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मंत्री शाह के क्षेत्र में मुरम खनन का विरोध गहराया, भाजपा के पूर्व विधायक ले खोला मोर्चा

आदिवासी बहुल क्षेत्र खालवा में मुरम खनन का मामला तूल पकडऩे लगा है। पेसा समितियों की आपत्ति के बाद मंत्री शाह के विधानसभा क्षेत्र में भाजपा के पूर्व विधायक भी कूद पड़े । पूर्व विधायक राम दांगोरे भी पेसा समिति के अधिकारों को लेकर सोशल मीडिया पर सक्रिय हो गए हैं

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खंडवा

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Rajesh Patel

Apr 30, 2025

Tribal

पेसा एक्ट संरक्षित क्षेत्र धावड़ी में कंस्ट्रक्शन कंपनी ने लगाई खदान

आदिवासी बहुल क्षेत्र खालवा में पेसा समितियां सक्रिय हैं। धावड़ी पेसा समिति की आपत्ति के बाद भी खनन जारी, समर्थन में पूर्व विधायक राम दांगाेर सोशल मीडिया पर सक्रिय हा गए हैं।

विधायक ने पत्रिका में छपी खबर फेसबुक अकाउंट पर की पोस्ट

आदिवासी बहुल क्षेत्र खालवा में मुरम खनन का मामला तूल पकडऩे लगा है। पेसा समितियों की आपत्ति के बाद मंत्री शाह के विधानसभा क्षेत्र में भाजपा के पूर्व विधायक भी कूद पड़े । पूर्व विधायक राम दांगोरे भी पेसा समिति के अधिकारों को लेकर सोशल मीडिया पर सक्रिय हो गए हैं। उन्होंने अपने फेसबुक अकाउंट पर पत्रिका अखबार में छपी खबर की पोस्ट डाल कर लिखा है कि संवैधानिक शक्तियों के अनुसार कोई भी नियम गाम सभा के निर्णय से बड़ा नहीं होता है। ग्राम सभा अपनी सीमा क्षेत्र में कभी भी आदेश पलट सकती है।

पोस्ट वायरल हो रही, मंत्री ने की पूछताछ

विधायक की ओर से डाली गई पोस्ट सोशल मीडिया पर वायरल हो रही है। हालांकि मंत्री शाह वर्तमान समय में क्षेत्र में ही मौजूद हैं। उन्होंने स्वयं मामले को लेकर अधिकारियों से पूछताछ की है। पूर्व विधायक के सक्रिय होने के बाद फेसबुक में कई कमेंट आ गए हैं। कमेंट में जिला खनिज अधिकारी के स्थानांतरण पर भी सवाल उठ रहे हैं।

पूर्व विधायक के फेसबुक पर इस तरह के कमेंट

-स्थानांतरण के बाद भी खनिज अधिकारी सचिव वर्मा यूं ही नहीं जमें हैं ।

-जल जंगल जमीन की रक्षा करना हमारा फर्ज ।

-रामभाई सेटिंग का जमाना है आप की समिति दबाव में आ जाएगी।

-पेसा एक्ट आदिवासी भाई को यही अधिकार देता है। उनके इस हक का हनन नहीं होना चाहिए।

-पैसा बोलता है, जहां पैसा आ जाता है वहां सारे नियम फेल हो जाते हैं।

अफसरों ने जपं सीइओ से पूछा पेसा एक्ट का अधिकार

खालवा ब्लाक में पेसा एक्ट करीब ढाई साल से लागू है। इसके तहत समितियां गठित कर ली गई हैं। समितियों ने कुछ मामले में अच्छे फैसले भी लिए हैं। अभी हाल में श्रमिकों के पलायन के मामले में चकराना और धावड़ी में बांड भरने और शपथ पत्र का फैसला पूरे के 89 ब्लाकों में शुरू करने की कवायद शुरू हो गई है। लेकिन, मुरम खनन का मामला सामने आने पर जिला पंचायत कार्यालय और जिला प्रशासन ने जपं सीइओ से पेसा एक्ट की जानकारी मांगी है। इस मामले में जप सीइओ ने फील्ड में कर्मचारियों से चर्चा कर जानकारी जुटा रहीं हैं।

सरपंच-सचिव ठेकेदार की साथ, तालाब बनाने का आश्वासन

पत्रिका ने मामले को उठाया तो जिम्मेदार सक्रिय हुए। एक दिन पहले अपर कलेक्टर केआरबड़ोले ने पूरे मामले की जानकारी तहसीलदार राजेश कोचले से ली। तहसीलदार ने अपर कलेक्टर को मौखिक जानकारी दी है कि पंचायत स्तर पर अनापत्ति आने के बाद खदान जारी की गई है। पेसा समिति के कुछ सदस्य विरोध कर रहे हैं। उनकी मांग है कि पंचायत में तालाब का खनन किया जाए। कंस्ट्रक्शन कंपनी तालाब खनन करने का आश्वासन दिया है। इधर, पेसा समिति के अध्यक्ष ने कहा है कि खनन नहीं होना चाहिए। प्रारंभ में हमारे कुछ सदस्यों के दस्तखत करा लिया गया है। अब व भी मानने को तैयार नहीं है।