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जानिएं कहां हो रही? 15 क्विंटल फेनी की रोजाना खपत

- खंडवा में रमजान के महीने में बुलाए जाते हैं कानपुर व राजस्थान से कारीगर

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Editorial Khandwa

Jul 07, 2016

Read Getting where? Daily consumption of 15 quinta

Read Getting where? Daily consumption of 15 quintals Feni




खंडवा. पवित्र रमजान के महीने में राजस्थानी व कानपुरी फेनी की महक शहर में घुली हुई है जो ईद की मिठास को दोगुना कर देगी। राजस्थान के जयपुर व यूपी के कानपुर से विशेष तौर पर एक महीने के लिए कारीगरों को यहां बुलाया गया है। यह तीन प्रकार की स्वादिष्ट फेनी बना रहे हैं फिलहाल शहर में रोजाना 15 क्विंटल तीनों वैरायटियों की खपत हो रही है।
शहर सहित ग्रामीण क्षेत्र मंे रमजान में इसका उपयोग किया जाता है। जिसके कारण इसकी डिमांड अधिक रहती है। शहर में तीन थोक व्यापारी है जो राजस्थान और कानपुर से कारीगर बुलाकर यहां फेनी को बनवाते हैं। 125 से अधिक फुटकर व्यापारी इसे बाजार सहित गली-मोहल्लों में बेचते हैं। यह फेनी 70 रुपए से लेकर 120 किलो तक उपलब्ध है। रोजाना 15 क्विंटल के हिसाब से महीनेभर में यह 450 क्विंटल बिक जाती है।
फेनी में केसर, शुद्ध घी, हेल्थ के लिए फायदेमंद
शहर के मुख्य फेनी विक्रेता नसीर खान के मुताबिक रोजे में इसका खास महत्व है। क्योंकि यह मैदा, केसर, चीनी के साथ शुद्ध देशी घी से बना आइटम हेल्थ के लिए फायदेमंद है जो रोजे में प्रोटिन व फुर्ती प्रदान करता है। फेनी केवल 10 डिग्री सेल्सियस तापमान में बनाया जाता है। खासकर यह राजस्थान व कानपुर की मुख्य मिठाई है।
फेनी चार रंगो में, दुकानें सजी
फेनी चार रंगो में बाजार में बिक रही है। इसमें बादामी रंग, जलेबी रंग, सफेद व क्रीम रंग में है। जो दिखने में आकर्षक होने के साथ-साथ लुभा रही है। मीठी व कम मीठी में भी मिल रही है। सादी फेनी 70 रुपए किलो है लेकिन केसर, पिस्ता, बादाम वाली 120 रुपए प्रति किलो बिक रही है।
खंडवा की फेनी मुंबई-नागपुर तक
खंडवा में 10 साल से कारीगर आकर फेनी बना रहे हैं। भोपाल, जबलपुर, इंदौर सहित महाराष्ट्र के मुंबई, नासिक, नागपुर सहित कई शहरों में भेजी जाती है। वहां के व्यापारी इसे खरीदकर ले जाते हैं। यह बनने के बाद 15 से 20 दिन तक खराब नहीं होती है। राजस्थान-कानपुर के 25 कारीगर महीनेभर के लिए यहां रहते हैं।
रोजे में पाक, हर साल डिमांड बढ़ रही
- पवित्र रमजान में रोजा खोलने में फेनी को पाक माना गया है। हम 10 साल से कारीगर बुलाकर इसे बना रहे हैं डिमांड हर साल बढ़ती जा रही है। - शफीक अहमद, थोक व्यापारी खंडवा