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महेश्वर, कसरावद और मंडलेश्वर में खासगी ट्रस्ट के अधीन निकली 101 संपत्तियां और 42 जमीन

कसौटी पर खासगी ट्रस्टMaheshwar, Kasaravad and Mandleshwar

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Maheshwar

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खरगोन. हाईकोर्ट के आदेश पर खासगी ट्रस्ट की संपत्तियों को शासन ने अपने कब्जे में ले लिया है। महेश्वर, कसरावद नावड़ातोड़ी और मंडलेश्वर में ट्रस्ट के अधीन 101 संपत्ति और 42 कृषि व अन्य जमीनों का खुलासा हुआ है। जिसका भौतिक सत्यापन राजस्व विभाग द्वारा गया । इन सभी संपतियों को शासकीय रिकॉर्ड में नामांतरित करने की प्रक्रिया अपनाई जाएगी। मंडलेश्वर एसडीएम संघप्रिय ने बताया कि भौतिक सत्यापन के बाद अगली कड़ी में रिकॉर्ड को सुरक्षित रखने के लिए एक-एक संपत्ति की वीडियोग्राफी कराई जाएगी। संभवत: गुरुवार को खरगोन कलेक्टर अनुग्रहा पी भी महेश्वर पहुंचकर मौका मुआयना करेगी। महेश्वर में ट्रस्ट के अधीन अब तक किला परिसर में होटल अहिल्या फोर्ट, लफूज कैफे, राजवाड़ा, सहित प्रमुख घाट और मंदिर थे। इन सभी को शासन ने अपने आधिपत्य में ले लिया है। कलेक्टर द्वारा प्रशासनिक कार्रवाई की जानकारी हासिल की जाएगी।

राशि सरकारी फंड में जमा होगी
महेश्वर में किला परिसर और नर्मदा घाटों पर बालीवुड की कई बड़े बजट की फिल्मों की शूटिंग हो चुकी है। ट्रस्ट यहां प्रशासनिक अनुमतियों के साथ धरोहर का शुल्क वसूलता था। अब यह राशि सरकारी फंड में जमा होगी। इसके अतिरिक्त प्री-वेडिंग फोटो शूट के लिए महेश्वर निवासी से 900 रुपए, महेश्वर क्षेत्र के बाहर समय 2 घंटे के लिए 1500 रुपए निर्धारित किया गया तथा 2 से 4 घंटे की समय सीमा के 2500 रुपए शुल्क लिया जाएगा । पूरे दिन के लिए घाट एवं किला परिसर पर पूरे दिन फोटो शूट के लिए 5000 शुल्क देना होगा । किसी फिल्म शूटिंग की के लिए तीन दिन किला बुक होने पर 60, 000 रुपए अदा करना होंगे।

खासगी ट्रस्ट के मंदिरों से जुड़ी जमीनों का सीमांकन कर प्रशासन द्वारा इनका कब्जा लिया जा रहा। साथ ही जिस जमीन पर शासन का नाम दर्ज नहीं होगा, उसे शासकीय अभिलेखों में मध्यप्रदेश शासन के नाम दर्ज किए जाने की बात सामने आ रही है। संभागीय कमिश्नर के आदेश के बाद कलेक्टर के निर्देश पर कसरावद अनुविभागीय अधिकारी संघप्रिय और नायब तहसीलदार और पटवारी को सोमवार को साथ लेकर सायता पहुंचे। एसडीएम और तहसीलदार शालिवाहन मंदिर स्थित 24 बाय 52 की धर्मशाला का नावड़ातोड़ी के श्रीराम मारुति तथा दत्त पादुका मंदिरों का सीमांकन कर प्रशासन के आधिपत्य में लिया। मौके पर की गई कार्रवाई का पंचनामा बनाया गया। साथ ही वीडियोग्राफी और फोटोग्राफी की गई। साथ ही पूरी रिपोर्ट कलेक्टर को भेजी गई ।