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चौथी बार निविदा जारी होने के बाद भी ठेका नहीं

15 जून से बंद हो जाएगा मत्स्याखेटमत्स्य महासंघ,मछली विभाग की नाकामी उजागर
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खंडवा

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Shyam Kumar Awasthi

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Updated: 17 May 2023, 5:39 PM IST

चौथी बार निविदा जारी होने के बाद भी ठेका नहीं

चौथी बार निविदा जारी होने के बाद भी ठेका नहीं

नर्मदा नगर. चार बार निविदा जारी होने के बाद भी इंदिरा सागर जलाशय का मछली का ठेका नहीं हुआ है । जो डैम 57 करोड़ में नहीं चला ,तो उसकी कीमत कम करके टेंडर निकलता तो कोई ठेकेदार ,ठेका ले लेता पर * महासंघ ने किस आधार पर 57 करोड़ का ठेका 115 करोड़ का कर दिया और क्यों बढ़ा दिया यह समझ से परे है। वही चौथी बार की निविदा 81 करोड़ में भी कोई इस जलाशय का ठेका लेने में रुचि नही रख पाया है सूत्रों की माने तो मत्स्य महासंघ द्वारा मत्स्य संचय में भी जम कर गड़बड़ झाला किया गया है जिसके परिणाम स्वरूप मत्स्य उत्पादन में गिरावट आई है। पिछले पांच वर्षों के उत्पादन का आंकड़ा ओर वर्तमान में मछुवा समितियों को दिए गए कार्य की गणना की जाए तो दो माह में काफी कम मात्रा में मत्स्य आखेट किया गया है । इसके कारण महासंघ ने बकायदा उत्पादन बढ़ाने के लिए समितियों के मछुवारों को अधिक संख्या में पानी में जाने और मत्स्य आखेट कराने और उत्पादन बढ़ाने को कहा है। साथ ही नोटिस जारी करते हुए चेतावनी भी दी है कि अगर उत्पादन नहीं बढ़ाया गया तो कार्य पूर्ण रूप से बंद कर दिया जाएगा। हालांकि अभी तक के सभी टेंडर में महासंघ ने2022-23 का उत्पादन छुपाया है। धरोहर राशि भी 70 लाख से मनमाने ढंग से 199 लाख कर दी गई।
दो माह तक महासंघ ने खुद जलाशय को संचालित किया। महासंघ ने कितना उत्पादन किया , कितना खर्च हुआ और कितने फायदे में रहा। यदि यह व्यवस्था फायदेमंद है तो, महासंघ मध्यप्रदेश के जलाशयों को स्वयं क्यों नहीं चलाता नीलामी क्यों करता है।
बंद ऋतु,प्रजनन काल 15 जून से 15 अगस्त तक लागू होता है जिसमे मत्स्याखेट पूरी तरह बंद रहता है अंडे वाली मछलियों की चोरी की रोकथाम के लिए, महासंघ द्वारा क्या तैयारी है। मछुआरों की चिंता है की यदि समय पर नीलामी नहीं होती और कोई ठेकेदार जलाशय को नहीं लेता है, तो बंद ऋतु,में अंडे वाली मछलियों की चोरी बेधड़क होगी। उसे रोकने वाला कोई नहीं होगा और अगर मछलियों का प्रजनन नहीं हुआ तो, जलाशय मे मछलियों की संख्या घट जाएगी। इससे मछुआरों की आय मे भी कमी होने के आसार हैं।
जलाश्य मे कोई ठेकेदार नहीं रहने से गरीब मछुआरों को शासकीय योजनाओं का लाभ भी नहीं मिल पाता। समय पर ठेके नहीं उठने पर शासकीय राजस्व का भी नुकसान होता है। सिमरन फिशरीज से भी बकाया राशि वसूल करने में मत्स्य महासंघ अभी तक नाकाम रहा। आखिर क्यों दी गई महासंघ द्वारा सिमरन फिशरीज से 2021 2022 की रॉयल्टी नही जमा कराने के बाद भी कार्य करने की छूट।

सिक्योरटी की राशि जमा है मामला न्यायालय में है न्यायालय के निर्णय तक सिक्योरटी राशि को महासंघ के खाते में नहीं डाला जाएगा।
विनय कुमार राय रीजनल मैनेजर इंदिरा सागर


मात्र एक माह से भी कम समय है जिसमें 15 जून से मत्स्याखेट प्रतिबंधित हो जाएगा। महासंघ क्या इस बार प्रÓजन काल के दौरान अवैध मत्स्याखेट ओर मत्स्य चोरी रोक पाएगा। इनके पास तो इनके खुद के संसाधन ही नहीं है।
सदाशिव भंवरिया,प्रदेश अध्यक्ष मछुवा कांग्रेस