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पूर्व सांसद बोले: वोटर को एेसी सरकार पसंद जो पेंशन दे और तीर्थयात्रा कराए

मध्यप्रदेश में जिला खंडवा के गौरीकुंज सभागृह में स्वामी विवेकानंद व्याख्यानमाला में पूर्व सांसद और एकात्म मानव दर्शन अनुसंधान एवं विकास प्रतिष्ठान नई दिल्ली के अध्यक्ष महेश शर्मा ने सरकार पर कसा तंज...

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Editorial Khandwa

Jan 15, 2017

Addressing Lecture Mahesh Sharma.

Addressing Lecture Mahesh Sharma.

खंडवा@पत्रिका
समाज एकात्मवादी सरकार नहीं बना रहा है, कोशिश जरूर कर रहा है। ये वर्तमान केंद्र सरकार भी इसी का नतीजा है। हालांकि वोटर को एेसी सरकारें पसंद हैं जो पेंशन दे, मिड-डे-मील दे और तीर्थयात्राएं कराएं। जब तक बेटा-बेटियों को मां-बाप की पेंशन से, मां को बच्चों के मिड-डे-मील से और पोतों को सरकार की तीर्थयात्रा से एतराज नहीं होगा तब तक एेसा ही चलता रहेगा। जिस दिन वोटर एेसा होगा, उस दिन एकात्मवादी शक्ति गढ़ सकते हैं।

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सिंह चौहान मुंह खोले रह गए
जब उनसे पूछे ये सवाल
, देखें
वीडियो में एक्सक्लूसिव
इंटरव्यू
:
भाजपा
प्रदेश अध्यक्ष नंद कुमार
चौहान बोले
- हवाला
कांड से मेरा और बेटे का लेना
देना नहीं



स्वामी विवेकानंद व्याख्यानमाला में ये बात पूर्व सांसद और एकात्म मानव दर्शन अनुसंधान एवं विकास प्रतिष्ठान नई दिल्ली के अध्यक्ष महेश शर्मा ने कही। उन्होंने कहा कि जगदगुरु शंकराचार्य और चाणक्य पर पहली किताब पं. दीनदयाल उपाध्याय ने लिखी और कहा कि संस्कृति और राजनीति को बचाना है। इनके सिद्धांतों पर चलना होगा।
भू-सांस्कृतिक राष्ट्रवाद से ही वसुधैव कुटुंबकम की भावना साकार होगी। संवरें भविष्य के लिए मस्तिष्क को उपनिवेशवाद से मुक्त करना होगा। अध्यक्षता उद्योगपति एवं समाजसेवी लखनलाल नागोरी ने की। आभार ललित पटेल ने माना।

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दंगल की शूटिंग के दौरान छोड़ी
ये बुरी आदत
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अब कभी नहीं करूंगा



...और इन मुद्दों पर ये बोले
सामाजिक विकृति है विचार शून्यता
किसी भी जीवित समाज के लिए विचारशील होना जरूरी है। विचार शून्यता सामाजिक विकृति है, रोग है। भारतीय, चीन, तिब्बत या थाईलैंड गए थे तो ज्ञान के प्रसार के लिए, जबकि भारत आने वाले लोग इसे लूटने की नियत से ही आए।

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मिट जाते हैं संस्कृति को भूलने वाले
भारत के चिरस्थायी होने का कारण उसका अपनी संस्कृति से जुड़ा होना है। जो अपने पूर्वर्जों को, अपनी संस्कृति को भूल जाते हैं, वे मिट जाते हैँ। जातिवाद विकृत होकर राजनीतिकृत हो गया है। राष्ट्र शब्द शिक्षा नीति में ही नहीं।

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व्यक्ति-समाज एक-दूजे बिन अधूरे
पं. दीनदयाल उपाध्यायन ने अहं ब्रह्मास्मि के सिद्धांत पर व्यक्ति और समाज को एकात्म बताते हुए विराट की कल्पना को एकात्म मानवता का रूप दिया। व्यक्ति समाज के बिना और समाज व्यक्ति के बिना अधूरा है।
Khandwa Gaurikunj listener present in the auditori

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नौकरी





भारतीयकरण होना बहुत ही जरूरी

पांच हजार साल के इतिहास में कभी भाषा के लिए लड़ाई नहीं हुई लेकिन संघात्मक शासन की स्थापना के लिए 1956 में पहली बार भाषा के लिए लड़े। भारत संघात्मक है, एकात्मक नहीं, ये झगड़े की जड़ है। भारतीयकरण होना जरूरी।

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डॉ. आंबेडकर और पं. दीनदयाल
डॉ. आंबेडकर के लिए कहा- उनके स्वर में शिकायतें, पं. दीनदयाल ने लिए बोले- उन्होंने समाधान की बात की। हालांकि जिस परिस्थितियों के कारण डॉ. आंबेडकर का जो स्वर रहा, वो गलत भी नहीं है।

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