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सर्वार्थ सिद्धि योग में शयन करेंगे भगवान, चार महीने के लिए शुभ कार्य वर्जित

- बाजार में आभूषण, नए वाहन, बर्तन, कपड़े की जमकर हुई खरीददारी

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Editorial Khandwa

Jul 13, 2016

Siddhi Yoga Sarvartha been sleeping in the Lord, f

Siddhi Yoga Sarvartha been sleeping in the Lord, for four months auspicious taboo




खंडवा. देवशयनी एकादशी के साथ शुक्रवार को हिंदू धर्म का चातुर्मास शुरू हो जाएगा। इस बार भगवान श्रीहरि सर्वार्थ सिद्धि योग में शयन करेंगे। देवशयनी एकादशी पर सुबह 9.17 बजे से रात तक सर्वार सिद्धि योग है। सर्वार्थ सिद्धि योग में देव शयन को बहुत शुभ माना गया है। देव शयन के बाद एक बार फि र से तीज-त्यौहारों की धूम शुरू हो जाएगी। हालांकि इस दौरान मांगलिक कार्यों पर विराम लग जाएगा। एक बार फिर चार माह बाद 11 नवंबर को देव उत्थान एकादशी पर देव उठेंगे।
आखिरी दिन खुब हुई शादियां
पंडित अतुल शर्मा के मुताबिक बुधवार को भड़ली नवमी पर शादी-ब्याह और खरीदी के लिए अबूझ मुहूर्त होने के कारण जमकर खरीददारी हुई। वहीं इस दिन लग्न के लिए मुहूर्त नहीं देखा जाता। भड़ली नवमी का दिन विवाह के पवित्र बंधन में बंधन के लिए अक्षय तृतीया और बसंत पंचमी जैसी तिथियों के बराबर अबूझ मुहूर्त होता है। इस दिन बाजार से आभूषण, नए वाहन, बर्तन, कपड़े या कोई भी सामान की खरीदी चिरस्थाई होती है।
चातुर्मास जानें क्यों होता है खास
हिंदू कैलेंडर के अनुसार आषाढ़ के पांच दिन, श्रावण के 30 दिन, भाद्रपद के 30 दिन, अश्विनी के 30 दिन और कार्तिक के 11 दिन मिलकर चंद्रमास के हिसाब से 106 और सौरमास के हिसाब से 108 दिनों का चातुर्मास बनता है। विष्णु शयन के समय तंत्र शास्त्र का ज्ञान प्राप्त करने बनता है। यह चार मास इतने सिद्ध है कि इन महीनों में कृष्ण, शिव, गणपति, दुर्गा और सूर्य का पूजन होता है। चातुर्मास की अवधि में साधु-संत, संन्यासी और तपस्वी भी भ्रमण नहीं करते स्थान विशेष में देव आराधना में लीन रहते हैं।
चातुर्मास में ये नहीं कर सकते
े- शादी-ब्याह, उपनयन संस्कार, मुंडन संस्कार आदि सभी मांगलिक कार्य नहीं हो सकेंगे।
इन कार्यो को कर सकते है लोग
- वास्तु शांति, खनन, केवल श्रावण मास में शंकर, देवी और भैरव प्रतिमा प्रतिष्ठा की जा सकेगी।
पांच माह में शादी के मुहूर्त माह
नवंबर : 16, 23, 24
दसंबर : 1, 3, 8, 9, 12
जनवरी : 16, 17, 18, 22, 23
फरवरी : 5, 6, 18, 19, 23, 28
मार्च : 4, 13 (मुहूर्त पंडितों के अनुसार)
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