेर में ही उलझकर रह गईं
शेर चौराहा से गांधी भवन, जलेबी चौक से बजरंग चौक, घंटाघर से भगतसिंह चौक, जलेबी चौक से गांधी प्रतिमा, मोघट रोडसे विजय नगर, सेठी नगर, हनुमान नगर, सर्वोदय से घासपुरा, अवस्थी चौक से इंदिरा चौक, इंदौर रोड वाया पदमनगर, बस स्टैंड व एसएन कॉलेज के सामने सहित अन्य सड़कें पीडब्ल्यूडी, नगर निगम और एमपीआरडीसी के फेर में अटकी हुई हैं। 29 मार्च 2018 में परफॉर्मेंस गारंटी खत्म होने के बाद से इन मार्गों के आधिपत्य को लेकर विभाग आपस में उलझे हैं और यही वजह है कि ये सड़कें बदहाल हो चुकी हैं।
एक नजर...
12541 मीटर है शहर में सड़कों की लंबाई
03 विभागों के बीच बनी हुई है इनकी उलझन
06 प्रमुख सड़कों को लेकर होते रहे आंदोलन
03 करोड़ मुख्यमंत्री अधोसंरचना में सड़कों के लिए मिले
09 लाख रुपए का हाल में मरम्मत का टेंडर भी किया
13 जनवरी 2015 को इस परिषद का हुआ था शपथ समारोह
ये किया जाना था, लेकिन किया नहीं
सड़कों की गुणवत्ता ठीक रहे, इसके लिए इंजीनियर्स की जिम्मेदारी तय होना थी।
गारंटी अवधि में सतत निगरानी कर ठेकेदार से ही सुधार कराते, यहां निगम ने 9 लाख का टेंडर निकाला।
सड़क निर्माण से पहले पानी व सीवर की लाइनों के लिए डक्ट लाइनें तैयार कराते लेकिन ऐसा हो नहीं सका।
ये हैं जिम्मेदार, जिन्होंने नहीं दिया ध्यान
नेता और जनप्रतिनिधि, जिन्होंने सड़कों तक को दुरूस्त कराने पर गंभीरता नहीं दिखाई।
नगर निगम के वे अफसर, जिन्होंने करोड़ों रुपए फूंकने के बाद भी इस मुद्दे पर ध्यान नहीं दिया।
पीडब्ल्यूडी के अफसर जिन्होंने गुणवत्तापूर्ण सड़कें नहीं बनवाई, परफॉर्मेंस गारंटी पर भी ध्यान नहीं दिया।
सड़कों के सुधार पर किया काम
हमने परिषद के कार्यकाल में सड़कों के सुधार पर काम किया। डामरीकृत सड़कों की मरम्मत तो अब-भी चल रही है।
सुभाष कोठारी, महापौर
लगातार चलने वाली प्रक्रिया
सड़कों का सुधार कार्य लगातार चलने वाली प्रक्रिया है। सड़कों की मरम्मत व नवीनीकरण के कार्य चल रहे हैं।
हिमांशु सिंह, आयुक्त