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यादों में किशोरः मेरे घर से तुमको कुछ सामान मिलेगा, दीवाने शायर का इक दीवान

किशोर कुमार की जयंती आज, प्रख्यात गायक की जन्मस्थली बदहाल, संवारने के बजाय विवाद में उलझी।

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खंडवा. दादाजी (घूनी वाले), दादा (पंमाखनलाल चतुर्बेदी) और दा (किशोर कुमार) इन्हीं से खंडवा प्रसिद्ध है। आज बात किशोर दा की, उनकी जयंती हैं। बॉम्बे बाजार में किशोर दा की जन्मस्थली है गांगुली हाउस। वक्त के साथ इस घरोहर को अतिक्रमण ने और जकड़ लिया है। यादों को सहेजे इस धरोहर की धीरे-धीरे झड़ते- मिटते हुए देखने का अवसाद भरा अनुभव बार-बार होता है।

हमेशा की तरह दरवाजे पर 45 साल से चॉकीदारी कर रहे सीताराम मिलते है। अब बरामदे तक ही जाया जा सकता है। भवन ज्यादा जर्जर होने से और भीतर या ऊपर जाने की मनाही है। सामने दीवार पर किशोर दा की फोटो है। नीचे कुछ और दुर्लभ फोटो, ठहरी हुईं घड़ी, केलेंडर। यहां फिल्‍म है 'नमक हराम' के गीत में शायर बदनाम के बोल "मेरे घर से तुमको कुछ सामान मिलेगा... दीवाने शायर का इक दीवान मिलेगा...' ऐसे लगते हैं, जैसे किशोर दा ने अपने लिए गाए हों।

कुल मिलाकर समृद्ध परंपरा, संस्कृति स्मृतियों को अपने में समेटे खंडवा ने आधुनिकता की चादर तो ओढ़ ली, पर अपने पुरोधा को यूं बिसरा दिया। अलग-अलग भाषाओं के 2900 से ज्यादा गानों में आवाज, 102 फिल्मों में अभिनय गीतों का लेखन, 15 फिल्मों की कहानी, 14 फिल्में बनाने और 12 फिल्मों का निर्देशन करने वाले हरफनमौला किशोर दा को बड़ा वर्ग जयंती-पुण्यतिथि पर ही याद करता है। एक वर्ग का भावुक पक्ष किशोर दा की स्मृतियों को बरकरार रखने की कोशिशों में सफल न हो पाना भी है।

खंडवा में बसना चाहते थे
खंडवा से किशोर दा को बेहद लगाव था। उन्होंने ने जब-जब स्टेज-शो किए, हमेशा संबोधन करते थे- "मेरे दादा दादियों। मेरे नाना-नानियों। मेरे भाई-बहनों, तुम सबको खंडवे वाले किशोर कुमार का राम-राम... नमस्कार। वे मुंबई की चकाचौंध से दूर खंडवा में ही बस जाना चाहते थे।

संग्रहालय का मामला अधर में
गांगुली हाउस को संग्रहालय में बदलने की कोशिशों पर विवाद है। किशोर केवंशज इसे बेचना चाहते हैं, लेकिन लोग संवारने पर जोर देते रहे हैं। बहरहाल यह मामला लंबे समय से अधर में है।