
Papaya cultivation
खंडवा. जब एक हजार पौधे खरीदे थे तो सोचा नहीं था कि एक पौधे पर इतने फल लगेंगे, बस किस्मत को आजमाया और मेहनत करते चले गए। यह बातें आज सबको बता रहे हैं बोरगांव के किसान जगदीश कुशवाह, जिन्होंने फरवरी माह में लगभग एक एकड़ में बेड तकनीक से पपीते के पौधे रोपे थे। किसान जगदीश कुशवाह ने बताया कि फरवरी माह में मन किया कि इस बार पपीता लगाया जाए। अन्य किसानों से पता किया और बड़वानी की एक रोपणी से तैयार आइस बेरी किस्म के एक हजार पौधे 22 रुपए प्रति पौधे की दर से खरीदे। लगभग एक एकड़ भूमि तैयार कर एक हजार पौधों को बेड तकनीक से लगाया और ड्रीप से सिंचाई की। शुरुआती एक से डेढ़ माह में कुछ पौधों पर बीमारी का प्रकोप दिखा। कई तरह की दवाइयों के छिड़काव के बाद भी लगभग दो सौ पौधे नष्ट हो गए।
लागत से आठ गुना आमदनी होने का अनुमान
किसान कुशवाह ने बताया कि फरवरी से अब तक पपीते की फसल पर पचास हजार की लागत लगा चुके हैं और अब उसमें फल लगना शुरू हो गए हैं। वर्तमान में पौधों पर फलों की संख्या बहुत अच्छी है और कुछ दिनों के बाद पहली बार विकसित फलों को तोड़ा जाएगा। किसान ने बताया कि पपीते के पौधे की उम्र दो वर्ष की है और आठ माह हो चुके हैं। अब कुछ दिनों के बाद विकसित फलों की तुड़ाई का कार्य शुरू हो जाएगा। अगले सोलह माह तक पौधे फल प्रदान करेंगे और किसान की माने तो लगभग चार लाख की उपज होने का अनुमान लगाया जा रहा है।
दो सौ पौधे नष्ट होने पर असफल होने का डर
नष्ट हुए पौधों को देख मायूसी छाई और पहले तो लगा कि हम असफल हो गए, लेकिन आस नहीं छोड़ी और फिर लगातार मेहनत के साथ एक-एक पौधे को समय-समय पर खाद व दवाई का छिड़काव किया। साथ ही मजदूर लगाकर खरपतवार निकलवाई। धीरे-धीरे मेहनत का फल दिखाई देने लगा और बचे आठ सौ पौधे हरे-भरे होकर बढऩे लगे। पौधों का विकास देख रुचि बढ़ी और फिर लगातार मेहनत से आज एक पौधे मे 60 से अधिक फल नजर आ रहे हैं। किसान कुशवाह ने बताया कि आज पौधों पर लगे फल देख नजरें नहीं हटती और मन खुशी से भर जाता है। जब गांव के अन्य किसान खेत मे आते हैं तो फसल की तारीफ करते हैं, जो मेरे लिए गर्व की बात है।
Published on:
15 Oct 2020 06:07 pm
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