खंडवा. पवित्र धाम ओंकारेश्वर की फिजा में जहर घुल रहा है। यह जहर कोई और नहीं बल्कि नर्मदा नदी में चल रही नाव में लगे डीजल इंजन से निकल रहा है। हर रोज सैकड़ों नाव से निकलने वाला धुएं का गुबार यहां के स्वच्छ माहौल को बिगाड़ने में कोई कसर नहीं छोड़ रहा। इस तीर्थ स्थल का वातावरण स्वच्छ बनाए रखने के लिए यहां कई बार इलेक्ट्रिक इंजन वाली नाव चलाने की योजना बनाई गई, लेकिन आदेश, निर्देश के बाद सभी योजनाएं कागजों में दम तोड़ती रहीं। मौजूदा हालात ऐसे हैं कि यहां अवैध नाव का संचालन प्रशासन की नाक के नीचे हो रहा है। बिना जांच के चल रही यह नाव प्रदूषण फैलाने में सबसे आगे हैं।
प्रदूषण रोकने के उपाय नहीं
तीर्थनगरी में 230 से अधिक डीजल इंजन वाली नावों का संचालन हो रहा है। इस इंजन से निकलने वाला ऑइल और डीजल नाव के अंदर ही गिरता है, जो रिस कर नर्मदा नदी में ही घुल जाता है। धुआं और ध्वनि प्रदूषण भी यह इंजन ज्यादा करते हैं। प्रदूषण को राकने और ओंकारेश्वर के साथ नर्मदा नदी को स्वच्छ रखने के लिहाज से प्रदूषण रहित इंजन लगाने की बनी थी। जो कागजों पर चलते चलते बंद हो गई।
प्रशासन को करना होगी पहल
नगरीय निकाय ओंकारेश्वर के अधिकारी कर्मचारी इस बात को स्वीकार कर रहे हैं कि डीजल इंजन वाली नाव से ध्वनि प्रदूषण बहुत ज्यादा होता है। इसके साथ ही इंजन का ऑइल नदी में गिरने से नर्मदा नदी प्रदूषित हो रही है। प्रदूषण मुक्त करने के लिए उच्च स्तर पर प्रयास हों तो ओंकारेश्वर की हवा में घुल रहे जहर से निजात मिल सकेगी। निकाय के कर्मचारी कहते हैं कि बैटरी या गैस वाले इंजन के लिए कलेक्टर की ओर से आदेश होने की देर है, उसका पालन शत प्रतिशत करा लिया जाएगा।
वर्जन…
वर्तमान में 174 नाव पंजीकृत हैं। प्रत्येक वर्ष नाव का नवीनीकरण किया जाता है।नवीनीकरण में इंजन की जांच, नाव की जांच, सुरक्षा उपकरणों की जांच, सवारी संख्या के हिसाब से लाइफ जैकेट जांचे जाते हैं। लाइफ जैकेट पहना कर यात्रियों को नाव में बिठाने के निर्देश हैं। नाव चालक की फिटनेस, मादक पदार्थ नहीं लेने का शपथ पत्र, हेल्थ सर्टिफिकेट, नाव चालक की तैराकी से संबंधित प्रमाण पत्र लिया जाता है। नाव के अवैध संचालन पर भी कार्रवाई करते हैं।
– नीरज रावत, राजस्व निरीक्षक, नगर परिषद ओंकारेश्वर
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ओंकारेश्वर में अवैध नाव का संचालन राजनैतिक हस्तक्षेप से हो रहा है। मौजूदा समय में करीब 80 नाव अवैध तरीके से चल रही हैं और कई नई नाव बनाने का काम चल रहा है। कुछ समय पहले नाव के इंजन जब्त करने के बाद चुनावी माहौल में सभी छोड़ दिए गए। डीजल इंजन से ही नाव चलती है। बैटरी वाले इंजन की योजना आई थी, लेकिन उसमें ताकत कम होती है। यहां की भौगोलिक परििस्थति के लिहाज से डीजन इंजन ही सही है। अगर प्रशासन जोर दे तो बैटरी इंजन से नाव चल सकती है।
– भोला राम केवट, अध्यक्ष, नाविक संघ, ओंकारेश्वर